प‍िता मैनुफैक्चरर, मां गृहणी और बेटा बना 'देश का टॉपर'... जान‍िए आदित्य गुप्ता ने JEE Main में कैसे पाए 300 में 300 नंबर

आदित्य गुप्ता ने जेईई मेन 2026 सेशन 2 में टॉप करने के लिए परफेक्ट 100 परसेंटाइल हासिल किया है. उनकी सफलता की कहानी अच्छी तैयारी, सही रणनीति,कंसिस्टेंसी और मजबूत मेंटल डिसिप्लिन को दर्शाती है. इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि परिणाम से ज्यादा प्रयास पर ध्यान देना चाहिए. 

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दिल्ली के आदित्य गुप्ता ने जेईई मेन सेशन 2 में टॉप किया. (Photo : ITG) दिल्ली के आदित्य गुप्ता ने जेईई मेन सेशन 2 में टॉप किया. (Photo : ITG)

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 21 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 12:18 PM IST

जेईई मेन जैसी कठिन परीक्षा में टॉप करना कोई छोटी बात नहीं है, लेकिन दिल्ली के रहने वाले आदित्य गुप्ता ने तो इतिहास ही रच दिया! उन्होंने जेईई मेन 2026 के दूसरे सेशन में 300 में से पूरे 300 नंबर लाकर ऑल इंडिया रैंक (AIR) 1 हासिल की है. उनकी ये सफलता कड़ी मेहनत, पक्का रूटीन, चीजों को रटने के बजाय समझने और प्रेशर में भी शांत रहने का नतीजा है. इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि परिणाम से ज्यादा प्रयास पर ध्यान देना चाहिए. 

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12 घंटे की पढ़ाई और खूब तैयारी 

तैयारी के आखिरी दिनों में आदित्य ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी. उन्होंने दिन के 12-12 घंटे किताबों के नाम कर दिए. लेकिन खास बात यह रही कि वे केवल पास होने के जुगाड़ या शॉर्टकट के पीछे नहीं भागे बल्कि उनका पूरा फोकस इस बात पर था कि जो भी पढ़ा है, वह गहराई से समझ में आए.  उन्होंने अपने क्लास नोट्स को इतनी बार दोहराया कि हर कॉन्सेप्ट उनके दिमाग में बिल्कुल साफ हो गया. सीधे शब्दों में कहें तो, उन्होंने शॉर्टकट के बजाय सही रास्ते को चुना और अपनी मेहनत से उसे आसान बना दिया. रोजाना के मॉक टेस्ट ने उनकी तैयारी को और मजबूत कर दिया. 

इस सब्जेक्ट पर ज्यादा फोकस 

आदित्य ने अपनी तैयारी के आखिरी दौर में इनऑर्गेनिक केमिस्ट्री पर खास ध्यान दिया. बहुत से छात्र इसे रटने वाला सब्जेक्ट समझते हैं और उसे छोड़ देते हैं लेकिन आदित्य ने इसे एक जैकपॉट की तरह देखा. उनका मानना था कि अगर इस विषय पर अच्छी पकड़ बना ली जाए, तो यह कम समय में सबसे ज्यादा नंबर दिलाने वाला हिस्सा बन जाता है. उन्होंने समझ लिया था कि इस स्कोरिंग एरिया में की गई मेहनत ही रैंक को आसमान तक ले जा सकती है और हुआ भी बिल्कुल वैसा ही. 

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जीत के पीछे का असली हीरो 

आदित्य की इस लंबी यात्रा में सबसे बड़ी ताकत रही उनकी सीखने की भूख और अपनों का साथ था. आदित्य के लिए ये दो साल किसी बोझ की तरह नहीं थे. उन्होंने इसलिए पढ़ाई नहीं की कि उन्हें किसी रेस में जीतना था, बल्कि इसलिए की क्योंकि उन्हें नई चीजें सीखने में मजा आता था. उनकी यही जिज्ञासा उनके लिए स्ट्रेस बस्टर बन गई. जब आप किसी काम से प्यार करने लगते हैं, तो थकान और तनाव खुद-ब-खुद पीछे छूट जाते हैं. वह अपनी सफलता का श्रेय अपनी तैयारी के दौरान अपने माता-पिता, शिक्षकों और स्कूल के निरंतर सहयोग को देते हैं. उनके पिता एक मैन्युफैक्चरिंग का काम करते हैं और माता गृहिणी हैं. वह उनके सुख-दुख दोनों में उनके लिए प्रेरणा बनकर खड़े रहे. उन्होंने आगे कहा कि उनके शिक्षकों और विद्या मंदिर क्लासेस ने उनकी हर छोटी-बड़ी मुश्किल को आसान किया. उन्होंने न केवल उन्हें विषय समझाए बल्कि तब भी हिम्मत दी जब पढ़ाई का पहाड़ ऊंचा लगने लगा था. 

मेंटल प्रेशर और पढ़ाई की प्लानिंग 

आदित्य की यह जीत न केवल उनकी बुद्धिमानी की थी बल्कि उनके धैर्य और स्वभाव की भी है. हर किसी को डर लगता है. उन्होंने यह बात भी स्वीकार की कि इस जर्नी में उन्हें खुद पर कई बार सेल्फ डाउट हुआ. जब कोई टॉपिक समझ नहीं आता था या टेस्ट में नंबर कम आते थे, तो मन छोटा हो जाता था. लेकिन ऐसे में उनके मेंटर्स और गाइड्स ने उन्हें लक्ष्य की ओर फोकस्ड रखा. आदित्य कहते हैं कि जेईई परीक्षा सिर्फ फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ की परीक्षा नहीं है बल्कि यह आपके स्वभाव की परीक्षा है. टेंशन से निपटने के लिए उन्होंने शास्त्रीय संगीत और पुराने गानों का सहारा लिया. 

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IIT दिल्ली है गोल 

आदित्य का लक्ष्य आईआईटी दिल्ली हैं. वह वहां से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग करना चाहते हैं और इसके पीछे उनकी वजहें बहुत साफ है. वह सिर्फ डिग्री के लिए वहां नहीं जाना चाहते, बल्कि उन्हें IIT दिल्ली का वह शानदार माहौल अपनी ओर खींचता है. आदित्य का मानना है कि वहां की पढ़ाई की संस्कृति, वहां से निकले दिग्गज लोग (Alumni) और उनके साथ पढ़ने वाले तेज-तर्रार दोस्त उन्हें जीवन में कुछ बड़ा करने के लिए प्रेरित करेंगे.

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