रवि किशन की PhD पर योगी की चुटकी: क्या 'गले में टांगने' के ही काम आती है मानद उपाधि? समझें इसके नियम

मानद उपाध‍ि मिलना क‍िसी के ल‍िए सम्मान का व‍िषय है. लेकिन क्या आपको पता है कि इस उपाधि‍ का इस्तेमाल जॉब में नहीं होता. इस उपाध‍ि के मिलने के बाद आप नाम के साथ डॉक्टर लगा सकते हैं या नहीं, क्या हैं इस उपाध‍ि के मिलने के फायदे. आइए सब समझते हैं.

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CM Yogi once again took a dig at MP Ravi Kishan. CM Yogi once again took a dig at MP Ravi Kishan.

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • लखनऊ,
  • 06 मई 2026,
  • अपडेटेड 8:55 AM IST

गोरखपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सांसद रवि किशन आमने-सामने आए तो हंसी-ठिठोली का माहौल बन गया. रवि किशन को 4 मई को भोपाल की LNCT यूनिवर्सिटी से मिली मानद डॉक्टरेट की उपाधि पर सीएम योगी ने मजे लेते हुए कहा कि इससे जॉब नहीं मिलेगी, इसे बस गले में टांग सकते हैं.

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लेकिन क्या आप जानते हैं कि सीएम योगी आद‍ित्यनाथ की इस चुटकी के पीछे एक बड़ा एकेडमिक सच छिपा है? चलिए समझते हैं आखिर क्या होती है मानद उपाधि और क्यों इसे लेकर रवि किशन अपने नाम के आगे 'डॉक्टर' या 'प्रोफेसर' नहीं लिख सकते.

क्या होती है मानद उपाधि?
मानद उपाधि कोई ऐसी डिग्री नहीं है जिसके लिए आपको कॉलेज जाना पड़े, परीक्षा देनी पड़े या थीसिस लिखनी पड़े. यह विश्वविद्यालय द्वारा किसी ऐसे व्यक्ति को दी जाती है जिसने समाज, कला, विज्ञान, राजनीति या साहित्य में असाधारण योगदान दिया हो. इसे 'Honoris Causa' भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है 'सम्मान के तौर पर'. रवि किशन को उनके अभिनय और सार्वजनिक जीवन में योगदान के लिए यह सम्मान मिला है.

क्या इससे 'जॉब' मिल सकती है?
सीएम योगी ने बिल्कुल सही कहा कि इस डिग्री से नौकरी नहीं मिलती. अगर कोई व्यक्ति इस मानद पीएचडी के आधार पर किसी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर की नौकरी मांगता है, तो उसे नहीं मिलेगी. वजह ये है कि इसमें कोई क्रेडिट या फॉर्मल ग्रेडिंग नहीं होती, इसलिए इसे शैक्षणिक योग्यता (Academic Qualification) में नहीं गिना जाता. यह केवल एक सम्मान है, कोई योग्यता नहीं.

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क्या नाम के आगे 'डॉक्टर' लगा सकते हैं?
यही सबसे बड़ा पेच है, जिस पर सीएम योगी ने रवि किशन की खिंचाई की. नियम के मुताबिक यूजीसी (UGC) के दिशा-निर्देश कहते हैं कि मानद डॉक्टरेट पाने वाला व्यक्ति अपने नाम के आगे सीधे 'Dr.' नहीं लगा सकता. अगर वह लगाना चाहता है, तो उसे ब्रैकेट में (Honoris Causa) या (Hon.) लिखना अनिवार्य है.

इसी पर चुटकी लेते हुए सीएम योगी ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर रवि किशन डॉक्टर बनकर इलाज करने चले गए तो क्या होगा! इसके जरिए उन्होंने साफ किया कि यह प्रोफेशनल प्रैक्टिस के लिए नहीं है.

किसे और क्यों दी जाती है यह उपाधि?
इसके लिए कोई उम्र सीमा या न्यूनतम शिक्षा की जरूरत नहीं होती. सचिन तेंदुलकर, शाहरुख खान और अमिताभ बच्चन जैसे दिग्गजों को कई बार मानद उपाधियां मिल चुकी हैं. यूनिवर्सिटीज अपने संस्थान का कद बढ़ाने और महान व्यक्तित्वों को सम्मानित करने के लिए दीक्षांत समारोह में ये उपाधियां देती हैं.

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