भारत में एक ऐसी जनजाति रहती है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं और जिन्हें देखने का मौका भी बहुत कम लोगों को मिला है. इन लोगों को शोम्पेन (Shompen) जनजाति कहा जाता है. शोम्पेन जनजाति भारत के Great Nicobar Island में रहती है, जो Andaman and Nicobar Islands का हिस्सा है. यह इलाका घने जंगलों और दूर-दराज के क्षेत्रों में फैला हुआ है, जहां आम लोगों का जाना आसान नहीं है.
कौन हैं शोम्पेन लोग?
शोम्पेन भारत की सबसे अलग और रहस्यमयी जनजातियों में से एक मानी जाती है. ये लोग बाहरी दुनिया से बहुत कम संपर्क रखते हैं और अपनी पारंपरिक जीवनशैली में ही रहना पसंद करते हैं. इनकी आबादी बहुत कम है और ये आधुनिक समाज से लगभग अलग-थलग जीवन जीते हैं.
कैसे जीते हैं ये लोग?
ये लोग जंगलों में रहते हैं और शिकार और फल-फूल पर निर्भर रहते हैं. खेती और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बहुत कम करते हैं. अपनी अलग भाषा और संस्कृति है, जिसे बाहरी लोग मुश्किल से समझ पाते हैं. बाहरी लोगों से संपर्क से बचते हैं, इसलिए बहुत कम लोग ही इन्हें देख पाए हैं.
क्यों कम मिलती है जानकारी?
भारत सरकार इन जनजातियों की सुरक्षा और उनकी संस्कृति को बचाने के लिए उनके क्षेत्रों में आम लोगों के जाने पर रोक लगाती है. यही कारण है कि शोम्पेन जनजाति के बारे में जानकारी सीमित है. शोम्पेन जनजाति भारत की सबसे अनोखी और रहस्यमयी जनजातियों में से एक है, जो आज भी प्रकृति के बीच अपनी पारंपरिक जीवनशैली के साथ जीवन जी रही है.
Survival International( BBC की रिपोर्ट के अनुसार), Great Nicobar Island में रहने वाली Shompen जनजाति की संख्या लगभग 100 से 400 के बीच है. यह जनजाति जंगलों में रहने वाली खानाबदोश है. ये लोग बाहरी दुनिया से बहुत कम संपर्क रखते हैं. ग्रेट निकोबार में कुल मिलाकर लगभग 8,000 अन्य लोग रहते हैं, इसलिए यह इलाका काफी दूर और अलग-थलग है.
सरकार की बड़ी योजना क्या है?
सरकार ने लगभग 9 अरब डॉलर की एक बड़ी विकास योजना बनाई है. इस योजना के तहत एक बड़ा शहर बनाया जाएगा. शिपिंग पोर्ट (बंदरगाह) बनेगा. अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनेगा, पावप प्लांट बनाया जाएगा. योजना के अनुसार, भविष्य में लगभग 6.5 लाख लोग यहां बस सकते हैं. सरकार का कहना है कि इससे व्यापार बढ़ेगा.
चिंता क्यों जताई जा रही है?
सर्वाइवल इंटरनेशनल का कहना है कि इस परियोजना से शोम्पेन जनजाति की जमीन छिन सकती है. उनके शिकार और रहने के क्षेत्र खत्म हो सकते हैं. बाहरी लोगों से संपर्क बढ़ सकता है. विशेषज्ञों, जिनमें University of Southampton के शोधकर्ता भी शामिल हैं, ने चेतावनी दी है कि बाहरी लोगों से संपर्क होने पर बीमारियों का खतरा बढ़ जाएगा. शोम्पेन लोगों में बाहरी बीमारियों से लड़ने की क्षमता बहुत कम है. उनकी आबादी तेजी से घट सकती है. मानसिक और सामाजिक टूटन भी हो सकती है. सरकार की अपनी रिपोर्ट में भी माना गया है कि उनके प्राकृतिक वातावरण में बदलाव उनके अस्तित्व के लिए खतरा बन सकता है.
2024 में राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने किया दौरा
भारत की राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने 20 फरवरी 2024 को ग्रेट निकोबार का दौरा किया. यह वही द्वीप है, जहां सरकार एक बड़ी विकास परियोजना लाने की योजना बना रही है. इस योजना में बड़ा शिपिंग पोर्ट, पर्यटन केंद्र, आधुनिक शहर बनाने की बात है. सरकार का कहना है कि इससे क्षेत्र का विकास होगा और व्यापार बढ़ेगा.
पहली बार 2024 में किया वोट
शोम्पेन जनजाति ने पहली बार 2024 में लोकसभा चुनाव में मतदान किया.वे भारत की “विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह” (PVTG) श्रेणी में आते हैं. Andaman and Nicobar Islands में पहली बार Great Nicobar Island की Shompen जनजाति के 7 लोगों ने लोकसभा चुनाव में वोट डाला. यह जनजाति “विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह” (PVTG) में शामिल है.
अंडमान-निकोबार की अन्य प्रमुख जनजातियां
Andaman and Nicobar Islands में पांच प्रमुख PVTG जनजातियां हैं:
शोम्पेन जनजाति की खास बातें
ये घने उष्णकटिबंधीय जंगलों में रहते हैं. इनकी अपनी अलग भाषा है, जिसमें कई बोलियां हैं. इनकी सामाजिक व्यवस्था पितृसत्तात्मक है. एक विवाह आम है, लेकिन बहुविवाह भी मान्य है. ग्रेट निकोबार में विकास परियोजना से आर्थिक और रणनीतिक फायदे हो सकते हैं, लेकिन इससे शोम्पेन जनजाति और वहां की अनोखी प्रकृति को गंभीर खतरा भी हो सकता है.
विशेषज्ञों की चिंता
लेकिन कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना शोम्पेन जनजाति के लिए खतरनाक साबित हो सकती है. फरवरी 2024 में 39 विशेषज्ञों ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर चेतावनी दी कि अगर यह योजना लागू हुई, तो शोम्पेन लोगों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है. Survival International के प्रवक्ता कैलम रसेल ने कहा कि अगर यह मेगा प्रोजेक्ट आगे बढ़ता है, तो यह शोम्पेन जनजाति के लिए बहुत बड़ा नुकसान होगा. शोम्पेन जनजाति बहुत छोटी और बाहरी दुनिया से लगभग अलग रहने वाली जनजाति है. विकास योजना से उनके जंगल और जमीन पर असर पड़ सकता हैच सरकार इसे विकास का कदम बता रही है, जबकि विशेषज्ञ इसे जनजाति के लिए खतरा मान रहे हैं. यानी एक तरफ विकास की योजना है, तो दूसरी तरफ एक छोटी जनजाति के अस्तित्व की चिंता.
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