देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट 2026 पर उठे सवाल अब और गहरे होते जा रहे हैं. 3 मई को आयोजित हुई परीक्षा के बाद जिस पेपर लीक की आशंका ने सुर्खियां बटोरी थीं, अब उसकी जांच में ऐसे खुलासे सामने आ रहे हैं जिन्होंने लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है. राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप की जांच में संकेत मिले हैं कि परीक्षा के कुल 720 नंबर के सवालों में से करीब 600 नंबर के सवाल दो दिन पहले ही सीकर में छात्रों तक पहुंच चुके थे.
बड़ी बात है कि नीट परीक्षा में पूछे सवालों के उत्तर के ऑप्शन भी गैस पेपर के प्रश्नों के क्रमों में हैं. सूत्रों के अनुसार पहले दिन दो पांच पांच लाख में बिके गेस पेपर लेकिन परीक्षा के एक रात पहले 30-30 हजार में गेस पेपर बिका. एसओजी का कहना है कि हिरासत में लिए गए लोगों के मोबाइल में मेनी टाईम फॉरवार्डेड का ऑप्शन आ रहा है यानि ये बहुत लोगों तक पहुंचा है.
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, कथित ‘क्वेश्चन बैंक’ का लिंक चूरू के एक युवक से जुड़ रहा है, जो फिलहाल केरल के एक मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है. बताया जा रहा है कि उसने 1 मई को यह पेपर सीकर में अपने एक दोस्त को भेजी थी. इसके बाद यह एक पीजी संचालक तक पहुंचा और फिर वहां रहने वाले छात्रों, करियर काउंसलर्स और अन्य अभ्यर्थियों के बीच तेजी से फैलता चला गया. एसओजी अब इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हुई है.
हर जगह जांच कर रही टीम
एसओजी सोशल मीडिया चैट, कॉल डिटेल्स और इंस्टेंट मैसेजिंग एप्स के जरिए जुड़े हर लिंक को खंगाल रही है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह केवल एक गैस पेपर था या फिर वास्तव में परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र का हिस्सा लीक हुआ था. जांच एजेंसियां फिलहाल इसी कड़ी को जोड़ने में लगी हैं. सूत्रों के अनुसार, छात्रों तक पहुंचे इस कथित ‘क्वेश्चन बैंक’ में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के 300 से अधिक सवाल शामिल थे. सभी सवाल हाथ से लिखे हुए बताए जा रहे हैं और हैंडराइटिंग भी एक जैसी पाई गई है. चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से करीब 140 सवाल हूबहू परीक्षा में पूछे गए बल्कि नीट में हर सवाल 4 अंक का होता है, ऐसे में लगभग 600 नंबर के प्रश्न उसी कथित बैंक से आने की बात सामने आ रही है. ऐसे में किसी गैस पेपर से कुछ सवाल मैच होना सामान्य बात हो सकती है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में प्रश्नों का मिलना बेहद असामान्य माना जाता है. खासतौर पर उस परीक्षा में जहां एक-एक अंक रैंक और मेडिकल कॉलेज तय करता है.
जांच में सामने आई ये बातें
जांच में यह भी सामने आया है कि यह कथित ‘क्वेश्चन बैंक’ केवल वॉट्सएप तक सीमित नहीं था. कई एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के जरिए भी इसे शेयर किए जाने के संकेत मिले हैं. कुछ चैट्स में फॉरवर्डेड मेनी टाइम्स का टैग दिखाई दिया, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह पेपर बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंची. एसओजी इस एंगल पर भी जांच कर रही है कि कहीं इसके प्रिंटआउट निकालकर ऑफलाइन तरीके से भी छात्रों में वितरण तो नहीं किया गया. पूरे मामले में सीकर का एक पीजी संचालक भी जांच एजेंसी के रडार पर आ गया है. परीक्षा खत्म होने के बाद इसी संचालक ने उद्योग नगर थाने और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को शिकायत देकर दावा किया था कि बड़ी संख्या में छात्रों के पास संदिग्ध ‘क्वेश्चन बैंक’ पहुंचा है. हालांकि, जांच में सामने आया कि उसे खुद भी परीक्षा से पहले यह सामग्री मिली थी और उसने इसे आगे छात्रों और काउंसलर्स को भेजा था. एजेंसी को आशंका है कि पकड़े जाने के डर से उसने बाद में शिकायत देकर खुद को बचाने की कोशिश की. फिलहाल एसओजी यह पता लगाने में जुटी है कि यह नेटवर्क कितना बड़ा था और आखिर वह मास्टरमाइंड कौन है?
शरत कुमार