UGC Equity Rule: कंप्लेन से लेकर कार्रवाई तक... कैसे बनेगी कमेटी, कौन लेगा एक्शन, जानें सबकुछ

यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के लिए रेगुलेशन बनाया है. इसके कई ऐसे प्रावधान है, जिसको लेकर समाज के कुछ वर्गों ने आपत्ति जताई है. ऐसे में समझते हैं इस नए रेगुलेशन के तहत इक्विटी कमेटी गठित करने से लेकर, कंप्लेन करने और उस पर कार्रवाई तक क्या-क्या प्रावधान हैं.

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यूजीसी के नए रूल के मुताबिक ऐसे होता है इक्विटी कमेटी का गठन (Photo - ITG) यूजीसी के नए रूल के मुताबिक ऐसे होता है इक्विटी कमेटी का गठन (Photo - ITG)

सिद्धार्थ भदौरिया

  • नई दिल्ली,
  • 27 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:31 PM IST

यूजीसी के नए इक्विटी रूल ( Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations 2026) को लेकर बवाल मचा हुआ है. इसके कई ऐसे प्रावधान हैं, जिन पर सामान्य वर्ग के लोगों को आपत्ति है. ऐसे में समझते हैं इस नियम के प्रावधान क्या-क्या हैं? इसके तहत कॉलेजों में बनने वाले इक्विटी सेंटर, इक्विटी कमेटी, इक्विटी हेल्पलाइन और इक्विटी स्क्वॉड क्या हैं और ये कैसे काम करेंगे. क्या इन प्रावधानों के जरिए झूठे और फर्जी शिकायत करके निर्दोष लोगों को भी बेवजह फंसाया जा सकता है? जानते हैं इस नए नियम की पूरी डिटेल.

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धर्म, जाति, नस्ल, लिंग, जन्म स्थान या दिव्यांगता के आधार पर भेदभाव को खत्म करना, खासकर अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों, सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, दिव्यांग व्यक्तियों, या इनमें से किसी भी समूह के सदस्यों के खिलाफ और उच्च शिक्षा संस्थानों में स्टेकहोल्डर्स के बीच पूरी समानता को बढ़ावा देना, इस नए नियम का प्रमुख मकसद है. 

कैसे बनानी होगी कमेटी?
इस नए नियमों के प्रावधान के तहत सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को एक समान अवसर केंद्र (Equal Opportunity center) स्थापित करना है. संस्थान की गवर्निंग बॉडी या मैनेजिंग कमेटी इस केंद्र के को-ऑर्डिनेटर के तौर पर  संस्थान के किसी स्थायी प्रोफेसर को नियुक्त करेगी. इसके अलावा इस सेंटर में एक समता समिति (Equity Committee) होगी. इसका गठन कॉलेज या यूनिवर्सिटी के प्रमुख करेंगे. 

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कमेटी में कौन-कौन होगा?
कमेटी में  संस्थान के प्रमुख समिति के पदेन अध्यक्ष होंगे. तीन प्रोफेसर और एक नॉन टीचिंग स्टाफ इस कमेटी में सदस्य होंगे. सिविल सोसाइटी से प्रोफेशनल अनुभव रखने वाले दो सदस्य होंगे, जो विशेष रूप से आमंत्रित होंगे. दो सदस्य छात्रों के प्रतिनिधि के तौर पर होंगे, जिनका एडमिशन शैक्षणिक योग्यता या स्पोर्ट कोटे से हुआ हो. सेंटर के को-ऑर्डिनेटर ही इस समिति के सचिव होंगे. 

इस समिति में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), एससी, एसटी, दिव्यांग और महिला का प्रतिनिधित्व अनिवार्य है. इक्विटी कमेटी के सभी सदस्यों का कार्यकाल 2 साल का होगा. वहीं विशेष आमंत्रित सदस्य सिर्फ एक साल के लिए होंगे. कमेटी के कम से कम दो बार बैठक करना होगा. इक्वेटी सेंटर और कमेटी का काम शिक्षण संस्थान में छात्रों और शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मियों के बीच भेदभाव खत्मकर समानता का माहौल तैयार करना होगा.

एक इक्विटी स्क्वॉड भी बनाना होगा
सभी कॉलेज और यूनिवर्सिटी अलग-अलग स्तर पर भेदभाव खत्म करने और समानता का माहौल बनाने के लिए छोटी इकाईयो का गठन करेंगे. इसका नाम 'इक्विटी स्क्वॉड' होगा. ये स्क्वायड पूरे परिसर में एक्टिव रहकर कहीं भी ऐसी किसी भी घटना या माहौल बनने की रिपोर्ट इक्विटी सेंटर के को-ऑर्डिनेटर को करेगा.

इक्विटी एंबेस्डर भी नियुक्त करना होगा
यूनिवर्सिटी या कॉलेज अपने अलग-अलग विभागों, संकायों, लाइब्रेरी, हॉस्टर व अन्य इकाईयों में एक समता दूत (इक्विटी एंबेस्डर) तैनात करेगा. ये इक्विटी एंबेस्डर परिसर में समानता और इक्वेलिटी के प्रतीक के तौर पर काम करेंगे और यह एक तरह से उस इकाई या विभाग में इक्विटी सेंटर के नोडल पदाधिकारी के रूप में कार्य करेंगे जो से इक्विटी सेंटर के को-ऑर्डिनेटर के संपर्क में रहेंगे.

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इक्विटी हेल्पलाइन का गठन
सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेज में एक इक्विटी हेल्पसेंटर होना जरूरी है. यह चौबीस घंटे काम करेगा. अगर किसी कारणवश किसी कॉलेज की हेल्पलाइन बंद हो जाती है तो वहां की यूनिवर्सिटी में कार्यशील हेल्पलाइन पर लोग संपर्क कर सकते हैं. हेल्प लाइन पर भेदभाव की सूचना देने वाला शिकायतकर्ता अगर अपनी पहचान को सीक्रेट रखना चाहता है तो ऐसा ही किया जाएगा.

कैसे होगा शिकायतों का समाधान
अब बात करते हैं कि आखिर शिकायत का समाधान कैसे होगा... भेदभाव से पीड़ित कोई भी व्यक्ति इसकी सूचना लिखित रूप में इक्विटी सेंटर के कोर्डिनेटर को दे सकता है या मेल कर सकता है. इसके ऑनलाइन पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है या फिर हेल्पलाइन नंबर पर भी जानकारी दी जा सकती है. हेल्पलाइन नंबर पर दी गई जानकारी अगर ऐसी हो कि उस पर तत्काल कार्रवाई की जरूरत है तो पुलिस को मामला फॉरवर्ड कर दिया जाएगा.

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इक्विटी कमेटी कैसे लेगी एक्शन?
कोई भी गंभीर शिकायत मिलने पर कमेटी 24 घंटे के अंदर बैठक करेगी. अगर मामला यूजीसी के नियमों के मुताबिक किसी और कमेटी का बनता है तो इक्विटी सेंटर उसे वहां कार्रवाई के लिए बढ़ा देगा. अगर ऐसा नहीं है तो समता कमेटी 15 दिनों के अंदर शिकायत पर अपनी रिपोर्ट कॉलेज या यूनिवर्सिटी के प्रमुख को सौंप देगी. इसकी एक कॉपी पीड़ित को भी दी जाएगी. संस्थान प्रमुख को इस रिपोर्ट पर 7 दिनों के अंदर कार्रवाई करनी होगी, चाहे  हायर एजुकेशन इंस्टीच्युशन रेगुलेशन से संबंधित मामला बनता हो या पुलिस से जुड़ा कोई पनिशेबल एक्ट का मामला बननता हो.

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अपील करने का प्रावधान 
अगर इक्विटी कमेटी की रिपोर्ट से पीड़ित असंतुष्ट है तो वह 30 दिनों के अंदर लोकपाल के समक्ष अपील कर सकता है. लोकपाल इसके लिए लीगल एडवाइजर या न्याय मित्र की तैनाती कर सकता है. इस न्याय मित्र को संस्थान को उचित फीस देना पड़ेगा. लोकपाल 30 दिनों के अंदर मामले को निपटाने की कोशिश करेगा.

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ऐसे होगी निगरानी 
यूजीसी के इस नए इक्विटी रूल के प्रावधानों का सही से अनुपालन हो रहा है या नहीं. इसके लिए यूजीसी राष्ट्रीय स्तर पर एक निगरानी समिति का गठन करेगा. इसमें सिविल सोसाइटी, प्रोफेशनल काउंसिल और  अलग-अलग आयोगों के प्रतिनिधि सदस्य होंगे. यूजीसी के नए इक्विटी रूल के प्रावधानों के अनुपालन और इसके उद्देश्यों की पूर्ति की समीक्षा के लिए निगरानी कमेटी कॉलेज और यूनिवर्सिटी परिसरों का दौरा करेंगे और अपनी रिपोर्ट आयोग और उच्च शिक्षा विभाग को देंगे.

इक्विटी रूल का अनुपालन नहीं करने के परिणाम
यदि किसी यूनिवर्सिटी और कॉलेज में इन नियमों का अनुपालन नहीं हो रहा है तो उसकी मान्यता रद्द की जा सकती है या फिर यूजीसी उसकी फंडिंग रोक सकता है.

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