असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार को कहा कि राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (Special Revision) के दौरान जिन नागरिकों को नोटिस दिए गए हैं, उन्हें बिना किसी हंगामे के संबंधित अधिकारियों के सामने पेश होना चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि उनके खिलाफ भी फॉर्म-7 के जरिए कोई शिकायत दर्ज की जाती है, तो वह स्वयं चुनाव अधिकारियों के समक्ष अपने दस्तावेज प्रस्तुत करेंगे.
विपक्षी दलों का आरोप है कि विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया का इस्तेमाल भाजपा एजेंटों द्वारा खासतौर पर धार्मिक अल्पसंख्यकों को परेशान करने के लिए किया जा रहा है और फॉर्म-7 के जरिए वास्तविक मतदाताओं के खिलाफ शिकायतें दर्ज की जा रही हैं. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सरमा ने गोलपाड़ा जिले में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से कहा, 'यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है. अगर नोटिस मिला है तो जाकर बताइए कि आप भारतीय हैं, वहीं बात खत्म हो जाती है. इसमें रोने-धोने की क्या जरूरत है.'
यह भी पढ़ें: बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल... इन पांच चुनावी राज्यों को मोदी सरकार के बजट में क्या मिला
उन्होंने कहा कि अगर उनके खिलाफ भी फॉर्म-7 के तहत शिकायत होती है, तो वह सुनवाई के लिए जरूर उपस्थित होंगे. असम के मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, 'हम कोई राजा या सम्राट नहीं हैं. लोकतंत्र में सभी बराबर हैं.' मुख्यमंत्री ने उन लोगों की भी आलोचना की, जो नोटिस मिलने के बाद मीडिया के पास पहुंच रहे हैं. हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, 'उन्हें नोटिस जेब में रखकर अधिकारियों के पास जाकर अपना नाम साफ कराना चाहिए था. अगर वे इसे पत्रकारों को नहीं दिखाते, तो किसी को पता ही नहीं चलता.'
फॉर्म-7 के जरिए कोई भी व्यक्ति तीन कारणों (स्थायी रूप से स्थानांतरित होना, पहले से पंजीकृत होना या भारतीय नागरिक न होना) से अपना नाम मतदाता सूची से हटाने का अनुरोध कर सकता है. वहीं, उसी निर्वाचन क्षेत्र का कोई भी मतदाता पांच आधारों (मृत्यु, कम उम्र, अनुपस्थित या स्थायी रूप से स्थानांतरित, पहले से पंजीकृत, या भारतीय नागरिक न होना) पर दूसरों के नाम हटाने के लिए आवेदन कर सकता है. नाम हटाने से पहले संबंधित अधिकारी सुनवाई करते हैं.
यह भी पढ़ें: FTA के फायदे गिनाने लगे अमित शाह, कहा- अब असम की चाय की चुस्की लेंगे EU के लोग
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने यह भी संकेत दिया कि राज्य में मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान केवल ‘मियां’ (बांग्ला भाषी मुस्लिमों को वह मियां मुस्लिम कहते हैं) समुदाय के लोगों को ही नोटिस दिए जा रहे हैं, ताकि उन्हें दबाव में रखा जा सके. ‘मियां’ शब्द मूल रूप से असम में बांग्ला भाषी मुसलमानों के लिए एक अपमानजनक संबोधन रहा है, जिन्हें अक्सर बांग्लादेशी घुसपैठिया कहा जाता है. हाल के वर्षों में समुदाय के कुछ लोगों ने इसे विरोध के प्रतीक के रूप में अपनाया है. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि असम में 'बांग्लादेशी मियां' रहते हैं और विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा ऐसे 'घुसपैठियों' के खिलाफ पांच लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की गई हैं.
aajtak.in