दिल्‍ली हाईकोर्ट ने अग्निपथ स्‍कीम को ठहराया सही, जानें किस आधार पर सुनाया फैसला

केन्‍द्र ने कोर्ट में कहा कि पहले वर्ष उम्‍मीदवारों की परेशानी को देखते हुए अधिकतम आयुसीमा में छूट दी गई थी. 10 लाख से अधिक उम्‍मीदवारों ने इस छूट का फायदा उठाया है. इसके अलावा भर्ती प्रक्रिया सभी के लिए पूरी तरह से निष्‍पक्ष है.

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aajtak.in

  • नई दिल्‍ली,
  • 27 फरवरी 2023,
  • अपडेटेड 12:03 PM IST

दिल्‍ली हाईकोर्ट ने आज, 27 फरवरी 2023 को केन्‍द्र सरकार की महत्‍वाकांक्षी योजना अग्निवीर स्‍कीम को सही ठहराते हुए इसके खिलाफ दायर 23 याचिकाओं को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि योजना में हस्‍तक्षेप करने की कोई वजह नहीं है. इसके साथ ही कोर्ट ने इस योजना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. यह फैसला दिल्‍ली हाईकोर्ट के जज सतीश चंद्र शर्मा और सु्ब्रमण्‍यम प्रसाद की बेंच ने सुनाया.

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सेना भर्ती की प्रक्रिया में हुआ बदलाव
केन्‍द्र सरकार ने पिछले साल ही तीनों सेनाओं में भर्ती के लिए अग्निपथ स्‍कीम लॉन्‍च की है. जिसके तहत अब उम्‍मीदवारों को 4 साल तक सेना में सेवा का मौका मिलेगा, जिसके बाद केवल 25 प्रतिशत को ही आगे पर्मानेन्‍ट किया जाएगा. इस योजना की घोषणा होते ही इसके विरोध में देशभर में युवाओं ने प्रदर्शन किए. स्‍कीम पर रोक लगाने की मांग के साथ दिल्‍ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी जिसे आज ठुकरा दिया गया.

किस आधार पर लिया गया फैसला?
केन्‍द्र सरकार का पक्ष ले रहीं एड‍िशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एश्‍वर्य भाटी ने कोर्ट में कहा कि पहले वर्ष उम्‍मीदवारों की परेशानी को देखते हुए अधिकतम आयुसीमा में छूट दी गई थी. 10 लाख से अधिक उम्‍मीदवारों ने इस छूट का फायदा उठाया है. केन्‍द्र सरकार ने कोर्ट से कहा कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह से निष्‍पक्ष है और इसमें भाग लेने वाले किसी भी उम्‍मीदवार के साथ कोई पक्षपात नहीं किया गया है.

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केंद्र सरकार ने कहा कि सैन्य बलों में युवाओं भर्ती राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित है. यह सार्वजनिक कार्यालयों में रोजगार के समान नहीं है. कोर्ट ने माना कि अग्निपथ भर्ती स्‍कीम में कोर्ट को हस्‍तक्षेत करने का कोई कारण नहीं है. कोर्ट ने यह भी माना कि केंद्र सरकार को सशस्त्र बलों में युवाओं की नियुक्ति के तरीकों या सेवा शर्तों को परिभाषित करने वाली नीति में संशोधन करने का कानूनी अधिकार है.

 

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