वेनेजुएला के पास कितना तेल है? सऊदी अरब से भी बड़ा है इसका खजाना

विशेषज्ञ मानते हैं कि वेनेज़ुएला का विशाल तेल भंडार उसे वैश्विक राजनीति का केंद्र बना देता है.तेल सिर्फ ऊर्जा नहीं, बल्कि ताकत और रणनीति का हथियार भी है और यही वजह है कि वेनेजुएला बार-बार अमेरिका और दुनिया की बड़ी शक्तियों के निशाने पर आता रहा है.

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वेनेजुएला के पास करीब 303 अरब बैरल कच्चे तेल का प्रमाणित भंडार है (Photo: X/DefenceMatrix) वेनेजुएला के पास करीब 303 अरब बैरल कच्चे तेल का प्रमाणित भंडार है (Photo: X/DefenceMatrix)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:30 PM IST

अमेरिका की ओर से वेनेजुएला पर किए गए हवाई हमलों के बाद एक बार फिर दुनिया नई जंग के मुहाने पर खड़ी नजर आ रही है. रूस-यूक्रेन और इजरायल युद्ध के बाद अब लोगों को आशंका है कि दुनिया के इस हिस्से में भी अशांति और टकराव बढ़ सकता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे तेल सबसे बड़ा कारण हो सकता है. उनका कहना है कि अमेरिका की नजर लंबे समय से वेनेजुएला के प्राकृतिक संसाधनों पर टिकी हुई है और इसी रणनीतिक हित के चलते हालात इस स्तर तक पहुंचे हैं.

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दुनिया की राजनीति में जब भी तेल का जिक्र आता है, जहन में अक्सर मध्य पूर्व या अमेरिका के टेक्सास जैसे इलाकों की तस्वीर उभरती है. लेकिन हकीकत यह है कि तेल का सबसे बड़ा खजाना किसी अरब देश में नहीं, बल्कि दक्षिण अमेरिका के वेनेजुएला में है. यही वजह है कि आज अमेरिका और वेनेज़ुएला के बीच बढ़ता तनाव सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि तेल से गहराई से जुड़ा हुआ माना जा रहा है.

वेनेजुएला के पास कितना तेल है?

अमेरिकी ऊर्जा एजेंसी US Energy Information Administration के मुताबिक, वेनेजुएला के पास करीब 303 अरब बैरल कच्चे तेल का प्रमाणित भंडार है. यह दुनिया के कुल तेल भंडार का लगभग पांचवां हिस्सा माना जाता है. यानी पृथ्वी पर मौजूद किसी भी देश के मुकाबले वेनेजुएला के पास सबसे ज्यादा साबित तेल भंडार हैं. तुलना करें तो इराक और सऊदी अरब जैसे देशों के भंडार इससे काफी कम हैं.

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इतना तेल, फिर भी कम उत्पादन क्यों?

तेल के इस अथाह खजाने के बावजूद वेनेजुएला आज सिर्फ करीब 10 लाख बैरल तेल रोज़ाना निकाल पा रहा है, जो वैश्विक उत्पादन का एक प्रतिशत से भी कम है. यह उत्पादन उस स्तर से बहुत नीचे है, जो कभी 30 लाख बैरल प्रतिदिन से ज्यादा हुआ करता था. इसकी वजह अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध, आर्थिक संकट, निवेश की कमी और जर्जर होती ऊर्जा संरचना मानी जाती है.

वेनेजुएला का ज्यादातर तेल हेवी और खट्टा (सॉर) क्रूड है. इसे निकालना और रिफाइन करना आसान नहीं होता. इसके लिए अत्याधुनिक तकनीक और भारी निवेश की जरूरत होती है, जो आमतौर पर बड़ी अंतरराष्ट्रीय तेल कंपनियों के पास होता है. लेकिन प्रतिबंधों के चलते ये कंपनियां वेनेज़ुएला में काम नहीं कर पा रही हैं.

अमेरिका के लिए वेनेजुएला का तेल क्यों अहम?

अमेरिका भले ही दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश हो, लेकिन उसकी रिफाइनरियां खास तरह के तेल पर निर्भर हैं. अमेरिका ज्यादातर हल्का और मीठा कच्चा तेल निकालता है, जो पेट्रोल बनाने में तो उपयोगी है, लेकिन डीजल, डामर और भारी औद्योगिक ईंधन के लिए हेवी क्रूड जरूरी होता है. यही वह श्रेणी है, जिसमें वेनेज़ुएला का तेल बेहद अहम माना जाता है.

डीजल की वैश्विक कमी और रूस जैसे देशों पर लगे प्रतिबंधों के बीच वेनेज़ुएला का तेल अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के लिए एक बड़ा विकल्प बन सकता है. इसी वजह से कई विश्लेषक मानते हैं कि अगर वेनेज़ुएला में पश्चिम समर्थक सरकार आती है, तो वहां का तेल न सिर्फ बाजार को राहत दे सकता है, बल्कि भू-राजनीतिक संतुलन भी बदल सकता है.

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क्यों है वेनेजुएला का तेल इतना कीमती?

वेनेजुएला का तेल सिर्फ मात्रा में ही नहीं, बल्कि रणनीतिक महत्व में भी बेशकीमती है. यह तेल रूस जैसे देशों पर निर्भरता कम कर सकता है, वैश्विक कीमतों को स्थिर कर सकता है और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के लिए ऊर्जा सुरक्षा का नया रास्ता खोल सकता है. यही वजह है कि वेनेजुएला का तेल केवल एक प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति की सबसे अहम चाबी बन चुका है.

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