अक्सर आम आदमी को लगता है कि राजनीति में जाने के बाद नेताओं की अच्छी सैलरी होती है. दरअसल, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने बहुमत से आगे सीटें भी अपने नाम कर ली हैं. चुनाव प्रचार में लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी विपक्ष के कई विधायकों को हार का सामना भी करना पड़ा है. इसके बाद से लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर विधायक बनने के बाद कितनी सैलरी मिलती है. क्या सारे सरकारी कर्मचारियों की तरह उन्हें भी पेंशन और भत्तों जैसी सेवाएं मिलती हैं तो चलिए जानते हैं.
पश्चिम बंगाल में कितने विधायक?
बता दें कि पश्चिम बंगाल में कुल 294 विधायक चुने जाते हैं. जनता के वोट के आधार पर वे विधानसभा पहुंते हैं. बढ़ती जिम्मेदारियों के साथ अच्छी सैलरी और कई सारी सुविधाएं मिलती हैं.
कितनी मिलती है सैलरी?
हर राज्य में विधायकों की सैलरी अलग-अलग फैक्टर पर तय होती है. साल 2023 में विधायकों के सैलरी में बड़ा बदलाव किया गया था. उस दौरान बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी ने विधायकों की सैलरी में 40 हजार रुपये तक बढ़त का फैसला लिया था. राज्यपाल की मंजूरी के बाद इस फैसले को लागू किया गया जिसके बाद से विधायकों की आय में बढ़त हुआ.
क्या मिलते हैं भत्ते?
लेकिन खास बात यह है कि विधायकों की कमाई बेसिक सैलरी तक सीमित नहीं है. इसके साथ ही उन्हें कई तरह के भत्ते और सुविधा भी मिलती है. इनमें अपने विधानसभा क्षेत्र से जुड़े खर्चों के लिए कांस्टीट्यूएंसी अलाउंस, मेडिकल सुविधाएं, ट्रैवल अलाउंस, फोन और संचार सुविधाएं, बिजली और दूसरी सरकारी योजनाओं का फायदा मिलता है. इन सब चीजों को मिला दिया जाए तो एक विधायक की सैलरी 1. 21 लाख से 1.25 लाख रुपये तक पहुंच जाती है.
क्या है पेंशन का रूल?
विधायक बने रहने तक ही उन्हें फायदा नहीं मिलता है बल्कि एक विधायक बन जाने के बाद से उन्हें पेंशन भी मिलती है. विधायकों को जीवनभर पेंशन मिलती है.
आजतक एजुकेशन डेस्क