क्या है SJ-100 एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट जो भारत और रूस मिलकर बनाएंगे, क्या रणनीतिक अहमियत है इसकी

जनवरी 2026 में Wings India एयर शो में HAL और रूस की UAC ने SJ-100 को भारत में बनाने का समझौता किया है. यह 95-103 सीटों वाला रीजनल जेट है. पहले 10-20 विमान रूस से लीज पर लाए जाएंगे, फिर भारत में लाइसेंस्ड प्रोडक्शन शुरू होगा. यह UDAN स्कीम के तहत क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाएगा. Make in India को मजबूत करेगा.

Advertisement
ये है रूस का सुखोई सुपरजेट 100 जो अब भारत में बनाया जाएगा. (Photo: Reuters) ये है रूस का सुखोई सुपरजेट 100 जो अब भारत में बनाया जाएगा. (Photo: Reuters)

शिवानी शर्मा / ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 30 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:54 AM IST

भारत की एयरोस्पेस इंडस्ट्री में बड़ा विकास हो रहा है. हैदराबाद में हुए  Wings India 2026 एयर शो के दौरान हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) ने एक महत्वपूर्ण समझौता किया. यह समझौता SJ-100 (सुखोई सुपरजेट-100) नाम के रीजनल पैसेंजर एयरक्राफ्ट को भारत में बनाने के लिए है.

SJ-100 क्या है?

SJ-100 एक छोटा-मध्यम दूरी का रीजनल जेट है, जो 95-103 यात्रियों को ले जा सकता है. यह दो इंजन वाला नैरो-बॉडी विमान है, जो छोटे शहरों और क्षेत्रीय हवाई अड्डों के बीच उड़ान भरने के लिए डिजाइन किया गया है. अब रूस ने इसे पूरी तरह इम्पोर्ट सब्स्टीट्यूट (विदेशी पार्ट्स से मुक्त) बना दिया है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: लेह एयर फोर्स स्टेशन में बना नया टैक्सी ट्रैक... सिविल उड़ानों को भी फायदा
  
अब इसमें इंजन (Aviadvigatel PD-8), एवियोनिक्स, ब्रेक, सॉफ्टवेयर आदि सब रूसी हैं. यह सैंक्शंस-प्रूफ (पश्चिमी प्रतिबंधों से प्रभावित नहीं) है. इसलिए रूस के लिए निर्यात में आसान है. यह विमान छोटी दूरी (शॉर्ट-हॉल) की उड़ानों के लिए बेहतरीन है, जैसे दिल्ली-लखनऊ, मुंबई-पुणे आदि.

भारत-रूस का प्रोजेक्ट कैसे काम करेगा?
  
अक्टूबर 2025 में पहले MoU साइन हुआ था. जनवरी 2026 में Wings India में फाइनल एग्रीमेंट साइन हुआ. HAL को लाइसेंस मिलेगा SJ-100 बनाने, बेचने, पार्ट्स बनाने और मेंटेनेंस करने का.  

  • HAL की मदद करेगा UAC: प्रोडक्शन फैसिलिटी तैयार करने, डिजाइन, कंसल्टिंग और स्पेशलिस्ट भेजकर. HAL SJ-100 को भारत में सर्टिफाइड करवाने में मदद करेगा.  
  • शुरुआत में: 10-20 SJ-100 रूस से लीज पर लाकर भारतीय एयरलाइंस को दिए जाएंगे.  
  • बाद में: भारत में असेंबली शुरू होगी (3 साल में SKD - सेमी नॉकडाउन किट से). फिर फुल प्रोडक्शन.  
  • लक्ष्य: भारत में लोकल मैन्युफैक्चरिंग. एक्सपोर्ट भी संभव.

यह भी पढ़ें: बारामती हादसे के बीच HAL ने VIP ऑपरेशंस के लिए Dhruv NG हेलिकॉप्टर पर दिया जोर

Advertisement

रणनीतिक महत्व क्या है?  

  • मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत: भारत पहली बार बड़े पैमाने पर सिविलियन पैसेंजर जेट बनाने जा रहा है. HAL अब सिर्फ डिफेंस नहीं, बल्कि सिविल एविएशन में भी एंट्री कर रहा है.  
  • क्षेत्रीय कनेक्टिविटी: UDAN स्कीम के तहत छोटे शहरों को जोड़ने के लिए सस्ते और भरोसेमंद विमान. भारत को आने वाले सालों में 200+ ऐसे रीजनल जेट की जरूरत है.  
  • इंडो-रूसी पार्टनरशिप: 30 साल पुरानी दोस्ती (Su-30MKI जैसे) अब सिविल एविएशन में. रूस को भारत जैसे बड़ा मार्केट मिलता है. भारत को टेक्नोलॉजी और प्रोडक्शन क्षमता मिल जाएगी.  
  • सैंक्शंस से बचाव: SJ-100 पश्चिमी पार्ट्स पर निर्भर नहीं, इसलिए भारत के लिए सुरक्षित विकल्प है. अमेरिका/यूरोप से टैरिफ या रिस्ट्रिक्शन का खतरा नहीं है.   
  • एक्सपोर्ट पोटेंशियल: भारत से बनाकर एशिया-अफ्रीका में एक्सपोर्ट कर सकते हैं.  
  • HAL का लक्ष्य: 10 साल में सिविल एविएशन से 25% रेवेन्यू.

अन्य बड़े डेवलपमेंट्स

इसके साथ ही भारत में कई ग्लोबल कंपनियां आ रही हैं...  

  • Embraer + Adani (सिविल प्लेन)  
  • Embraer + Mahindra (C-390)  
  • Airbus + Tata (C-295 चल रहा है, A-400M पर बात)  
  • Lockheed Martin + भारतीय फर्म (C-130J पर MoU)

यह सब दिखाता है कि भारत अब सिर्फ खरीदार नहीं, बल्कि एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग हब बन रहा है. SJ-100 इसकी शुरुआत है – भारत की सिविल एविएशन इंडस्ट्री के लिए गेम-चेंजर.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement