पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में वाम मोर्चा का प्रदर्शन इस बार भी कमजोर ही रहा. पार्टी का वोट शेयर घटकर 4.45 फीसदी रह गया, जो 2021 में 4.73 फीसदी था. हालांकि, इस बार वाम मोर्चा ने पांच साल पहले के शून्य के मुकाबले एक सीट जीतकर खाता जरूर खोला है.
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, वाम मोर्चा को यह गिरावट 2011 के मुकाबले काफी बड़ी मानी जा रही है, जब उसने करीब 39 फीसदी वोट हासिल किए थे और तीन दशक से ज्यादा समय तक सत्ता में रहने के बाद तृणमूल कांग्रेस से हार गया था. उस समय अकेले माकपा को करीब 30 फीसदी वोट मिले थे.
293 सीटों पर लड़े चुनाव, 1 पर मिली जीत
2026 के चुनाव में जहां 90 फीसदी से अधिक मतदान दर्ज हुआ, माकपा को कुल 293 सीटों में 4.45 फीसदी वोट मिले. पार्टी ने मुर्शिदाबाद जिले की डोमकल सीट पर जीत हासिल की, जबकि बाकी उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा. इस चुनाव में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस ने अधिकांश सीटों पर कब्जा जमाया.
अन्य घटक दलों का प्रदर्शन भी खराब
वाम मोर्चा के अन्य घटक दलों का प्रदर्शन भी बेहद कमजोर रहा और कोई भी पार्टी 1 फीसदी वोट शेयर तक नहीं पहुंच सकी. माकपा केवल दो सीटों, भगवानगोला और जलंगी पर दूसरे स्थान पर रही, दोनों ही मुर्शिदाबाद जिले में हैं.
कई बड़े चेहरे हारे
चुनाव में पार्टी के कई प्रमुख चेहरे भी खास प्रदर्शन नहीं कर सके. वरिष्ठ वकील बिकाश रंजन भट्टाचार्य, केंद्रीय समिति सदस्य मीनाक्षी मुखर्जी और एसएफआई की नेता दीप्सिता धर अपने-अपने क्षेत्रों में शीर्ष दो स्थानों तक भी नहीं पहुंच सकीं.
294 में से 252 सीटों पर उम्मीदवार उतारे
वाम मोर्चा ने कुल 294 में से 252 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे. इसमें माकपा ने 195 सीटों पर चुनाव लड़ा, जबकि अन्य सहयोगी दलों ने बाकी सीटों पर किस्मत आजमाई. इस बार वाम मोर्चा ने ऑल इंडिया सेक्युलर फ्रंट और सीपीआई(एमएल) लिबरेशन के साथ गठबंधन किया, लेकिन कांग्रेस के साथ तालमेल नहीं बन सका.
294 सीटों में दो पर जीत मिली
वहीं, कांग्रेस ने सभी 294 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ा और दो सीटों पर जीत हासिल की. ऑल इंडिया सेक्युलर फ्रंट ने भांगड़ सीट पर अपनी पकड़ बरकरार रखी. 2021 में वाम मोर्चा, कांग्रेस और एआईएसएफ ने मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन तब दोनों ही दल खाता नहीं खोल पाए थे.
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