देश में जनगणना एक बड़ी सरकारी प्रक्रिया है, जिसके जरिए आबादी, रोजगार, शिक्षा और सामाजिक स्थिति से जुड़ी जानकारी जुटाई जाती है. 2026–27 की जनगणना को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं और इस बार कई बड़े बदलाव भी देखने को मिल रहे हैं. साल 2027 में पूरी होने वाली जनगणना की प्रक्रिया 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो गई है. इस बार जनगणना कई मायनों में खास होगी, क्योंकि इसे डिजिटल तरीके से कराने की योजना है. हालांकि, इसकी प्रक्रिया 2026 से ही शुरू हो चुकी है और इसे दो चरणों में पूरा किया जाएगा, जिसमें पहले घरों का सर्वे और फिर जनसंख्या की गिनती की जाएगी.
इस बीच लोगों के बीच एक सवाल उठ रहा है कि आखिर कौन करता है ये काम, किस मंत्रालय के अंदर ये आते हैं या उनकी सैलरी कितनी होती है?
कौन करता है जनगणना?
बता दें कि भारत में जनगणना का काम केंद्र सरकार के अधीन होता है. इसे गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त (Registrar General & Census Commissioner of India) के कार्यालय द्वारा संचालित किया जाता है. जनगणना के लिए अलग से बड़ी संख्या में नए कर्मचारियों की हायरिंग नहीं होती है बल्कि आमतौर पर सरकारी स्कूलों के शिक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, पटवारी, क्लर्क और अन्य सरकारी कर्मचारी इस काम में लगाए जाते हैं.
क्या होती है उनकी जिम्मेदारी?
जनगणना करने वाले कर्मचारी लोगों के घर जा-जाकर जानकारी लेते हैं. इनमें परिवार के सदस्य, शिक्षा, नौकरी और घर की सुविधाएं से जुड़ी जानकारी कलेक्ट करते हैं.
मिलती है इतनी सैलरी
वहीं, अगर सैलरी की बात करें, तो जनगणना करने वालों को अलग से स्थायी सैलरी नहीं मिलती, क्योंकि वे पहले से सरकारी कर्मचारी होते हैं. उन्हें काम के बदले मानदेय (Honorarium) दिया जाता है. एन्यूमरेटर को करीब 15 से 30 हजार रुपये दिए जाते हैं.
क्या है हाल की स्थिति?
हाल की बात करें, तो साल 2027 में 16वीं जनगणना आयोजित की जा रही है जिसके लिए प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. यह दो चरणों में होगी- हाउस लिस्टिंग और जनसंख्या गणना होगी. इसके साथ ही इस बार की जनगणना पूरी तरह से डिजिटल होगी. लोग खुद भी ऑनलाइन जानकारी भर सकेंगे. इसके लिए लाखों कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी जा रही है और कई राज्यों में हजारों एन्यूमरेटर तैनात किए जा रहे हैं.
इस साल पूछे जाएंगे
आजतक एजुकेशन डेस्क