आंध्र प्रदेश: नेताओं को अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना होगा अनिवार्य

सरकारी स्कूलों की स्थिति में सुधार को लेकर आंध्र प्रदेश सरकार एक बड़ा फैसला करने जा रही है. एक नया कानून बनाने की तैयारी है जिसके अनुसार जनप्रतिनिधियों के लिए अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना अनिवार्य होगा.

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प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो

अनुज कुमार शुक्ला / आशीष पांडेय

  • नई दिल्ली,
  • 10 जनवरी 2018,
  • अपडेटेड 2:12 PM IST

सरकारी स्कूलों की स्थिति में सुधार को लेकर आंध्र प्रदेश सरकार एक बड़ा फैसला करने जा रही है. एक नया कानून बनाने की तैयारी है जिसके अनुसार जनप्रतिनिधियों के लिए अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना अनिवार्य होगा.

राज्य की पर्यटन मंत्री भूमा अखिला प्रिया ने एक सार्वजनिक सभा में बताया कि मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू जल्द ही फैसला लेने वाले हैं कि जनप्रतिनिधियों के लिए अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना अनिवार्य होगा. इस कानून को जल्द ही लागू करने का फैसला किया जा रहा है. यदि ये कानून बनता है तो आंध्र प्रदेश के विधायकों-एमएलसी और मंत्रियों के बच्चों को राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ने के लिए जाना होगा.

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बता दें, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कैबिनेट की बैठक में इस पर चर्चा की थी और अधिकारियों को इस कानून के लिए मसौदा आदेश तैयार करने के लिए कहा है. वहीं अखिला प्रिया ने कहा कि इससे मालूम चलता है कि हमारे मुख्यमंत्री और तेलुगू देशम सरकार प्रत्येक और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कराना चाहते हैं.

ऐसा माना जाता कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई प्राइवेट स्कूल के मुताबिक अच्छी नहीं होती हैं. जिसके चलते आंध्र प्रदेश सरकार राज्य में शैक्षिक वातावरण में सुधार के लिए अप्रवासी तेलुगू समुदाय की मदद भी ले रही है.

राज्य सरकार ने 70:30 के अनुपात में आर्थिक सहायता के लिए 'एपी जन्मभूमि' के नाम से सामाजिक पहल के तहत अनुरोध किया है. वहीं सरकार इस साल के अंत तक NRI की सहायता से 5000 स्कूलों को डिजिटल करने की योजना बना रही है. बता दें, पिछले साल आंध्रप्रदेश सरकार के शिक्षा विभाग ने राज्य के 13 जिलों में लगभग 9 हजार प्राथामिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के आदेश जारी किए थे.

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