WSJ की रिपोर्ट पर उठ रहे सवाल... भारत-चीन की तैयारियों को युद्ध की तरह क्यों दिखाया जा रहा?

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट पर विवाद हो रहा है. अमेरिकी अखबार ने भारत के हिमालयी सीमा ढांचे को 'चीन से युद्ध तैयारी' बताया है. विशेषज्ञ बोले- यह रक्षात्मक काम है, कमजोरियां दूर करने के लिए. LAC पर तनाव कम हो रहा, बातचीत जारी है. WSJ का लहजा युद्ध उकसाने वाला है. संतुलित नहीं है.

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हिमाचल प्रदेश में चीन सीमा के पास सड़क बनाती बीआरओ. (Photo: X/BRO) हिमाचल प्रदेश में चीन सीमा के पास सड़क बनाती बीआरओ. (Photo: X/BRO)

शिवानी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 26 दिसंबर 2025,
  • अपडेटेड 5:30 PM IST

अमेरिकी अखबार 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' (WSJ) की एक हालिया रिपोर्ट ने भारत-चीन सीमा पर चल रहे बुनियादी ढांचे के काम को 'संभावित युद्ध की तैयारी' के रूप में पेश किया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत हिमालय में सड़कें, सुरंगें और हवाई पट्टियां बनाने पर सैकड़ों मिलियन डॉलर खर्च कर रहा है, ताकि चीन के साथ भविष्य में होने वाले संभावित टकराव के लिए तैयार रहे. कई लोग इसे युद्ध उकसाने वाली रिपोर्ट बता रहे हैं.

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रिपोर्ट में क्या कहा गया? WSJ की रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • भारत हिमालय की सीमा पर तेजी से सड़कें, सुरंगें, लैंडिंग स्ट्रिप और सैन्य ठिकाने बना रहा है.
  • यह सब 2020 की गलवान झड़प के बाद शुरू हुआ, जब पता चला कि चीन की तुलना में भारत के सैनिक और सामान तेजी से नहीं पहुंच पाते.
  • रिपोर्ट का लहजा ऐसा है मानो भारत-चीन के बीच जल्द ही बड़ा सैन्य टकराव होने वाला है.

लेकिन हकीकत क्या है?

विशेषज्ञों और रक्षा जानकारों का कहना है कि भारत का यह काम पूरी तरह रक्षात्मक (डिफेंसिव) है. इसका मकसद...

  • ऊंचाई वाले दूर-दराज इलाकों में साल भर सैनिकों और सामान की पहुंच बनाए रखना.
  • पुरानी कमजोरियों को दूर करना, न कि चीन पर हमला करने की तैयारी.
  • अगर चीन कोई दुस्साहस करे तो उसकी कीमत बहुत ऊंची करना.

2020 के बाद भारत और चीन ने LAC पर कई जगहों से सैनिकों की वापसी (डिसएंगेजमेंट) की है. डेपसांग, डेमचोक जैसे विवादित इलाकों में समझौते हुए हैं. दोनों देशों के बीच राजनयिक बातचीत और मासिक मीटिंग जारी हैं. संबंधों को स्थिर करने की कोशिशें चल रही हैं.

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WSJ की रिपोर्ट क्यों विवादित?

  • कई लोगों का मानना है कि WSJ ने रिपोर्ट में सिर्फ एक पक्ष दिखाया है.
  • भारत के बुनियादी ढांचे को सिर्फ 'युद्ध तैयारी' के नजरिए से पेश किया है. 
  • शांति प्रयासों, बातचीत और तनाव कम होने की खबरों को नजरअंदाज किया.
  • इससे भारत-चीन के बीच जल्द युद्ध होने जैसी अफवाहें फैल सकती हैं.

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सीमा पर मजबूत ढांचा बनाना हर देश का हक है. यह न सिर्फ सैन्य जरूरतों के लिए, बल्कि स्थानीय लोगों की सुविधा और आर्थिक विकास के लिए भी जरूरी है. भारत का हिमालय में निर्माण कार्य लंबे समय से चल रहा है और यह राष्ट्रीय सुरक्षा का सामान्य हिस्सा है.

WSJ जैसी रिपोर्टें जब इसे सिर्फ युद्ध की तैयारी दिखाती हैं, तो यह संतुलित नहीं लगता. दोनों एशियाई दिग्गजों के बीच प्रतिस्पर्धा तो है, लेकिन राजनयिक रास्ते से समाधान की कोशिशें भी जारी हैं. ऐसी खबरें जो बेवजह डर फैलाएं, वे शांति प्रक्रिया में मदद नहीं करतीं.

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