JEE मेंस एग्जाम में जुड़वा भाइयों ने हासिल किए 99.99 परसेंटाइल, एक ही किताब से की पढ़ाई...

जॉइंट एंटरेंस एग्जामिनेशन (JEE) मेंस में 99.99 परसेंटाइल लाने वाले दो जुड़वा भाई महरूफ अहमद खान और मसरूर अहमद खान इस समय सुर्खियों में हैं. दोनों ने एक ही शिफ्ट में पेपर दिया और एक ही किताब पढ़ाई कर सेम नंबर हासिल किया है.

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जॉइंट एंटरेंस एग्जामिनेशन (JEE) मेंस में 99.99 परसेंटाइल लाने वाले दो जुड़ा भाई महरूफ अहमद खान और मसरूर अहमद खान इस समय सुर्खियों में हैं. (Photo:x/@ani) जॉइंट एंटरेंस एग्जामिनेशन (JEE) मेंस में 99.99 परसेंटाइल लाने वाले दो जुड़ा भाई महरूफ अहमद खान और मसरूर अहमद खान इस समय सुर्खियों में हैं. (Photo:x/@ani)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:47 AM IST

कोटे में पढ़ाई कर रहे जुड़वां भाई महरूफ अहमद खान और मसरूर अहमद खान इन दिनों चर्चा में हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि दोनों ने जॉइंट एंटरेंस एग्जामिनेशन (JEE) मेंस जैसी कठिक परीक्षा में 99.99 परसेंटाइल हासिल किया है. दोनों ने एक ही शिफ्ट में पेपर दिया और सेम स्कोर हासिल किया. 300 में से उन्हें 285 नंबर मिले हैं. भुवनेश्वर के रहने वाले ये जुड़वां भाई, कोटा के एलन करियर इंस्टीट्यूट के छात्र हैं. 

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हासिल किया 99.99 परसेंटाइल 

बता दें कि 7 मई, 2008 को जन्में इन दोनों भाइयों ने स्कूल से लेकर कोचिंग तक हमेशा एक साथ पढ़ाई की है. दोनों की आदतें भी एक जैसी ही है. बच्चे को कभी अकेला न फील हो इसके लिए उनकी मां डॉ.जीनत बेगम ने अपने करियर का त्याग कर डॉक्टर का पेशा हमेशा के लिए छोड़ दिया था. वह 1990 के दशक में सरकार के साथ गायनेकोलॉजिस्ट के रूप में काम करती थीं. 

2023 में आए कोटा  

इसे लेकर जीनत बेगम ने बताया कि हम साल 2023 में कोटा चले गए, शुरुआत में ओलंपियाड की तैयारी के लिए, क्योंकि दोनों भाइयों ने अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान ओलंपियाड के लिए क्वालीफाई कर लिया था. बाद में उन्होंने जेईई कोचिंग करने का फैसला किया. उन्होंने आगे बताया कि दोनों भाई बचपन से ही होशियार रहे हैं. महरूफ ने कक्षा 10 में 95.2 प्रतिशत और मसरूर ने 97.2 प्रतिशत नंबर मिले थे. 

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एक-दूसरे से करते थे कॉम्पिटिशन

दोनों जुड़वा भाइयों ने पढ़ाई के लिए एक जैसी प्लानिंग और टाइम टेबल अपनाई और अक्सर परीक्षाओं में एक-दूसरे से कॉम्पिटिशन करते थे. लेकिन इस दौरान अगर किसी एक नंबर कम आते थे, तो वे एक-दूसरे को मोटिवेट भी करते थे. उन्होंने कहा कि मेथ्य में उनकी रुचि शुरू से ही थी, इसलिए उन्होंने मेडिकल में जाने की बजाय इंजीनियरिंग को चुना. वे IIT बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस में बीटेक करना चाहते हैं. 

एक ही किताब से पढ़ते थे...

परिवार के मुताबिक, दोनों की पढ़ाई करने का पैटर्न भी अलग था. दोनों भाई हमेशा एक की बुक लेकर पढ़ने बैठते थे. इतना ही नहीं दोनों के चश्मे का नंबर, जूतों का साइज और दिनचर्या तक सेम है. 

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