डोनाल्ड ट्रंप की आंख की किरकिरी बना वेनेजुएला! जानिए अमेरिका के निशाने पर क्यों है ये देश

वेनेजुएला और अमेरिका के बीच बिगड़ते रिश्ते अचानक पैदा नहीं हुए हैं. सवाल यह है कि अमेरिका को यह देश क्यों खटकने लगा और इसके पीछे असली वजह क्या है.आइए समझते हैं.

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वेनेजुएला को रूस और चीन का खुला समर्थन मिलता रहा है (File Photo: ITG) वेनेजुएला को रूस और चीन का खुला समर्थन मिलता रहा है (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:12 PM IST

दक्षिण अमेरिका के वेनेजुएला की राजधानी काराकास हाल के दिनों में तेज धमाकों से दहल उठी. स्थानीय मीडिया और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, रणनीतिक इलाकों के पास संदिग्ध हवाई हमलों जैसी घटनाएं देखी गईं. इन धमाकों के बाद कई हिस्सों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई और सड़कों पर यातायात भी प्रभावित हुआ.

वेनेजुएला सरकार ने सीधे अमेरिका पर 'मिलिट्री एग्रेशन' का आरोप लगाया और नेशनल इमरजेंसी घोषित की. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हमलों को लेकर ट्रंप प्रशासन पर सवाल उठे हैं. अमेरिका स्थित न्यूज़ मीडिया के हवाले से बताया गया है कि ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों को शनिवार तड़के वेनेजुएला की राजधानी काराकास के ऊपर धमाकों और विमानों की गतिविधियों की जानकारी थी.सवाल यही है कि अमेरिका आखिर वेनेजुएला में दखल क्यों चाहता है और उसका असली मकसद क्या है.

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तेल. सबसे बड़ी वजह

वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल भंडार वाला देश है. अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के मुताबिक, देश के पास करीब 303 अरब बैरल कच्चा तेल है, जो दुनिया के कुल भंडार का लगभग पांचवां हिस्सा माना जाता है.

यही 'काला सोना' अमेरिका की सबसे बड़ी दिलचस्पी की वजह है. अमेरिका खुद तेल का बड़ा उत्पादक है, लेकिन उसे भारी और खट्टे कच्चे तेल की जरूरत पड़ती है, जिससे डीजल, डामर और भारी मशीनों के लिए ईंधन तैयार किया जाता है. इस तरह का तेल वेनेजुएला के पास प्रचुर मात्रा में मौजूद है.

उत्पादन गिरा, संकट बढ़ा

हालांकि वेनेजुएला के पास विशाल तेल भंडार है, लेकिन उत्पादन लगातार गिरता गया है. आज देश करीब 10 लाख बैरल प्रतिदिन तेल का उत्पादन करता है, जबकि 1999 से पहले यह आंकड़ा करीब 35 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच चुका था. विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध, जर्जर बुनियादी ढांचा और राजनीतिक अस्थिरता इसके मुख्य कारण हैं.

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सत्ता और राजनीति की लड़ाई

अमेरिका लंबे समय से वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सरकार को निशाने पर रखे हुए है. वॉशिंगटन का आरोप है कि मादुरो सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन नहीं करती और चुनावों में गड़बड़ी होती है. वहीं वेनेजुएला का दावा है कि ड्रग्स और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की आड़ में अमेरिका असल में उसके तेल संसाधनों पर नियंत्रण करना चाहता है.

रूस और चीन फैक्टर

वेनेजुएला को रूस और चीन का खुला समर्थन मिलता रहा है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन मादुरो सरकार के समर्थन में खुलकर सामने आ चुके हैं. इससे यह टकराव सिर्फ अमेरिका और वेनेजुएला तक सीमित न रहकर एक बड़े वैश्विक शक्ति संघर्ष का रूप ले चुका है.

सैन्य ताकत में कितना फर्क

ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स 2025 के अनुसार, अमेरिका दुनिया की सबसे ताकतवर सैन्य शक्ति है, जबकि वेनेजुएला इस सूची में 50वें स्थान पर है. सैनिकों की संख्या, हथियार, तकनीक और संसाधनों के मामले में अमेरिका वेनेजुएला से कई गुना आगे है. यही वजह है कि किसी भी संभावित टकराव में संतुलन अमेरिका के पक्ष में नजर आता है.

अमेरिका आखिर चाहता क्या है

विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका का मकसद सिर्फ सैन्य दबाव बनाना नहीं है. वह चाहता है कि वेनेजुएला का तेल वैश्विक बाजार के लिए खुले.अमेरिकी और पश्चिमी कंपनियों को वहां निवेश का मौका मिले.रूस और चीन का प्रभाव कम किया जाए और वेनेजुएला में ऐसी सत्ता व्यवस्था बने, जो अमेरिका के हितों के अनुकूल हो.

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आगे क्या...

हालिया हमलों को सीमित सैन्य कार्रवाई माना जा रहा है और किसी बड़े नागरिक नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. लेकिन हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं. मादुरो सरकार बातचीत की बात कर रही है, जबकि ट्रंप प्रशासन की नीतियां दबाव बढ़ाने की ओर इशारा करती हैं.अब पूरी दुनिया की नजर इस पर है कि यह तनाव यहीं थमेगा या वेनेजुएला एक बड़े अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का नया केंद्र बन जाएगा.
 

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