रैंप से रणभूमि! मिस इंडिया कशिश मेथवानी अब बनीं सेना में लेफ्टिनेंट, CDS परीक्षा में हासिल की थी AIR 2

कौन कहता है कि कोई व्यक्ति एक साथ दो करियर में अपना नाम नहीं बना सकता है? कशिश मेथवानी ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. मिस इंडिया का खिताब अपने नाम करने के बाद भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर नई मिसाल पेश की है. ग्लैमर वर्ल्ड से जिम्मेदारी तक उनका ये सफर बेहद प्रेरणा भरा रहा है. उन्होंने CDS परीक्षा में AIR 2 हासिल कर इतिहास रच दिया है. 

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Kashish Methwani (Photo: X) Kashish Methwani (Photo: X)

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 16 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 4:06 PM IST

आज के दौर में जहां एक करियर को पकड़कर लोग आगे बढ़ रहे हैं और कई बार उसमें भी नाकाम हो जाते हैं, वहीं कशिश मेथवानी ने दो दुनिया में अपनी धाकड़ पहचान बनाई है. बचपन में उन्होंने मिस इंडिया बनने का सपना देखा था जिसे उन्होंने इस खिताब को जीतकर पूरा कर लिया. इसके साथ ही उनके मन में सेवा की भावना भी थी. अपनी काबिलियत और मेहनत के दम पर ग्लैमर की दुनिया में नाम कमाया और फिर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर यह साबित कर दिया कि अगर आपके हौसले मजबूत हों तो आप किसी भी प्रोफेशन में अच्छा कर सकते हैं. 

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कशिश का जन्म 9 जनवरी 2002 में मुंबई के पास उल्हासनगर में हुआ था. वह सिंधी परिवार से ताल्लुकात रखती हैं. उन्होंने पुणे की सावित्रीबाई फुले विश्वविद्यालय से बायोटेक्नोलॉजी में मास्टर्स की पढ़ाई की है. इसके बाद उन्होंने बेंगलुरु के IISc में न्यूरोसाइंस पर रिसर्च भी की. 

पहले बनीं मिस इंडिया फिर CDS में हासिल किया मुकाम 

कशिश बचपन से ही ग्लैमर वर्ल्ड में अपना नाम बनाना चाहती थीं. साल 2023 में उन्होंने मिस इंटरनेशनल इंडिया का खिताब अपने नाम किया. इसके बाद से उन्होंने 2024 में कम्बाइंड डिफेंस सर्विस (CDS) परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल कर उसमें भी अपना नाम कमाया. 

ट्रेनिंग के बाद संभाली जिम्मेदारी 

CDS परीक्षा पास करने के बाद कशिश ने  चेन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी में 11 महीने की ट्रेनिंग के बाद 6 सितंबर को वह पासिंग आउट परेड में उन्हें भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में शामिल हुई.  

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शुरू की खास पहल 

कशिश यहीं पर नहीं रूकी. उन्होंने साल 2020 में कोरोना लॉकडाउन के समय Critical Cause की एक पहल की शुरुआत भी की थी. इसका उद्देश्य लोगों को प्लाज्मा, ब्लड और ऑर्गन डोनेशन के लिए जागरूक करना था.

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