देश के सातवें और भारतीय इतिहास में सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की आज 75वीं जयंती है. उनका जन्म 20 अगस्त 1944 को हुआ था. वह एक पायलट थे. उनका मन कभी राजनीति में आने का नहीं था, लेकिन हालात कुछ ऐसे हुए कि न चाहते हुए भी राजनीति में कदम रखना पड़ा. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जो उनकी मां थीं, की हत्या के बाद उन्हें तुरंत प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई गई.
बतौर प्रधानमंत्री उन्होंने कई ऐसे काम किए हैं जो समाज के हित में थे. अपने कार्यों से देश की जनता के दिलोदिमाग में उन्होंने अमिट छाप छोड़ी.
युवा सोच वाले राजीव गांधी को 21वीं सदी के भारत का निर्माता भी कहा जाता है. 40 साल की उम्र में प्रधानमंत्री बनने वाले राजीव गांधी ने आधुनिक भारत की नींव रखने की दिशा में काम किया. एक नजर डालते हैं उनकी कार्यों पर, जिसकी वजह से बदली भारत की तस्वीर.
कंप्यूटर क्रांति
राजीव गांधी को भारत में कंप्यूटर क्रांति लाने का श्रेय दिया जाता है. उन्होंने न सिर्फ कंप्यूटर को भारत के घरों तक पहुंचाने का काम किया बल्कि भारत में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी को आगे ले जाने में भी अहम भूमिका निभाई. देश की दो बड़ी टेलिकॉम कंपनियां एमटीएनएल और वीएसएनएल की शुरुआत उनके कार्यकाल के दौरान हुआ.
आपको बता दें, दुनिया को पहला कंप्यूटर 1940 के आखिर में मिला, लेकिन भारत ने पहली बार 1956 में कंप्यूटर खरीदा. तब इसकी कीमत 10 लाख रुपये थी और इसका नाम HEC-2M था. सबसे पहले इसे कोलकाता के इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टिट्यूट में इंस्टॉल किया गया. तब का कंप्यूटर अभी जैसा नहीं था और यह काफी बड़ा भी था. हालांकि, यूजर्स के लिए भारत में कंप्यूटर्स काफी बाद में आए.
राजीव गांधी का मानना था कि विज्ञान और तकनीक की मदद के बिना उद्योगों का विकास नहीं हो सकता. उन्होंने कंप्यूटर तक आम जन की पहुंच को आसान बनाने के लिए कंप्यूटर उपकरणों पर आयात शुल्क घटाने की पहल की.
भारतीय रेलवे में टिकट जारी होने की कंप्यूटरीकृत व्यवस्था भी इन्हीं पहलों की देन रही. हालांकि राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने से पहले 1970 में देश में पब्लिक सेक्टर में कंप्यूटर डिविजन शुरू करने के लिए डिपार्टमेंट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स की शुरुआत हो गई थी. 1978 तक आईबीएम पहली कंपनी थी, बाद में दूसरी प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों ने कंप्यूटर निर्माण शुरू किया.
वोट देने की उम्र सीमा घटाई
21 साल के लोग ही पहले वोट दे सकते थे. प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में व्यवस्था बनी कि 18 साल के लोग वोट दे सकते हैं. उन्होंने 18 वर्ष की उम्र के युवाओं को मताधिकार देकर उन्हें देश के प्रति और जिम्मेदार तथा सशक्त बनाने की पहल की.
1989 में संविधान के 61 वें संशोधन के जरिए वोट देने की उम्रसीमा 21 से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई. इसके बाद 18 वर्ष के करोड़ों युवा भी सांसद, विधायक से लेकर अन्य निकायों के जनप्रतिनिधियों को चुनने लगे.
दूररसंचार क्रांति
राजीव गांधी ही थे, जिन्होंने भारत में दूरसंचार क्रांति ललेकर आए. आज जिस डिजिटल इंडिया की चर्चा है, उसकी संकल्पना राजीव गांधी अपने जमाने में कर चुके थे. उन्हें डिजिटल इंडिया का आर्किटेक्ट और सूचना तकनीक और दूरसंचार क्रांति का जनक कहा जाता है. राजीव गांधी की पहल पर अगस्त 1984 में भारतीय दूरसंचार नेटवर्क की स्थापना के लिए सेंटर पार डिवेलपमेंट ऑफ टेलीमेटिक्स (C-DOT) की स्थापना हुई.
इस पहल से शहर से लेकर गांवों तक दूरसंचार का जाल बिछना शुरू हुआ. जगह-जगह पीसीओ खुलने लगे. जिससे गांव की जनता भी संचार के मामले में देश-दुनिया से जुड़ सकी. फिर 1986 में राजीव की पहल से ही एमटीएनएल की स्थापना हुई, जिससे दूरसंचार क्षेत्र में और प्रगति हुई.
पंचायतों को किया सशक्त
पंचायतीराज से जुड़ी संस्थाएं मजबूती से विकास कार्य कर सकें, इस सोच के साथ राजीव गांधी ने देश में पंचायतीराज व्यवस्था को सशक्त बनाने का काम शुरू किया.
राजीव गांधी का मानना था कि जब तक पंचायती राज व्यवस्था सबल नहीं होगी, तब तक निचले स्तर तक लोकतंत्र नहीं पहुंच सकता. उन्होंने अपने कार्यकाल में पंचायतीराज व्यवस्था का पूरा प्रस्ताव तैयार कराया.
नवोदय विद्यालय की स्थापना
गांवों के बच्चों को भी उत्कृष्ट शिक्षा मिले, इस सोच के साथ राजीव गांधी ने जवाहर नवोदय विद्यालयों की नींव डाली थी. ये आवासीय विद्यालय होते हैं. प्रवेश परीक्षा में सफल मेधावी बच्चों को इन स्कूलों में प्रवेश मिलता है. बच्चों को छह से 12 वीं तक की मुफ्त शिक्षा मिलती है. हॉस्टल में रहने की सुविधा भी फ्री मिलती है.