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एजुकेशन न्यूज़

सैल्यूट! हरदोई के इस स्कूल में 'आर्मी' जैसी ट्रेनिंग लेते हैं बच्चे, अमेरिका से भी आ रहा बुलावा, एक टीचर ने ऐसे बदली तस्वीर

प्रशांत पाठक
  • हरदोई,
  • 20 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 2:46 PM IST
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हरदोई के सांडी ब्लॉक का प्राथमिक विद्यालय सनफरा आज अनुशासन और समर्पण की एक जीवंत मिसाल बन चुका है. यहां के बच्चों का पीटी प्रदर्शन देखकर लोग दांतों तले उंगली दबा लेते हैं.

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 किसी प्रोफेशनल आर्मी परेड जैसा नजारा! एक जैसी चाल, सटीक तालमेल और गजब की ऊर्जा. ये नन्हे बच्चे जब मैदान में उतरते हैं, तो अनुशासन का नया इतिहास रच देते हैं.

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इस सफलता के पीछे असली सूत्रधार हैं सहायक अध्यापक रमेश कुमार. शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बने रमेश ने अपने गुरु से मिली प्रेरणा को इन बच्चों के भविष्य में ढाल दिया है.

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अजेय योद्धा! सनफरा स्कूल की पीटी टीम पिछले 7 वर्षों से जिला स्तर पर अजेय है, 5 वर्षों से मंडल चैंपियन और 2 बार प्रदेश स्तर पर विजेता रह चुकी है. कक्षा 3 के छात्र नमन और सूर्यांश जैसे नन्हे खिलाड़ी ब्लॉक से लेकर प्रदेश स्तर तक स्कूल का नाम रोशन कर चुके हैं. उनका कहना है कि 'हमें पीटी करना बहुत अच्छा लगता है!'

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राजभवन से लेकर मुख्यमंत्री तक मुरीद! इन बच्चों ने राज्यपाल के समक्ष राजभवन में प्रस्तुति दी और गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने अपने कौशल का लोहा मनवाया. ये जो मेडल और पुरस्कार देख रहे हैं, ये इन्हीं बच्चों की प्रतिभा की बानगी हैं. 

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सात समंदर पार भी गूंज! बच्चों के पीटी वीडियो सोशल मीडिया पर इतने वायरल हुए कि अमेरिका और इंग्लैंड तक से सराहना मिली और स्कूल से संपर्क किया गया.

 

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संसाधनों की कमी भी हौसलों को नहीं डिगा पाई. कई बच्चे बिना जूते और पूरी वर्दी के ही अभ्यास करते हैं, लेकिन उनकी एकरूपता और गति किसी बड़ी अकादमी के छात्रों जैसी है.

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पढ़ाई में भी 'सुपर निपुण'! टीचर रमेश कुमार का मानना है कि शारीरिक रूप से फिट बच्चे मानसिक रूप से भी तेज होते हैं. स्कूल के 100% बच्चे निपुण घोषित हो चुके हैं.

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पिरामिड और मार्च पास्ट! पीटी के साथ-साथ ये बच्चे डंबल, लेजियम, योगा और ऊंचे-ऊंचे पिरामिड बनाने में भी माहिर हैं. कक्षा 1 और 2 के नन्हे बच्चे भी इस टीम का अहम हिस्सा हैं.

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अतिरिक्त मेहनत का फल! इंचार्ज प्रधानाध्यापक रसूल अहमद और सहायक अध्यापक जावेद भी रमेश कुमार का पूरा साथ देते हैं. स्कूल के बाद भी बच्चों के लिए एक्स्ट्रा क्लासेज और प्रैक्टिस सेशन चलते हैं. सनफरा स्कूल उन सभी के लिए मिसाल है जो संसाधनों की कमी का बहाना बनाते हैं. यह साबित करता है कि अगर गुरु समर्पित हो और शिष्य सीखने को तैयार, तो कुछ भी असंभव नहीं.

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