आंखों-देखी: 'कांग्रेसी मंत्री' से जनता के 'मामा' बनने तक का सफर, क्या फिर इतिहास रचेंगे हिमंता?

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने जालुकबाड़ी से अपना नामांकन दाखिल किया. भारी बारिश के बावजूद लाखों समर्थकों ने सड़क पर उतरकर उनका स्वागत किया. हिमंता ने विकास और अवैध घुसपैठ को अपनी प्राथमिकता बताते हुए भारी बहुमत से जीत का दावा किया है.

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भारी बारिश के बावजूद भी हिमंता की रैलियों में बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. (Photo-ITG) भारी बारिश के बावजूद भी हिमंता की रैलियों में बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. (Photo-ITG)

पीयूष मिश्रा

  • गुवाहाटी,
  • 21 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 12:06 AM IST

'पहले यह कांग्रेस के मंत्री थे, लेकिन अब हमारे लिए ‘मामा’ है, इनके लिए तो जान भी हाजिर है...' जानिए क्यों जालुकबाड़ी का एक शख्स हिमंता बिस्वा सरमा को नामांकन दाखिल करते हुए देखकर भावुक हो गया.

जब दिल्ली से असम जाने वाली फ्लाइट उड़ान भरने वाली थी, तब मन में कई ख्याल आ रहे थे. इससे पहले मैं कई बार असम जा चुका हूं, लेकिन इस बार कुछ अलग था, क्योंकि हिमंता बिस्वा सरमा पहली बार अपने चेहरे पर असम का चुनाव लड़ रहे हैं. मन में कई सवाल थे-आख़िर इस बार के चुनाव में ऐसा क्या है कि हिमंता बिस्वा सरमा इतने ज़्यादा आत्मविश्वास से भरे हुए हैं कि वे फिर से मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. और क्यों उन्हें लगता है कि इस बार असम में बीजेपी की जीत का आंकड़ा इतिहास रच देगा?

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दिल्ली में मौसम खराब होने की वजह से फ्लाइट लगभग एक घंटा लेट थी, इसलिए गुवाहाटी में रात करीब 12 बजे के आसपास फ्लाई की लैंडिंग हुई. फ्लाइट लैंड होने के बाद सामान लिया और टैक्सी की तरफ बढ़े. टैक्सी में बैठते ही हमने ड्राइवर रिकी से असम की राजनीति पर बातचीत शुरू कर दी. बातों ही बातों में गाड़ी कुमार भास्कर वर्मा सेतु पर पहुंच गई, जो गुवाहाटी और नॉर्थ गुवाहाटी को जोड़ता है. आपको बता दें कि लगभग 3030 करोड़ रुपये की लागत से बना यह पुल ब्रह्मपुत्र नदी के ऊपर बनाया गया है.

बदलता असम: रिकी की जुबानी

रिकी ने बताया कि पहले के मुकाबले असम में कानून-व्यवस्था में काफी सुधार हुआ है. उन्होंने बताया,"पहले बहुत भ्रष्टाचार था. पैसे देकर नौकरियां मिलती थीं, लेकिन अब ऐसा नहीं होता. मेरे कई दोस्तों को अब बिना पैसे दिए नौकरी मिली है. पहले सड़कें सिर्फ गुवाहाटी तक सीमित थीं, लेकिन अब असम के अलग-अलग इलाकों में भी अच्छी सड़कें बन गई हैं. पहले गुवाहाटी से तेजपुर पहुंचने में लगभग 6 घंटे लगते थे, लेकिन अब 2.5 घंटे में पहुंच जाते हैं."

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इसी बीच हमने वह मुद्दा छेड़ दिया, जिस मुद्दे को लेकर असम के मुख्यमंत्री कांग्रेस पर सबसे ज्यादा हमलावर रहते हैं और वह है बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा. रिकी ने बताया, 'पहले कुछ मियां लोगों ने असम में आतंक का माहौल बना रखा था, लेकिन जब से हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार आई है, उनमें डर पैदा हुआ है. पहले उन्हें कोई डर नहीं था. यहां के मुसलमान अच्छे भी हैं, लेकिन जो मियां बांग्लादेश से आए हैं, उनके बारे में लोगों में नाराजगी है. लोगों का कहना है कि वे हिंसा करने से नहीं डरते, जबकि हम लोगों को डर रहता है कि हम किसी पर हमला न करें. पहले वे बेखौफ रहते थे, लेकिन हिमंत सरकार आने के बाद कई चीजों में बदलाव आया है.'

ड्रग्स असम में, खासकर गुवाहाटी में, एक बहुत बड़ी समस्या थी. पहले अलग-अलग जगहों पर युवा लड़कों को सिरिंज लेकर बैठे देखा जाता था, लेकिन अब ऐसा कम हो गया है. हिमंता बिस्वा सरमा के आने के बाद असम में काफी बदलाव हुआ है. नया एयरपोर्ट बन गया है और साथ ही नए होटल भी बन रहे हैं, जिससे लोगों को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं. हालांकि एक समस्या अभी भी है कि कुछ अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं. कुछ दिन पहले यहां एक पुल बना था, लेकिन वह कुछ ही दिनों में टूटने लगा. इस पर मुख्यमंत्री को ध्यान देने की जरूरत है.

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तभी अचानक गाड़ी ने लेफ्ट लिया और होटल के अंदर प्रवेश कर गई. काफी रात हो चुकी थी, इसलिए हल्का सा कुछ खाने के बाद सोने चले गए, क्योंकि अगले दिन सुबह जल्दी उठना था ताकि समय पर पहुंचकर असम के मुख्यमंत्री के नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया को कवर कर सकें.

बारिश भी नहीं रोक पाई 'मामा' का जादू

अगले दिन जब हम रैली स्थल पर पहुंचे, तब तेज बारिश हो रही थी. हिमंता नामांकन दाखिल करने से पहले एक बड़ा रोड शो करने वाले थे और रोड शो से पहले एक रैली को संबोधित करने जा रहे थे. लेकिन तेज बारिश की वजह से बीजेपी समर्थक इधर-उधर हो गए.

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लेकिन जैसे ही हिमंता बिस्वा सरमा कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, सभी लोग बारिश की परवाह किए बिना वहां एकत्रित हो गए. इसी बीच हमने देखा कि कुछ लोग बिहू नृत्य करते हुए हिमंता का स्वागत कर रहे थे. काफी बड़ी संख्या में महिलाएं हाथों में थाली लेकर वहां पहुंची थीं जिनमें फूल, माला थी. जब हमने महिलाओं से पूछा कि वे आरती की थाली क्यों सजाकर लाई हैं, तो उनमें से एक महिला ने कहा- “हिमंता बिस्वा सरमा हमारे लिए भगवान हैं. हम भगवान के लिए थाली सजाकर लाए हैं. हम उनकी आरती उतारेंगे ताकि वे फिर से जीतकर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनें.”

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तभी अचानक “आहिस्ते-आहिस्ते हिमंता… आहिस्ते”, जो असम बीजेपी का थीम सॉन्ग भी है, फुल वॉल्यूम में स्पीकर्स पर बजने लगा और हिमंता का रोड शो शुरू हो गया. जो महिलाएं हमसे बात कर रही थीं, वे अचानक आगे की ओर भागने लगीं, क्योंकि उन्हें असम के मुख्यमंत्री की एक झलक लेनी थी. हिमंता के रोड शो के दौरान उनकी पत्नी और उनका बेटा दोनों उनके साथ मौजूद थे. धीरे-धीरे काफिला आगे बढ़ा और मैंने हिमंता का एक इंटरव्यू लेने की कोशिश की, लेकिन भीड़ इतनी ज्यादा थी कि भीड़ ने मुझे काफी दूर धकेल दिया.

इसी बीच एक समर्थक ने हवा में गुलाल उड़ाना शुरू कर दिया और फूलों की वर्षा कर दी. यह गुलाल मेरी पूरी शर्ट पर लग गया और कई फूल मेरे कपड़ों के अंदर तक पहुंच गए. धीरे-धीरे काफिला आगे बढ़ता रहा और लगभग 10 किलोमीटर के रास्ते में लाखों की संख्या में असम के लोग हिमंता का स्वागत करने के लिए सड़कों पर उतर आए.

रास्ता भले ही 10 किलोमीटर का था, लेकिन यह सफर करीब 3 घंटे में पूरा हुआ, क्योंकि जगह-जगह हिमंता का जोरदार स्वागत हो रहा था. इस पूरे सफर के दौरान हमें पूरे असम की एक झलक भी देखने को मिली, क्योंकि कई जगहों पर बिहू नृत्य और ढुलिया नृत्य देखने को मिला. लोग पारंपरिक असमिया कपड़ों में तैयार होकर हिमंता का स्वागत करने के लिए आए हुए थे. कुछ लोग “मामा, आई लव यू” के नारे लगाते हुए भी सुनाई दिए.

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तभी मैंने एक समर्थक से पूछा कि हिमंता को “मामा” क्यों कहा जा रहा है. उन्होंने बताया, “हिमंता अब सिर्फ मुख्यमंत्री नहीं हैं, बल्कि हमारे परिवार का एक सदस्य हैं, इसलिए वे हमारे ‘मामा’ हैं.” एक लंबा पैदल सफर तय करने के बाद हिमंता आखिरकार गुवाहाटी के जिला चुनाव कार्यालय पहुंच गए. एक तरफ जहां हिमंता अपना नामांकन दाखिल कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर गेट के बाहर बीजेपी समर्थक लगातार बिहू नृत्य कर रहे थे और ढुलिया की धुन पर नाच-गा रहे थे.

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थोड़ी देर बाद हिमंता बाहर निकले और उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे इस बार भारी बहुमत से जीत हासिल करने वाले हैं और बीजेपी असम में एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड दर्ज करने जा रही है. चुनाव कार्यालय के बाहर खड़े एक समर्थक से मैंने पूछा कि हिमंता को इतना प्यार और आशीर्वाद क्यों मिलता है, उन्होंने ऐसा क्या किया है? इस पर समर्थक भूपेन ने कहा, “आप मुझसे यह पूछिए कि हिमंता ने क्या नहीं किया. सबसे बड़ा काम उन्होंने यह किया है कि अब हम असम में सुरक्षित महसूस करते हैं. हिमंता हमारे जिगर का टुकड़ा हैं, उन्होंने हमारा जीवन बदल दिया. कांग्रेस में तो वे एक मंत्री थे, लेकिन अब वे हमारे ‘मामा’ हैं और आज हम अपने मामा और मामी को यहां देखने के लिए आए हैं.”

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परिवार और राजनीति का संगम

मीडिया से बात करने के बाद हिमंता वहां से निकले, लेकिन वे अपनी गाड़ी में नहीं बैठे, बल्कि पैदल ही चलने लगे. इस पैदल सफर के दौरान उन्होंने कई कार्यकर्ताओं से मुलाकात की, उनका हालचाल जाना और एक लंबा पैदल रोड शो किया. जैसे ही हिमंता ने पैदल चलना शुरू किया, सुरक्षा कर्मियों के हाथ-पांव फूल गए, क्योंकि यह योजना में नहीं था और अचानक हिमंता बिना सुरक्षा के लोगों के बीच पहुंच गए.एक तरफ जहां हिमंता लोगों के बीच पैदल चल रहे थे, वहीं उनसे कुछ दूरी पहले उनकी गाड़ी में उनकी धर्मपत्नी और उनका बेटा मौजूद थे. मुझे उनसे बातचीत करने का मौका मिला. मेरी बातचीत के दौरान उनकी धर्मपत्नी ने बताया कि यह पल उनके लिए काफी भावुक है.

हिमंता बिस्वा सरमा  रिनिकी भुइयां शर्मा, की पत्नी कहती हैं,"यह एक बहुत भावुक पल है… मैं लोगों का प्यार देख सकती हूं… मेरे पास शब्द कम पड़ रहे हैं. हेमंता हमेशा से एक जन-नेता रहे हैं और जिस तरह से वह काम कर रहे हैं और खुद को प्रस्तुत कर रहे हैं वो अद्भुत है… हम इस पूरे खूबसूरत सफर का हिस्सा हैं. जालुकबाड़ी कभी सिर्फ एक विधानसभा क्षेत्र नहीं रहा… यह एक विस्तारित परिवार है… मुझे पूरा विश्वास है कि हिमंता फिर से मुख्यमंत्री बनेंगे"

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हिमंता के बेटे नंदिल बिस्वा सरमा कहते हैं, "यह सब लोगों का पापा के प्रति प्यार है… मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि मैं इसका हिस्सा हूं. मैंने अभी राजनीति में आने के बारे में नहीं सोचा है… मैं फिलहाल अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे रहा हूं"

इस बातचीत के बाद हिमंता वापस अपनी गाड़ी में आ गए और वहां से बीजेपी पार्टी कार्यालय की ओर रवाना हो गए. कुछ देर बाद हमारी मुलाकात असम के मुख्यमंत्री से बीजेपी मुख्यालय में हुई, जहां उन्होंने आज तक से बातचीत करते हुए बताया कि अगर बीजेपी की सरकार फिर से बनती है, तो अगले पांच साल के लिए उनका क्या विज़न और भविष्य की योजना है.

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बीजेपी मुख्यालय से सीधा संदेश

हिमंता कहते हैं, "पिछले 5 साल में प्रधानमंत्री जी के आशीर्वाद से बहुत सारे काम असम में हुए हैं ..हमने विकास पर अपना फोकस रखा इसी के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा पर भी काम किया है. अवैध घुसपैठ एक बड़ा मुद्दा है असम में. इसके साथ हमको लड़ते रहना पड़ेगा. अवैध घुसपैठी तो आप यहां पर मेन स्ट्रीम में आ चुके हैं, अंदर घुस चुके हैं यह लोग. इसका कोई एंटीबायोटिक नहीं है. इस पर आपको सुबह सोचना है और शाम में करना है. अगर मेरे पास इस समस्या की कोई दवाई होती है तो मैं तुरंत दे देता. असम में बड़ी मात्रा में पलायन हुए है. असम के 12 जिलों में हम माइनॉरिटी बन चुके हैं. यह लोग (अवैध घुसपैठी) खुल्लम-खुल्ला अत्याचार करते हैं. असम एक कनफ्लिक्ट जोन बन चुका है क्योंकि अवैध घुसपैठी की समस्या का समाधान आपके हाथ में नहीं है.अगर सभी कांग्रेसी बीजेपी को सपोर्ट करेंगे तो मैं बीजेपी छोड़ दूंगा"

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