बंगाल में हर विधानसभा के मुद्दे उठाएगी बीजेपी... टीएमसी को घेरने का बनाया नया प्लान

पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी बढ़ने से पहले BJP ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को घेरने के लिए नई रणनीति अपनाई है. पार्टी ने विधानसभा वार चार्जशीट जारी कर भ्रष्टाचार, कल्याण योजनाओं, भर्ती और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को सीधे जनता के सामने रखने की कोशिश की है.

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BJP ने पश्चिम बंगाल में टीएमसी को हर विधानसभा में घेरने की तैयारी की है. BJP ने पश्चिम बंगाल में टीएमसी को हर विधानसभा में घेरने की तैयारी की है.

पीयूष मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 08 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:16 AM IST

पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर टकराव के नए दौर में प्रवेश करती दिख रही है. भारतीय जनता पार्टी ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ विधानसभा-वार चार्जशीट जारी कर स्थानीय मुद्दों को लेकर सीधा हमला बोला है. आने वाले चुनाव से पहले BJP की इस पहल को रणनीतिक तौर पर बेहद अहम माना जा रहा है.

BJP ने राज्य की कई विधानसभा सीटों के लिए अलग-अलग चार्जशीट सार्वजनिक की हैं. पार्टी नेताओं का कहना है कि यह एक समन्वित अभियान है, जिसका मकसद बड़े राजनीतिक नारों से हटकर रोजमर्रा के प्रशासनिक मुद्दों, सेवा वितरण और स्थानीय शासन की विफलताओं को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाना है.

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विधानसभा स्तर पर सियासी घेराबंदी

BJP का दावा है कि अब तक दर्जनों विधानसभा क्षेत्रों की चार्जशीट जारी की जा चुकी हैं और आने वाले दिनों में राज्य की सभी सीटों को इस अभियान के दायरे में लाया जाएगा. इन दस्तावेजों में भ्रष्टाचार, कल्याण योजनाओं में अनियमितता, नागरिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कामकाज से जुड़े आरोप शामिल किए गए हैं.

पार्टी का कहना है कि हर चार्जशीट स्थानीय शिकायतों, जमीनी अनुभवों और क्षेत्रीय समस्याओं पर आधारित है, ताकि मतदाता शासन को अपने रोजमर्रा के अनुभवों के आधार पर परख सकें.

हाइपर-लोकल गवर्नेंस पर फोकस

यह रणनीति भारतीय चुनावी राजनीति में तेजी से बढ़ रहे 'हाइपर-लोकल कैंपेनिंग' के ट्रेंड को दर्शाती है. BJP का मानना है कि सड़क, बिजली, पानी, कल्याण योजनाओं तक पहुंच, भर्ती प्रक्रियाएं और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे सीधे तौर पर मतदाताओं के जीवन को प्रभावित करते हैं.

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पार्टी नेताओं का कहना है कि विधानसभा-विशेष चार्जशीट से मतदाता व्यापक राजनीतिक विमर्श के बजाय अपने क्षेत्र की वास्तविक स्थिति पर ध्यान केंद्रित कर पाएंगे. BJP इसे जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देख रही है.

कल्याण योजनाओं पर सवाल

चार्जशीट में कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन को एक अहम मुद्दा बनाया गया है. BJP ने आरोप लगाया कि कई पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाया, जबकि कुछ क्षेत्रों में अनौपचारिक भुगतान की मांग की शिकायतें सामने आई हैं.

ग्रामीण इलाकों से आवास योजनाओं में देरी, लाभार्थियों के चयन में पारदर्शिता की कमी और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप भी लगाए गए हैं. BJP का दावा है कि यदि ये आरोप सही हैं, तो यह कल्याणकारी योजनाओं की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं.

हालांकि, तृणमूल कांग्रेस पहले भी ऐसे आरोपों को सिरे से खारिज करती रही है और दावा करती रही है कि उसकी योजनाओं से राज्य में लाखों लोगों को लाभ मिला है.

भर्ती विवाद फिर केंद्र में

भर्ती से जुड़े विवाद भी BJP की चार्जशीट का बड़ा हिस्सा हैं. पार्टी ने शिक्षक भर्ती और स्कूल स्तर की नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं का जिक्र करते हुए कहा है कि इससे युवाओं का भरोसा टूटा है.

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विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी नौकरियों से जुड़ा मुद्दा शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में खासा असर डाल सकता है, क्योंकि युवाओं के लिए रोजगार स्थिरता और भविष्य से जुड़ा अहम सवाल है. TMC का कहना है कि सभी नियुक्तियां तय प्रक्रिया के तहत हुई हैं और विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है.

कानून-व्यवस्था और सुरक्षा पर सवाल

चार्जशीट में कानून-व्यवस्था, राजनीतिक हिंसा और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं. BJP ने स्थानीय चुनावों के दौरान हिंसा, कुछ जिलों में झड़पों और महिलाओं के खिलाफ अपराधों का हवाला दिया है.

इसके अलावा सीमावर्ती और नदी-तटीय इलाकों में कथित अवैध गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. राज्य सरकार का दावा है कि बंगाल में स्थिति नियंत्रण में है और प्रशासनिक कदम लगातार मजबूत किए जा रहे हैं.

सियासी बहस का केंद्र बनेगा गवर्नेंस

जैसे-जैसे चुनावी गतिविधियां तेज होंगी, गवर्नेंस का मुद्दा BJP और TMC के बीच मुख्य सियासी रणभूमि बनता दिख रहा है. भ्रष्टाचार, प्रशासनिक दक्षता, कल्याण योजनाएं, भर्ती और सुरक्षा जैसे सवालों पर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के सामने चुनौती होगी कि वे अपने शासन मॉडल और योजनाओं का बचाव करें, जबकि BJP के लिए आरोपों को ठोस चुनावी नैरेटिव में बदलना बड़ी परीक्षा होगी.

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कड़ा मुकाबला तय...

विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति अब एक बेहद प्रतिस्पर्धी चरण में पहुंच चुकी है. BJP विधानसभा-वार चार्जशीट के जरिए स्थानीय स्तर पर सरकार की जवाबदेही तय करने की कोशिश कर रही है, जबकि TMC अपनी प्रशासनिक उपलब्धियों और कल्याणकारी एजेंडे को आगे रख रही है.

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