कोरेगांव हिंसा: दिल्ली से रोना विल्सन गिरफ्तार, 2 दिन की ट्रांजिट रिमांड

पुणे के कोरेगांव हिंसा के संबंध में दिल्ली से एक आरोपी रोना जैकब विल्सन को गिरफ्तार किया गया है. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और पुणे पुलिस के साथ ज्वाइंट ऑपेरशन में मुनीरिका स्थित डीडीए फ्लैट से विल्सन को गिरफ्तार किया गया है.

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रोना जैकब विल्सन रोना जैकब विल्सन

मुकेश कुमार / चिराग गोठी

  • नई दिल्ली,
  • 06 जून 2018,
  • अपडेटेड 12:38 PM IST

पुणे के कोरेगांव हिंसा के संबंध में दिल्ली से एक आरोपी रोना जैकब विल्सन को गिरफ्तार किया गया है. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और पुणे पुलिस के साथ ज्वाइंट ऑपेरशन में मुनीरिका स्थित डीडीए फ्लैट से विल्सन को गिरफ्तार किया गया है. इसके साथ ही दिल्ली स्थित शोमा सेन के घर पर तलाशी ली जा रही है.

इससे पहले पुणे पुलिस ने मुंबई से सुधीर ढवले और नागपुर से एडवोकेट सुरेंद्र गडलिंग को गिरफ्तार किया. इस तरह इस मामले में तीन गिरफ्तारियां हो गई हैं. गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने रोना जैकब विल्सन को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया. वहां से उसे दो दिन की ट्रांजिट रिमांड पर भेज दिया गया है. उसे पुणे कोर्ट में पेश किया जाएगा.

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31 दिसंबर 2017 को पुणे में एलगार परिषद का आयोजन किया गया था. इस परिषद के दूसरे दिन यानी 1 जनवरी 2018 को कोरेगांव भीमा में हिंसा हुई थी. हिंसा के लिए एलगार परिषद के भी जिम्मेदार होने का आरोप लगाया जा रहा है. इसमें नेताओं पर भड़काऊं भाषण देने का आरोप लगा है. जिग्नेश मेवानी और उमर खालिद पर भी केस दर्ज हुआ है.

बाते चलें कि महाराष्ट्र के पुणे में 200 साल पुराने युद्ध भीमा-कोरेगांव की बरसी को लेकर जातीय संघर्ष छिड़ गया था. इसकी आग पूरे महाराष्ट्र में फैल गई थी. कई शहरों में हिंसक घटनाएं भी हुई थीं. इस मामले में पुलिस ने संभाजी भिड़े और मिलिंद एकबोटे के खिलाफ एट्रासिटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था. इसके बाद से मिलिंद एकबोटे फरार हो गए थे.

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622 मामले किए गए थे दर्ज

महाराष्ट्र में हिंसा के दौरान राज्य भर में 622 मामले दर्ज किए गए थे. इसके अलावा 350 लोगों के खिलाफ गंभीर मामले और 17 के खिलाफ एट्रोसिटी के मामले दर्ज हैं. इसके आधार पर 1199 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था. जबकि 2254 लोगों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई. इसमें से 22 लोगों के अलावा सभी को जमानत मिल चुकी है.

क्या हुआ था भीमा कोरेगांव में...

पुणे में भीमा-कोरेगांव युद्ध की 200वीं बरसी के दौरान हिंसा भड़कने से पूरे महाराष्ट्र में तनाव फैल गया था. इसके बाद महाराष्ट्र में दलित संगठनों ने बंद का ऐलान किया था. उस वक्त बताया गया कि हिंसा भड़कने की असली वजह दलित गणपति महार का समाधि स्थल था, जिसे कथित तौर पर से जुड़े लोगों ने 29 दिसंबर को क्षतिग्रस्त कर दिया था.

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