West Bengal Vidhan Sabha Chunav 2026: ममता बनर्जी की सीट पर चुनावी टेंशन... वोटर लिस्ट साफ नहीं, लोगों की बढ़ी बेचैनी

Bengal Elections 2026: पश्चिम बंगाल के भवानीपुर में चुनाव से 30 दिन पहले वोटर लिस्ट को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है. लाखों मतदाता ‘अंडर एडजुडिकेशन’ श्रेणी में हैं और सप्लीमेंट्री लिस्ट कई बूथों पर उपलब्ध नहीं है. इससे मतदाताओं में चिंता और अनिश्चितता बढ़ गई है.

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भवानीपुर में लाखों वोटर ‘अंडर एडजुडिकेशन’ में फंसे (Photo: ITG/ Anirban Roy) भवानीपुर में लाखों वोटर ‘अंडर एडजुडिकेशन’ में फंसे (Photo: ITG/ Anirban Roy)

अनिर्बन सिन्हा रॉय

  • कोलकाता,
  • 28 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:52 AM IST

पश्चिम बंगाल में चुनावी बिगुल बज चुका है. 29 अप्रैल को दूसरे चरण का मतदान होना है और सबसे ज्यादा नजरें टिकी हैं भवानीपुर सीट पर, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी आमने-सामने होंगे. लेकिन चुनाव से ठीक 30 दिन पहले यहां एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है.

बंगाल में करीब 60 लाख वोटरों के नाम "अंडर एडजुडिकेशन" यानी जांच के दायरे में हैं. साफ शब्दों में कहें तो इन वोटरों को अभी तक यह नहीं पता कि उनका नाम फाइनल वोटर लिस्ट में है या नहीं. इसके लिए एक सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी की जानी थी, जिसमें 29 लाख वोटरों का ब्योरा होता. लेकिन 72 घंटे से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी भवानीपुर समेत कई इलाकों में यह लिस्ट नहीं पहुंची है. यहां तक कि बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO भी कह रहे हैं कि उन्हें अभी तक कोई हार्ड कॉपी नहीं मिली.

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ममता बनर्जी ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर सीधा हमला बोला. उन्होंने कहा कि पहले लिस्ट जारी करो, लोगों को बताओ किसका नाम है और किसका नहीं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक खास समुदाय के लाखों नाम जानबूझकर हटाए गए हैं.

आम लोगों पर क्या असर पड़ रहा है?

भवानीपुर में रहने वाले 42 साल के सलीम अली लस्कर पिछले 50 साल से इसी इलाके में रह रहे हैं. उनके परिवार के कई सदस्यों के नाम अंडर एडजुडिकेशन में हैं. वे कहते हैं कि उनके पिता 2002 से वोट देते आए हैं, फिर भी उनका नाम लिस्ट में नहीं दिख रहा.

इसी तरह शेख कमारुद्दीन के मन में डर है कि अगर उनका नाम लिस्ट में नहीं आया तो उनके बच्चों के भविष्य के दस्तावेज भी प्रभावित होंगे. उनका कहना है कि उन्होंने सारे जरूरी कागज जमा किए, फिर भी लिस्ट में नाम नहीं है.

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यह भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल: ममता बनर्जी का चुनावी शंखनाद, भवानीपुर से प्रचार शुरू, 60 हजार लीड का लक्ष्य

वहीं एक हिंदू वोटर पंकज राम भी इसी मुसीबत में हैं. उनके पिता और दादा दोनों इसी इलाके के पुराने वासी रहे हैं, बावजूद इसके उनका नाम भी अंडर एडजुडिकेशन में है. नौकरी के लिए जरूरी कागजात में भी यह समस्या आड़े आ रही है.

कितना बड़ा है यह संकट?

भवानीपुर में अकेले 47,094 नाम फाइनल सप्लीमेंट्री लिस्ट से बाहर हैं. तृणमूल कांग्रेस के बूथ लेवल एजेंट संजय चक्रवर्ती के मुताबिक कम से कम 14,000 लोग अंडर एडजुडिकेशन में हैं, जिनमें बड़ी संख्या मुस्लिम समुदाय की है.

चुनाव आयोग का क्या जवाब है?

पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय के रोल ऑब्जर्वर सुब्रत गुप्ता ने कहा कि जिन बूथों के जिम्मेदार अधिकारियों ने अभी तक साइन नहीं किए हैं, उन क्षेत्रों की लिस्ट अभी जारी नहीं हुई है. साइन होते ही लिस्ट सार्वजनिक कर दी जाएगी.

आगे क्या होगा?

अगर किसी वोटर का नाम सप्लीमेंट्री लिस्ट में नहीं आता तो उसे कोलकाता हाईकोर्ट द्वारा बनाए गए ट्रिब्यूनल में अपील करनी होगी. यह प्रक्रिया लंबी है और चुनाव सिर पर है. ऐसे में हजारों वोटरों का भविष्य अधर में लटका हुआ है.

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