आज के दिन ही 4 फरवरी 2004 को हावर्ड विश्वविद्यालय के एक छात्र ने एक ऐसी सोशल नेटवर्किंग साइट ईजाद की, जिसने सोशल मीडिया युग को जन्म दिया. इस छात्र का नाम मार्क जकरबर्ग था. इसने फेसबुक नाम की एक सोशल मीडिया वेबसाइट लॉन्च की थी. इसका मकसद हार्वर्ड के छात्रों को आपस में जोड़ना था. आज इस नाम से हर कोई वाकिफ है. इसके बाद से लोगों के ट्रेंड में छाने और वायरल होने की कहानियां शुरू हो गई. इसने कई लोगों को सेलिब्रिटी बना दिया.
4 फरवरी 2004 को लॉन्च होने के दूसरे ही दिन एक हजार से अधिक लोगों ने फेसबुक पर रजिस्ट्रेशन करा लिया था. यह तो बस शुरुआत थी. अब फेसबुक के नाम से जानी जाने वाली यह वेबसाइट तेजी से इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में से एक बन गई है. आज, फेसबुक दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में से एक है. इसके 2 अरब से ज्यादा एक्टिव यूजर हैं.
अब मेटा हो गया है नाम
फेसबुक देखते ही देखते एक विशाल सोशल मीडिया नेटवर्क बन गया. आज इसका नाम भी बदल चुका है. अब फेसबुक को चलाने वाली कंपनी का नाम मेटा है. यह अभी भी मार्क जकरबर्ग के स्वामित्व में चल रहा है.
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फेसबुक की उत्पत्ति की गहन जांच-पड़ताल की गई है. इसमें 2010 की प्रशंसित फिल्म 'द सोशल नेटवर्क ' भी शामिल है, लेकिन इसके पीछे का सटीक विचार अभी भी स्पष्ट नहीं है. यह स्पष्ट है कि ज़करबर्ग को कोडिंग और सनसनी पैदा करने, दोनों में महारत हासिल थी. ये दोनों ही गुण हार्वर्ड में उनके लिए बहुत उपयोगी साबित हुए.
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जकरबर्ग ने फेसमाश नाम की एक वेबसाइट बनाकर कैंपस में सनसनी मचा दी थी, जहां छात्र दो बेतरतीब ढंग से चुनी गई हावर्ड महिलाओं में से किसे अधिक आकर्षक मानते थे, इस पर वोट कर सकते थे. इस वजह से वे प्रशासन और कई महिला समूहों के निशाने पर आ गए थे. फेसमाश थोड़े समय के लिए ही चली, लेकिन काफी लोकप्रिय हुई. इससे ज़करबर्ग ने कैंपस-व्यापी सोशल नेटवर्क बनाने के महत्व पर विचार किया.
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