केरलम का अगला CM कौन? हफ्तेभर से सस्पेंस बरकरार, कांग्रेस के इन 3 नेताओं के नाम पर मंथन तेज

केरलम में कांग्रेस अब तक मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला नहीं ले पाई है. दिल्ली में लगातार बैठकों और नेताओं को तलब किए जाने के बीच सस्पेंस और गहरा गया है. पार्टी के भीतर अलग-अलग दावे, सहयोगी दलों की बेचैनी और समय का दबाव हाईकमान के सामने नई चुनौती है.

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102 सीटें जीतने के बाद भी कांग्रेस फैसला नहीं कर पाई, दिल्ली में लगातार बैठकों का दौर. (File Photo: ITG) 102 सीटें जीतने के बाद भी कांग्रेस फैसला नहीं कर पाई, दिल्ली में लगातार बैठकों का दौर. (File Photo: ITG)

शिबिमोल

  • तिरुवनंतपुरम ,
  • 11 मई 2026,
  • अपडेटेड 9:50 PM IST

केरलम विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी UDF ने बड़ी जीत हासिल की है. इसके बावजूद एक हफ्ते से ज्यादा समय बीत गया है, लेकिन अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इस पर सस्पेंस बरकरार है. कांग्रेस हाईकमान अब तक किसी नाम पर आखिरी फैसला नहीं ले पाया है. इसी बीच दिल्ली में नए नेताओं को बुलाए जाने से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है.

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4 मई को चुनाव नतीजे घोषित हुए थे, लेकिन उसके बाद से अब तक कांग्रेस नेतृत्व मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर सहमति नहीं बना पाया है. इस देरी ने न सिर्फ पार्टी के भीतर चर्चा तेज कर दी है, बल्कि UDF के सहयोगी दलों के बीच भी बेचैनी बढ़ने लगी है. ताजा घटनाक्रम में कांग्रेस हाईकमान ने केरलम के कई वरिष्ठ नेताओं को दिल्ली बुलाया है, ताकि सरकार गठन पर उनकी राय ली जा सके. 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मुरलीधरन केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं. उनको मंगलवार को दिल्ली स्थित AICC मुख्यालय पहुंचने के लिए कहा गया है. दिल्ली रवाना होने से पहले मुरलीधरन ने कहा कि केरल के अगले मुख्यमंत्री को लेकर फैसला अगले 48 घंटों में होने की उम्मीद है. उनके बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं और तेज हो गई हैं.

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मुरलीधरन के अलावा कांग्रेस हाईकमान ने KPCC के वाइस प्रेसिडेंट एपी अनिल कुमार, शफी परम्बिल, पीसी विष्णुनाथ और वरिष्ठ नेता तिरुवंचूर राधाकृष्णन को भी बातचीत के लिए दिल्ली बुलाया है. ऐसा माना जा रहा है कि हाईकमान सभी पक्षों की राय लेकर अंतिम फैसला करना चाहता है. ये पूरा घटनाक्रम ऐसे समय हो रहा है, जब मौजूदा केरल विधानसभा का कार्यकाल 23 मई को खत्म होने वाला है. 

ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व पर सरकार गठन की प्रक्रिया जल्द पूरी करने का दबाव लगातार बढ़ रहा है. फिलहाल मुख्यमंत्री पद की दौड़ तीन बड़े कांग्रेस नेताओं के इर्द-गिर्द घूमती दिखाई दे रही है. इनमें रमेश चेन्निथला, AICC जनरल सेक्रेटरी (ऑर्गनाइजेशन) केसी वेणुगोपाल और विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीशन शामिल हैं. शनिवार को कांग्रेस हाईकमान ने तीनों नेताओं से विस्तार से बातचीत की थी. 

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने वीडी सतीशन, केसी वेणुगोपाल, रमेश चेन्निथला, सनी जोसेफ और AICC की केरल प्रभारी महासचिव दीपा दासमुंशी से भी मुलाकात की है. यह बैठक कांग्रेस लेजिस्लेचर पार्टी के नेता के चयन की प्रक्रिया का हिस्सा थी, क्योंकि वही नेता आखिरकार केरल का अगला मुख्यमंत्री बनेगा. सूत्रों के मुताबिक, केसी वेणुगोपाल का पलड़ा भारी है.

कांग्रेस के ज्यादातर विधायक मुख्यमंत्री पद के लिए उनका समर्थन कर रहे हैं. वहीं, वीडी सतीशन को जनता के बीच ज्यादा लोकप्रिय माना जा रहा है. यही वजह है कि हाईकमान फिलहाल किसी जल्दबाजी में फैसला लेने से बचता दिख रहा है. सीनियर कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने सोमवार को मुख्यमंत्री चयन में हो रही देरी का बचाव किया. उन्होंने कहा कि ये कांग्रेस की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है.

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दिल्ली से लौटने के बाद चेन्निथला ने कहा, ''हमें जो कुछ भी कहना था, हमने हाईकमान को बता दिया है. उन्होंने सब कुछ सुन लिया है. अब फैसला उन्हें करना है.'' दिल्ली में हुई बैठक के बाद केरलम कांग्रेस नेताओं और दीपा दासमुंशी ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील भी की कि वे मुख्यमंत्री पद की दौड़ में किसी एक नेता के समर्थन में विरोध प्रदर्शन न करें और न ही फ्लेक्स बोर्ड लगाएं.

सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री पद को लेकर बढ़ती देरी से UDF के सहयोगी दलों के बीच भी असहजता बढ़ रही है. हालांकि, गठबंधन ने चुनाव में बड़ी जीत दर्ज की है, लेकिन सरकार गठन में हो रही देरी को लेकर अंदरखाने सवाल उठने लगे हैं. 140 सदस्यीय केरल विधानसभा में UDF ने 102 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा आसानी से पार कर लिया है. गठबंधन में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है.

कांग्रेस ने 63 सीटें जीती हैं. इसके अलावा इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग यानी IUML को 22 सीटें मिलीं, जबकि केरलम कांग्रेस को 8 और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी यानी RSP को 3 सीटों पर जीत मिली. ऐसे में पावर शेयरिंग और राजनीतिक संतुलन को लेकर सहयोगी दलों की राय भी कांग्रेस के लिए अहम मानी जा रही है. अब सबकी नजर कांग्रेस हाईकमान के अगले फैसले पर टिकी है. 

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