माकुम ऊपरी असम के तिनसुकिया जिले में स्थित एक औद्योगिक कस्बा है, जहां एक टाउन कमेटी भी है. यहां कई चाय फ़ैक्टरियां हैं, हालांकि यहां की कई प्लाईवुड इंडस्ट्रीज अब बंद हो चुकी हैं. इसके अलावा, इस कस्बे में आटे, मोमबत्ती और मसालों को पीसने वाली कई यूनिटें भी हैं. इस कस्बे को तीन शहरों - तिनसुकिया, डिगबोई और डूमडूमा- के मिलन बिंदु के रूप में जाना
जाता है. माकुम हाल ही में बनी विधानसभा सीटों में से एक है, जिसे सामान्य (अनारक्षित) सीट का दर्जा प्राप्त है, और यह डिब्रूगढ़ लोकसभा सीट के 10 हिस्सों में से एक है.
2023 में परिसीमन आयोग की सिफ़ारिशों के बाद इस सीट का गठन किया गया था, जिसका उद्देश्य असम की 126 विधानसभा सीटों पर मतदाताओं को ज्यादा समान रूप से बांटना था. इस सीट में वे इलाके शामिल हैं जो ज्यादातर परिसीमन से पहले वाली तिनसुकिया सीट के अंतर्गत आते थे, साथ ही इसमें अब खत्म हो चुकी चाबुआ सीट के भी कुछ इलाके शामिल हैं. माकुम सीट में माकुम कस्बे के साथ-साथ उसके आस-पास के कई गांव भी शामिल हैं.
एक नई सीट होने के नाते, माकुम का विधानसभा चुनावों का कोई पुराना इतिहास नहीं है. यह अपनी नई पहचान के साथ पहली बार 2026 के विधानसभा चुनावों में मतदान करेगा. हालांकि, इसने 2024 के लोकसभा चुनावों में हिस्सा लिया था, जहां चुनावी रुझान BJP के पक्ष में रहा था. डिब्रूगढ़ लोकसभा सीट के माकुम हिस्से में, BJP ने असम जातीय परिषद (AJP) को 25,211 वोटों के अंतर से हराया. वहीं, AAP इन दोनों पार्टियों से काफी पीछे रही और तीसरे स्थान पर रही. BJP को 61,627 वोट मिले, AJP को 36,416 वोट मिले, और AAP को 17,068 वोट मिले.
2026 के विधानसभा चुनावों के लिए जारी अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, माकुम सीट पर 159,217 योग्य मतदाता थे. यह संख्या 2024 में पंजीकृत 156,832 मतदाताओं की तुलना में बढ़ी है. 2024 में मतदाताओं की भागीदारी काफी ज्यादा रही और यह 76.22 प्रतिशत दर्ज की गई.
उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर, जो मुख्य रूप से 2011 की जनगणना के अनुपातों पर आधारित हैं और जिन्हें क्षेत्र तथा परिसीमन में हुए बदलावों के अनुसार समायोजित किया गया है, यहां की जनसांख्यिकी से पता चलता है कि यहां मुस्लिम आबादी काफी कम है. वहीं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की आबादी तो और भी कम है. इस निर्वाचन क्षेत्र में असमिया और बंगाली बोलने वाले समुदायों के साथ-साथ खेती-बाड़ी करने वाले समूह और चाय बागान समुदायों का मिश्रण देखने को मिलता है, जो इसके अर्ध-शहरी और ग्रामीण स्वरूप को आकार देता है.
माकुम निर्वाचन क्षेत्र ऊपरी असम के तिनसुकिया जिले के कुछ हिस्सों को कवर करता है. यहां ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी किनारे पर समतल जलोढ़ मैदान हैं, जिनके बीच-बीच में आर्द्रभूमि, 'बील' (झीलें) और हल्की ऊबड़-खाबड़ जमीनें भी हैं. यहां की जमीन धान की खेती, आर्द्रभूमि में मछली पकड़ने और कुछ बागवानी के लिए उपयुक्त है, लेकिन ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक नदियों से आने वाली मौसमी बाढ़ का खतरा भी बना रहता है. माकुम में लोगों की आजीविका मुख्य रूप से धान की खेती, मछली पकड़ने, छोटे-मोटे व्यापार, कृषि से जुड़ी गतिविधियों, चाय बागानों और स्थानीय उद्योगों पर निर्भर है. यहां की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी और भरपूर वर्षा इन गतिविधियों को बनाए रखने में सहायक होती है. बुनियादी ढांचे के मामले में, यहां राष्ट्रीय राजमार्ग 15 के जरिए सड़क संपर्क उपलब्ध है, साथ ही कई राज्य राजमार्ग भी हैं जो आस-पास के कस्बों को जोड़ते हैं. रेल सुविधा माकुम जंक्शन रेलवे स्टेशन और तिनसुकिया जैसे आस-पास के स्टेशनों पर उपलब्ध है.
आस-पास के कस्बों में पूर्व दिशा में स्थित जिला मुख्यालय तिनसुकिया (लगभग 8-10 किमी दूर), डिगबोई (लगभग 23-27 किमी दूर), और डूमडूमा (लगभग 30-38 किमी दूर) शामिल हैं. डिब्रूगढ़ दक्षिण-पूर्व दिशा में लगभग 40-48 किमी की दूरी पर स्थित है. राज्य की राजधानी, दिसपुर, दक्षिण-पश्चिम दिशा में लगभग 450-470 किमी की दूरी पर स्थित है. इस निर्वाचन क्षेत्र का कुछ हिस्सा उत्तर दिशा में अरुणाचल प्रदेश की सीमा के अपेक्षाकृत काफी करीब पड़ता है. स्थानीय स्तर पर आवागमन मुख्य रूप से बसों, ऑटो और निजी वाहनों के जरिए सड़क मार्ग से होता है, जिसके साथ-साथ रेल संपर्क की सुविधा भी उपलब्ध है.
माकुम की एक समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत है जो ब्रह्मपुत्र घाटी से जुड़ी हुई है. यहां असमिया परंपराओं का मिश्रण देखने को मिलता है, और औपनिवेशिक काल से ही यहां चाय बागान समुदायों की मजबूत उपस्थिति रही है. यह क्षेत्र अपने जीवंत आदिवासी सांस्कृतिक रीति-रिवाजों के लिए भी जाना जाता है. इसके अलावा, यह ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली और बाढ़ की चपेट में आने वाले 'बीलों' (झीलों) के काफी करीब स्थित होने के लिए भी प्रसिद्ध है, जो यहां के स्थानीय जीवन और लोगों की आजीविका को काफी हद तक प्रभावित करते हैं.
BJP ने इस सीट से संजय किशन को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस पार्टी ने शिबनाथ चेतिया को अपना प्रत्याशी घोषित किया है. तृणमूल कांग्रेस की ओर से दिलीप मोरन उम्मीदवार हैं. इनके अलावा, दो निर्दलीय उम्मीदवार, पद्म कांत चुटिया और लखय ज्योति राजखोवा, भी चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. 2014 के चुनावों के बाद से ही इस क्षेत्र में BJP का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा है, जिससे उसे कांग्रेस पार्टी पर बढ़त मिली है. मतदाताओं पर BJP की लगातार बनी पकड़ 2024 के लोकसभा चुनावों में भी देखने को मिली. इससे यह सुनिश्चित होता है कि 2026 के विधानसभा चुनावों में BJP मकुम निर्वाचन क्षेत्र में अपने विरोधियों पर स्पष्ट बढ़त के साथ उतरेगी. माकुम के इस नए औद्योगिक-ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र में होने वाला यह मुकाबला काफी दिलचस्प और सबकी नजरों में रहने वाला होगा.
(अजय झा)