बिहार की सियासत में आज एक ऐसा नाम कैबिनेट मंत्री की कुर्सी तक पहुंच गया, जो अब तक सत्ता के गलियारों से कोसों दूर अध्यात्म और सादगी की दुनिया में रहता था. मुख्यमंत्री आवास में रहकर भी राजनीति से 'परहेज' करने वाले निशांत कुमार अब सम्राट चौधरी सरकार का हिस्सा बन गए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में गांधी मैदान में हुई इस शपथ ने बिहार की राजनीति में 'नीतीश के उत्तराधिकारी' की तस्वीर साफ कर दी है
.BIT मेसरा से मंत्री पद तक...
निशांत कुमार बिहार के दिग्गज नेता नीतीश कुमार के इकलौते बेटे हैं. निशांत की प्रारंभिक शिक्षा पटना (बिहार) के सेंट करेन स्कूल से हुई. आगे की स्कूलिंग के लिए वो मसूरी (उत्तराखंड) चले गए, जहां उन्होंने मानव भारती इंडिया इंटरनेशनल स्कूल से अपनी स्कूलिंग पूरी की. इसके बाद ही वे इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए रांची (BIT मेसरा) गए थे.
भले ही पिता की तरह ही निशांत भी पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं लेकिन दोनों के स्वभाव में जमीन-आसमान का फर्क बताया जाता है. एक तरफ जहां नीतीश की रुचि शुरुआत से ही राजनीति से रही. वहीं बेटा अध्यात्म, योग और साधना की ओर रहा. एक समय तो ऐसा था जब उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि उन्हें राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है.
'साधु' छवि और सादगी का राज
निशांत को करीब से जानने वाले लोग उन्हें 'रिलक्टेंट पॉलिटिशियन' यानी अनिच्छुक राजनेता कहते हैं. बताया जाता है कि इसके पीछे उनका अकेलापन और संघर्ष बड़ी वजह है. साल 2007 में मां मंजू सिन्हा के निधन के बाद निशांत काफी अकेले हो गए थे. पिता राजनीति में व्यस्त थे, ऐसे में उन्होंने खुद को सादगी और शांति में ढाल लिया.
वहीं नीतीश कुमार हमेशा वंशवाद के खिलाफ रहे, इसलिए निशांत कभी किसी प्रोटोकॉल या सुरक्षा के घेरे में नहीं दिखे. वे पटना की सड़कों पर आम इंसान की तरह घूमते नजर आते थे. उनकी इसी विनम्रता और शांत स्वभाव ने उन्हें 'साधु' वाली छवि दी.
2026: जब 'बेटे' के लिए टूटा नीतीश का उसूल
नीतीश कुमार ने अपने पूरे राजनीतिक करियर में परिवारवाद पर प्रहार किया, लेकिन मार्च 2026 में जब निशांत ने JDU जॉइन की, तो यह बिहार के लिए सबसे बड़ा 'यू-टर्न' था. अब कैबिनेट में शामिल होकर निशांत ने यह साफ कर दिया है कि वे पिता की विकासवादी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं.
आजतक एजुकेशन डेस्क