CBSE बोर्ड की परीक्षाएं भले ही खत्म हो गई हों लेकिन उनके नंबरों को लेकर सवाल अभी तक अनसुलझे हैं. आज से पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही छात्रों को अपने उन अंकों को चुनौती देने का एक और मौका मिल रहा है जो उनके प्रदर्शन को सही ढंग से नहीं दर्शाते. बोर्ड की ओर से इस प्रक्रिया को 29 मई से आगे बढ़ा दिया था. पिछले एक हफ्ते से छात्र स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं की समीक्षा कर रहे हैं. वहीं, 4 लाख से अधिक छात्रों ने आंसर शीट की मांग कर रहे हैं. ऐसे में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बयान एक बार फिर चर्चा में है. उन्होंने अनुमान लगाया है कि अपनी मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं तक पहुंचने वाले लगभग पांच में से एक छात्र सत्यापन या पुनर्मूल्यांकन की मांग कर सकता है, जिसके तहत 80, हजार तक आवेदन प्राप्त हो सकते हैं.
आने वाले दिनों में, यह प्रक्रिया केवल व्यक्तिगत अंकों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी. इससे यह सबसे स्पष्ट रूप से पता चल सकेगा कि छात्र भारत के सबसे बड़े स्कूल परीक्षा बोर्ड पर कितना भरोसा करते हैं.
क्या कहते हैं ये आंकड़े?
12वीं के नतीजे घोषित होने के बाद से ही बोर्ड विवादों में घिरा हुआ है. लेकिन ये जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, वह और भी हैरान करने वाले हैं. इस बार 4,04,319 लाख छात्रों ने अपनी कॉपियों की स्कैन कॉपी देखने के लिए अप्लाई किया है. अगर कुल कॉपियों की बात करें, तो यह संख्या 11, 31,961 लाख के पार है. इतनी बड़ी संख्या में बच्चों का आगे आना एक बहुत बड़ा इशारा है. आज की जनरेशन सिर्फ मार्कशीट पर लिखे नंबरों को चुपचाप स्वीकार करने वाली नहीं है. वे जागरूक है. अपनी अगली पढ़ाई या करियर का फैसला लेने से पहले, वे खुद अपनी आंखों से देखना चाहते हैं कि उनकी मेहनत को कैसे आंका गया है.
क्या पार हो सकता है 80,000 का आंकड़ा ?
ये सवाल बार-बार इसलिए उठ रहा है क्योंकि हाल ही में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अनुमान लगाया है कि आज से शुरू होने वाली सत्यापन या पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के लिए 15 से 20 प्रतिशत छात्र मांग कर सकते हैं. अगर ये अनुमान सही होता है, तो CBSE को 80 हजार तक आवेदन प्राप्त हो सकते हैं.
क्या बोले धर्मेंद्र प्रधान?
धर्मेंद्र प्रधान ने इस साल की परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े विवादों को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है और कहा है कि ऐसी घटनाएं कभी नहीं होनी चाहिए थीं. उनकी ये टिप्पणियां ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली के कारण आ रही शिकायतों को लेकर आई है. शिक्षा मंत्री ने यह भी साफ किया है कि छात्रों को फीस जमा करने में कोई दिक्कत न आए, इसके लिए देश के चार बड़े बैंकों, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), इंडियन बैंक, केनरा बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा को सीधे सीबीएसई (CBSE) के पोर्टल से जोड़ दिया गया है. इसके लिए जरूरी निर्देश भी जारी हो चुके हैं.
क्या है CBSE का जवाब ?
ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम को लेकर बढ़ते विवाद के बीच,CBSE ने छात्रों और अभिभावकों की ओर से उठाई गई चिंताओं का जवाब दिया है. सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में बोर्ड ने कहा कि ओएसएम पोर्टल में पहचानी गई कमजोरियों की बारीकी से निगरानी कर रहा है.
आजतक एजुकेशन डेस्क