'विदेश में छिपे हो तब भी नहीं छोड़ूंगा...', NCERT विवाद पर सोशल मीडिया ट्रोलर्स को CJI की खुली चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी की कक्षा 8 की किताबों में न्यायपालिका से जुड़े अध्याय को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. कोर्ट ने कहा कि अध्याय विशेषज्ञ समिति की मंजूरी के बिना प्रकाशित नहीं होगा और सरकार को एक सप्ताह में विशेषज्ञों की समिति बनाने का निर्देश दिया. कोर्ट ने सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणियों पर भी चेतावनी दी है और कहा कि विदेश में बैठे लोग भी कानून के दायरे में आएंगे.

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अनीषा माथुर

  • नई द‍िल्ली ,
  • 11 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 12:43 PM IST

NCERT की किताबों में बदलाव के मुद्दे पर आज सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है. देश की सबसे बड़ी अदालत ने न सिर्फ किताबों में 'न्यायपालिका' से जुड़े चैप्टर को लेकर नई गाइडलाइंस जारी कीं, बल्कि कोर्ट के खिलाफ सोशल मीडिया पर 'अभद्र' टिप्पणी करने वालों को भी खुली चेतावनी दे डाली.

सीजेआई (CJI) ने साफ लहजे में कहा, 'कानून अपना काम करेगा. अगर कोई देश के बाहर भी छिपा है, तो मैं उसे छोड़ूंगा नहीं.'

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NCERT पर क्यों नाराज हुआ कोर्ट?

सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 8 की किताबों में न्यायपालिका वाले चैप्टर (Chapter 4) को लेकर गहरी निराशा जताई. कोर्ट इस बात से हैरान था कि न्यायपालिका पर चैप्टर लिखने वाली कमेटी में एक भी नामचीन कानूनविद् (Jurist) शामिल नहीं था.

कोर्ट ने दो टूक कहा कि यह निराशाजनक है कि NCTC कमेटी में कोई कानूनी विशेषज्ञ नहीं था. अगर चैप्टर 4 पर दोबारा विचार किया गया है, तो इसे विशेषज्ञों की कमेटी की मंजूरी के बिना पब्लिश नहीं किया जाएगा.

अब कौन लिखेगा न्यायपालिका का पाठ?

सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार को निर्देश दिया है कि एक हफ्ते के भीतर एक 'एक्सपर्ट कमेटी' बनाई जाए. कोर्ट ने यह भी तय कर दिया है कि इस कमेटी में कौन-कौन होगा. कोर्ट के अनुसार कमेटी में एक रिटायर्ड जज, एक सीनियर प्रैक्टिसिंग वकील और एक वरिष्ठ शिक्षाविद शामिल होगा. 

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इतना ही नहीं, कोर्ट ने कहा कि इस काम में नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी को भी शामिल किया जाए. अब न्यायपालिका से जुड़े सवाल सिर्फ 8वीं की किताब तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उच्च शिक्षा के सिलेबस में भी इसे सही तरीके से शामिल किया जाएगा.

'सुधार से परहेज नहीं, लेकिन मर्यादा जरूरी'

सुनवाई के दौरान CJI ने स्पष्ट किया कि कोर्ट आलोचना के खिलाफ नहीं है. उन्होंने कहा कि हम न्यायपालिका की जायज आलोचना को रोकना नहीं चाहते. अगर सिस्टम में कोई कमी है और एक्सपर्ट कमेटी उसे उजागर करती है तो यह एक स्वागत योग्य कदम होगा. इससे भविष्य के वकीलों और सिस्टम को सुधार करने में मदद मिलेगी.

सोशल मीडिया पर 'मिसचीफ मोंगर्स' की खैर नहीं

इस मामले में सबसे तीखा मोड़ तब आया जब 26 फरवरी के आदेश के बाद सोशल मीडिया पर हुई प्रतिक्रियाओं का जिक्र हुआ. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सोशल मीडिया पर हर चीज पर जरूरत से ज्यादा और गैर-जिम्मेदाराना रिएक्शन दिए जा रहे हैं.

CJI ने इस पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि मैं बैल को सींगों से पकड़ने (Taking bull by its horns) में विश्वास रखता हूं. सोशल मीडिया पर जिन लोगों ने गैर-जिम्मेदाराना बयान दिए हैं, उनके खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई करे. सरकार उन साइट्स और लोगों की पहचान करे जो इस शरारत के पीछे हैं.

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जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल ने भी सहमति जताते हुए कहा कि सोशल मीडिया अब सारी हदें पार कर चुका है. इस पर CJI ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि जो लोग विदेश में बैठकर भारत की संस्थाओं पर हमला कर रहे हैं, कानून उन तक भी पहुंचेगा.

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