राज्य कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET) सेल ने 2026 की परीक्षाओं के लिए नए और सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं. इनका मकसद परीक्षा में नकल और अनुचित साधनों को पूरी तरह रोकना है. सीईटी सेल ने खासतौर पर साइबर नकल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाने पर जोर दिया है. नए नियमों के तहत एआई टूल्स, छिपे हुए कैमरे, स्क्रीन मिररिंग, रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर और अन्य डिजिटल तकनीकों के इस्तेमाल पर सख्त प्रतिबंध रहेगा.
अधिकारियों के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में तकनीक के जरिए नकल करने के मामले लगातार सामने आ रहा हैं. इसी को देखते हुए ये नए नियम बनाए गए हैं, ताकि कंप्यूटर आधारित परीक्षाएं निष्पक्ष और सुरक्षित तरीके से हो सकें.
क्या हैं बदले हुए नियम?
संशोधित नियमों के अनुसार, परीक्षा हॉल में स्मार्टफोन, स्मार्टवॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, इयरफोन और कैलकुलेटर जैसे किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को ले जाना पूरी तरह मना है. अगर कोई उम्मीदवार इनके साथ पकड़े जाते हैं, तो सामान जब्त कर लिया जाएगा और उसकी उम्मीदवारी को रद्द कर दी जाएगी. इसके अलावा, कंप्यूटर आधारित परीक्षा में एआई टूल्स या किसी भी डिजिटल माध्यम से सवालों तक पहुंचने की कोशिश करने पर तुरंत परीक्षा रद्द कर दी जाएगी. ऐसे मामलों में आईटी एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है. कुछ समय से देखा जा रहा है कि लगातार एग्जाम में छात्र AI का यूज कर नकल कर रहे हैं जिसकी वजह से पूरी परीक्षा को ही कैंसिल कर दिया जाता है.
दूसरे उम्मीदवार से पूछना भी पड़ सकता है भारी
अगर परीक्षा के दौरान कोई उम्मीदवार बात करते हुए, दूसरे उम्मीदवार से इशारा करते हुए, दूसरों से बात करने का प्रयास करते हुए पाया जाता है या फिर उसके पास नोट्स, किताबें या कोई भी लिखित सामग्री पाई जाती है तो इसके लिए उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है. इसके अलावा अगर कोई छात्र किसी अन्य उम्मीदवार से नकल करता है, नकल करने की कोशिश करते हुए या परीक्षा के प्रश्न के जवाब को क्लास से बाहर सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का यूज करके साझा किए जाते हैं, तो उसकी उम्मीदवारी खतरे में पड़ सकती है. इन सभी मामलों में कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है.
ग्रुप नकल कर भी नहीं बच पाएंगे
अगर नकल संगठित तरीके से या समूह में किया जाता है तो, अधिकारी इसकी पूरी जांच करेंगे. अगर कई उम्मीदवार इसमें शामिल पाए जाते हैं, तो उनका रिजल्ट रद्द कर दिया जाएगा. साथ ही, अगर कोई परीक्षा केंद्र लापरवाही करता है या इस तरह की गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी.
17 पाठ्यक्रमों के लिए होती है परीक्षा
बता दें कि महाराष्ट्र में 17 कोर्सों में एडमिशन के लिए सीईटी सेल परीक्षाओं का आयोजन करता है. इनमें से 15 परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित सिस्टम के जरिए राज्य के अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर होती है. इस साल सीईटी परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन बंद हो चुके हैं और अब तक करीब 12 लाख छात्रों ने आवेदन किया है. वहीं, तीन कोर्सों में पहली बार दो बार परीक्षा देने का मौका मिलने की वजह से कुल लगभग 17 लाख छात्रों के परीक्षा में शामिल होने की उम्मीद है. सीईटी सेल की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि संशोधित नियम 2026 में आयोजित होने वाली सभी सीईटी परीक्षाओं पर लागू होंगे. परीक्षा केंद्रों को सीसीटीवी निगरानी, उम्मीदवारों का बायोमेट्रिक सत्यापन और परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधि को रोकने के लिए कड़ी निगरानी के निर्देश दिए गए हैं.
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