चुनाव आयोग (EC) ने पश्चिम बंगाल में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया की निगरानी को और मजबूत करने के लिए चार और स्पेशल रोल ऑब्जर्वर (SRO) नियुक्त किए हैं. आयोग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, जिन अधिकारियों को SRO के रूप में नामित किया गया है, उनमें रतन बिस्वास, विकास सिंह, संदीप रेवाजी राठौड़ और डॉ. शैलेश शामिल हैं.
एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को बताया कि ये सभी SRO राज्य में मतदाता सूची के पुनरीक्षण और सत्यापन की प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी रखेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि चुनाव आयोग द्वारा जारी सभी वैधानिक निर्देशों का सख्ती से पालन हो. अधिकारी के मुताबिक, इन नियुक्तियों का उद्देश्य मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया में पारदर्शिता, सटीकता और निर्देशों का समान रूप से क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है.
अधिकारी ने कहा, 'स्पेशल रोल ऑब्ज़र्वर जमीनी स्तर पर स्वतंत्र रूप से पूरे पुनरीक्षण कार्य की समीक्षा करेंगे. यदि किसी भी स्तर पर निर्देशों के पालन में कमी या अनियमितता पाई जाती है, तो वे उसे तुरंत चिह्नित करेंगे ताकि तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जा सके.' चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि SRO के अलावा भी विभिन्न स्तरों पर अन्य पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है, जो पश्चिम बंगाल में चल रही SIR प्रक्रिया पर नजर रखेंगे.
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इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची पूरी तरह त्रुटिरहित हो और किसी भी योग्य मतदाता का नाम छूटे नहीं, जबकि अयोग्य या डुप्लिकेट नामों को हटाया जा सके. अधिकारी ने आगे कहा, 'इस पूरी कवायद का मुख्य फोकस मतदाता सूची की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को लेकर आम जनता के विश्वास को और मजबूत करना है.' चुनाव आयोग का मानना है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए त्रुटिरहित और पारदर्शी मतदाता सूची बेहद अहम है.
अधिसूचना के अनुसार, इन चारों SRO की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है और यह अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी. चुनाव आयोग ने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर आगे भी निगरानी व्यवस्था को और सख्त किया जा सकता है. यह कदम चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, खासकर राज्य में राजनीतिक विवादों के बीच. बता दें कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रतिक्रया के तहत अंतिम मतदाता सूची फरवरी 2026 में प्रकाशित होगी.
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