10वीं में थे 98%, अब JEE मेन्स में पाए 300 में 300... जानिए टॉपर कबीर की नंबर बटोरने की स्ट्रेटजी

कोटा कोचिंग के क्लासरूम स्टूडेंट कबीर छिल्लर ने जेईई मेन्स सेशन-1 परीक्षा में 300 में से 300 नंबर हासिल किए हैं. इसके बाद से उन्होंने अपनी पढ़ाई की रणनीति के बारे में बात की और बताया कि सही दिशा में मिलने वाली सलाह हमेशा काम आती है. कबीर की यह उपलब्धि लगातार मेहनत, अच्छी प्लानिंग और सेल्फ एनालिसिस का परिणाम है.  

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JEE Mains Topper Kabir Chillar (Photo : ITG) JEE Mains Topper Kabir Chillar (Photo : ITG)

चेतन गुर्जर

  • नई दिल्ली,
  • 21 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 9:31 AM IST

मेहनत, सटीक रणनीति और सही मार्गदर्शन के दम पर कोचिंग सिटी कोटा के सबसे बड़े कोचिंग एलन करियर इंस्टीट्यूट के स्टूडेंट कबीर छिल्लर ने जेईई मेन सेशन-1 में 300 में से 300 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की है. खास बात यह रही कि उन्होंने सेशन-2 की परीक्षा में शामिल होने की जरूरत ही नहीं समझी. मूल रूप से दिल्ली-एनसीआर के गुरुग्राम से ताल्लुक रखने वाले कबीर पिछले दो सालों से कोटा में रहकर नियमित क्लासरूम स्टूडेंट के रूप में तैयारी कर रहे थे. उनकी यह उपलब्धि लगातार मेहनत, अनुशासन और खुद के प्रदर्शन का गहराई से विश्लेषण करने का नतीजा है. 

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कबीर के परिवार का शैक्षणिक माहौल उनकी सफलता में बड़ी भूमिका निभाता है. उनके पिता मोहित छिल्लर आईआईटीयन हैं और वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर की एक निजी कंपनी में काम कर रहे हैं, जबकि उनकी मां प्रियंका छिल्लर प्राइवेट स्कूल में टीचर हैं. कबीर इससे पहले 10वीं कक्षा में 98 प्रतिशत अंक हासिल कर चुके हैं, जिससे उनकी मजबूत शैक्षणिक नींव का अंदाजा लगाया जा सकता है. 

फैकल्टी को दिया सफलता का श्रेय

कबीर ने अपनी सफलता का श्रेय फैकल्टी की गाइडेंस को देते हैं. उनका मानना है कि सही दिशा में किया गया प्रयास ही सफलता दिलाता है. उन्होंने पढ़ाई के दौरान क्वालिटी और अटेंशन स्पैन पर खास ध्यान दिया. हर टेस्ट के बाद खुद का ईमानदारी से एनालिसिस किया और जहां भी कमी नजर आई, उसी पर सबसे ज्यादा फोकस किया. परीक्षा से पहले वे अपनी स्टडी स्ट्रेटेजी को लगातार फाइन-ट्यून करते रहे जिससे उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर होता गया. 

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पेपर का विश्लेषण...

वे नियमित रूप से मॉक टेस्ट देते थे और हर पेपर का विश्लेषण करते थे. इससे उनकी एक्यूरेसी और टाइम मैनेजमेंट दोनों मजबूत हुए. कबीर का मानना है कि कॉन्सेप्ट क्लियर होना सबसे जरूरी है. उन्होंने रटने की बजाय हर टॉपिक को समझने और उसे प्रैक्टिकल तरीके से अप्लाई करने पर ध्यान दिया. पढ़ाई को छोटे-छोटे टारगेट्स में बांटकर शॉर्ट नोट्स बनाना और नियमित रिवीजन करना उनकी आदत का हिस्सा रहा. 

पढ़ाई के साथ जरूरी है मेंटल बैलेंस

कबीर का यह भी मानना है कि पढ़ाई के साथ मानसिक संतुलन बनाए रखना जरूरी है. वे समय-समय पर दोस्तों के साथ वक्त बिताते थे जिससे वे मानसिक रूप से फ्रेश रहते और पढ़ाई में बेहतर फोकस कर पाते. भविष्य को लेकर कबीर का लक्ष्य बिल्कुल साफ है. वे आईआईटी बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस में बीटेक करना चाहते हैं और इसके बाद दुनिया के प्रतिष्ठित संस्थान Massachusetts Institute of Technology (MIT) से हॉयर एजुकेशन प्राप्त करने का सपना देखते हैं. उनकी यह सफलता यह साबित करती है कि सही दिशा, निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास के साथ किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है.

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