UPPSC Success Story: दो वक्त की रोटी और फीस का संघर्ष... पंक्चर की दुकान चलाने वाले की बेटी बनी अफसर, कहानी बुलंदशहर की गायत्री वर्मा की

बुलंदशहर की गायत्री वर्मा ने अभावों को मात देते हुए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 210वीं रैंक हासिल की है. पंक्चर और चाय की दुकान चलाने वाले पिता की लाडली की इस सफलता से पूरे जिले में जश्न का माहौल है और परिवार बेटी की आरती उतार रहा है.

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गायत्री वर्मा और उनके पिता राजकुमार (Photo- Screengrab) गायत्री वर्मा और उनके पिता राजकुमार (Photo- Screengrab)

मुकुल शर्मा

  • बुलंदशहर ,
  • 31 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 3:16 PM IST

UPPSC Result 2025: बुलंदशहर के राजकुमार वर्मा की होनहार बेटी गायत्री वर्मा उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन (UPPSC) की परीक्षा पास कर पीसीएस अफसर बनने जा रही हैं. गायत्री ने यह बड़ी सफलता अपने तीसरे प्रयास में 210वीं रैंक हासिल करके प्राप्त की. उन्होंने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई बुलंदशहर से की और ग्रेजुएशन की शिक्षा अलीगढ़ स्थित अपने ननिहाल में रहकर पूरी की. आर्थिक तंगी के बावजूद गायत्री ने ऑनलाइन माध्यमों से तैयारी की और सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी. यह कामयाबी उनके पिता के संघर्षों और परिवार के अटूट विश्वास का परिणाम है, जिससे आज क्षेत्र का नाम रोशन हुआ है.

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दो वक्त की रोटी और फीस का कड़ा संघर्ष

गायत्री के पिता राजकुमार एक मामूली दुकान पर टायर पंक्चर लगाने का काम करते हैं. घर की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि पंक्चर की दुकान से होने वाली 200-400 रुपये की कमाई से गुजारा मुश्किल था, जिसके लिए उन्हें साथ में चाय की दुकान भी खोलनी पड़ी. 

कई बार बेटी की पढ़ाई की फीस भरने के लिए उन्हें ब्याज पर पैसे उधार लेने पड़े. पिता का सपना है कि उनकी बेटी अब पूरी ईमानदारी से काम करे और न खुद भ्रष्टाचार करे, न किसी को करने दे. वहीं, घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है. 

हार नहीं मानी और तीसरे प्रयास में मिली जीत

गायत्री की सफलता का सफर आसान नहीं रहा. पहले प्रयास में वह प्रीलिम्स भी पास नहीं कर पाई थीं, लेकिन मां के हौसले ने उन्हें फिर से खड़ा किया. दूसरे प्रयास में मुख्य परीक्षा तक पहुंचीं पर अंतिम चयन नहीं हुआ. आखिरकार तीसरे प्रयास में उन्होंने अपनी मेहनत से 210वीं रैंक हासिल की. आज घर पर ढोल-नगाड़ों की थाप है, गले में फूलों की माला है और बिटिया की आरती उतारी जा रही है. गायत्री ने साबित कर दिया कि मेहनत सच्ची हो तो संसाधन आड़े नहीं आते.

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