सुप्रीम कोर्ट पहुंचा बंगाल वोटर लिस्ट विवाद, फॉर्म-6 पर सियासी घमासान

पश्चिम बंगाल में फॉर्म-6 के कथित फर्जी सबमिशन को लेकर TMC ने सुप्रीम कोर्ट पहुंची है. बीजेपी पर बाहरी वोटर जोड़ने का आरोप लगाया गया है.

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ममता बनर्जी ने ECI चीफ ज्ञानेश कु्मार को पत्र लिखा था. (File Photo: PTI) ममता बनर्जी ने ECI चीफ ज्ञानेश कु्मार को पत्र लिखा था. (File Photo: PTI)

इंद्रजीत कुंडू

  • नई दिल्ली,
  • 01 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 1:29 PM IST

पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट को लेकर सियासी घमासान अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. टीएमसी ने चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (CEO) वेस्ट बंगाल के दफ्तर में कथित तौर पर फॉर्म-6 के बड़े पैमाने पर अवैध सबमिशन का मामला उठाया है. पार्टी का आरोप है कि बीजेपी एजेंटों द्वारा भारी तादाद में फॉर्म-6 जमा कर बाहरी लोगों को वोटर लिस्ट में जोड़ने की कोशिश की जा रही है. 

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इस मुद्दे को टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने सीनियर वकील कपिल सिब्बल और श्याम दीवान के साथ सुप्रीम कोर्ट में उठाया है.

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान कहा कि कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने जानकारी दी है कि लंबित मामलों की जांच और निपटारा 7 अप्रैल तक पूरा कर लिया जाएगा. यानी जिन मामलों में वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या हटाने को लेकर विवाद है, उन्हें तय समय सीमा के अंदर निपटाने की कोशिश की जा रही है.

TMC ने जांच की मांग

टीएमसी ने इस मामले में पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है और जांच की मांग की है. पार्टी का दावा है कि बड़ी तादाद में फर्जी फॉर्म-6 जमा किए गए हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ छेड़छाड़ है. इसके साथ ही टीएमसी ने एक वीडियो भी जारी किया है, जिसमें पश्चिम बंगाल के CEO दफ्तर के अंदर कथित तौर पर बड़ी मात्रा में फॉर्म-6 जमा होते दिख रहे हैं. यह वीडियो दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस से जारी किया गया.

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फॉर्म-6 का इस्तेमाल नए वोटर्स को जोड़ने के लिए किया जाता है. इससे पहले भी टीएमसी और बीजेपी के बीच वोटर लिस्ट को लेकर आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं.

SC के दिशानिर्देशों का हवाला...

बनर्जी ने मांग की है कि चुनाव आयोग इस प्रक्रिया को तुरंत रोक दे, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सख्ती से पालन करे और यह तय करे कि 28 फरवरी, 2026 को आखिरी वोटर लिस्ट पब्लिश होने के बाद कोई भी फ़र्ज़ी वोटर न जोड़ा जाए. उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "बंगाल अपनी लोकतंत्र को दिन-दहाड़े चोरी नहीं होने देगा. लोग सब देख रहे हैं."

यह भी पढ़ें: बंगाल चुनाव में बड़ा बवाल! वोटर लिस्ट पर TMC vs BJP में आरपार, देखें दंगल

सीएम ममता ने ECI से गुजारिश की है कि वह लंबित दावों की समीक्षा में न्यायिक निगरानी सुनिश्चित करे, जिसमें बेदाग ईमानदारी वाले सेवारत और पूर्व ज़िला न्यायाधीशों को शामिल करना भी शामिल है.

ममता बनर्जी ने इस कथित धोखाधड़ी को BJP और ECI की मिलीभगत से लोकतांत्रिक अधिकारों में दखल देने की एक सोची-समझी कोशिश बताया. उन्होंने कहा कि विश्वसनीय रिपोर्टों से पता चलता है कि ये बड़ी तादाद में आए आवेदन 'वोटर लिस्ट में गैर-निवासियों को शामिल करने की एक शरारतपूर्ण चाल' थे. उन्होंने बिहार, हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली में पिछले चुनावों में भी इसी तरह के पैटर्न देखे जाने का ज़िक्र किया.

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उन्होंने कहा, "यह एप्लीकेशन्स को प्रोसेस करने की कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह मतदाताओं के आधार में हेरफेर करने की एक कोशिश है. अगर ये बातें सच हैं, तो ऐसे कदम गैर-कानूनी, असंवैधानिक और मूल रूप से अलोकतांत्रिक हैं."

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