UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 के नतीजे आ चुके हैं. इस साल के टॉपर अनुज अग्निहोत्री एम्स के छात्र हैं. टॉपर्स की लिस्ट ने एक बार फिर वही पुरानी बहस छेड़ दी है, 'क्या अब UPSC सिर्फ डॉक्टर्स और इंजीनियर्स के लिए रह गया है?' इस साल ऑल इंडिया रैंक (AIR 1) हासिल करने वाले अनुज अग्निहोत्री ने इस बहस को और हवा दे दी है.
एम्स (AIIMS) जोधपुर से एमबीबीएस (MBBS) करने वाले डॉक्टर अनुज ने न सिर्फ टॉप किया, बल्कि 1071 नंबर भी हासिल किए हैं. देश की सबसे कठिन परीक्षा में 'साइंटिफिक माइंडसेट' वाले छात्र जिस तरह से बाजी मार रहे हैं, इससे यही सवाल उठता है कि आखिर इसके पीछे की क्या वजहे हैं.
क्यों बढ़ रहा है 'व्हाइट कोट' और 'इंजीनियरिंग' का दबदबा?
पिछले 5-6 सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो यूपीएससी की टॉप-10 लिस्ट में 60 से 70% छात्र तकनीकी या मेडिकल बैकग्राउंड से होते हैं. साल 2023 में आदित्य श्रीवास्तव (IIT कानपुर) ने टॉप किया था और अब 2025 में अनुज अग्निहोत्री (AIIMS) ने वही दोहराया है.
एक्सपर्ट्स इसके पीछे तीन बड़े कारण बताते हैं:
CSAT की दीवार: प्रिलिम्स परीक्षा में गणित और रीजनिंग (CSAT) का लेवल इतना बढ़ गया है कि इंजीनियरिंग बैकग्राउंड वाले छात्रों को यहां बड़ा एडवांटेज मिल जाता है.
सिटिंग कैपेसिटी: डॉक्टर बनने के लिए 5 साल की कड़ी तपस्या और 12-12 घंटे की पढ़ाई की आदत यूपीएससी के 'मैराथन' में बहुत काम आती है.
एनालिटिकल अप्रोच: यूपीएससी अब सीधे सवाल नहीं पूछता, वह 'लॉजिक' मांगता है. साइंस के छात्र चीजों को रटने के बजाय उनके 'कारण और प्रभाव' (Cause and Effect) को समझने में माहिर होते हैं.
| साल | टॉपर का नाम | बैकग्राउंड | कुल अंक |
| 2025 | अनुज अग्निहोत्री | डॉक्टर (AIIMS) | 1071 |
| 2024 | शक्ति दुबे | इंजीनियरिंग | 1043 |
| 2023 | आदित्य श्रीवास्तव | इंजीनियरिंग IIT | 1099 |
| 2017 | अनुदीप दुरीशेट्टी | इंजीनियरिंग (BITS) | 1126 |
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
अनअकेडमी के शिक्षक शशिप्रकाश सिंह का कहना है कि आजकल यूपीएससी का पैटर्न बहुत ज्यादा डेटा-ड्रिवेन और लॉजिकल हो गया है. डॉक्टर और इंजीनियर पहले से ही टफ एंट्रेंस एग्जाम (NEET/JEE) की भट्टी में तपकर आए होते हैं. उन्हें पता है कि प्रेशर कैसे हैंडल करना है. अनुज अग्निहोत्री की सफलता यह दिखाती है कि अगर आपके पास मेडिकल जैसा कठिन बैकग्राउंड है, तो यूपीएससी का सिलेबस आपके लिए उतना डरावना नहीं रह जाता.
शिक्षाविद अमित निरंजन कहते हैं कि सिर्फ डिग्री मायने नहीं रखती, बल्कि 'आंसर राइटिंग' का तरीका बदल गया है. इंजीनियर्स और डॉक्टर्स फ्लोचार्ट, डायग्राम और बुलेट पॉइंट्स में उत्तर देते हैं, जो एग्जामिनर को प्रभावित करता है. अनुज ने भी अपने मेन्स में 867 नंबर इसी सटीक रणनीति से हासिल किए होंगे. आर्ट्स के छात्रों को अब अपनी पारंपरिक लेखन शैली बदलनी होगी.
aajtak.in