श्रीनगर में रची गई थी लाल किला कार ब्लास्ट की साजिश, NIA की चार्जशीट में कई अहम खुलासे

NIA ने रेड फोर्ट क्षेत्र कार बम विस्फोट मामले में 7500 पेज की चार्जशीट दाखिल की है. AQIS और AGuH से जुड़े 10 आरोपियों पर देश में शरिया कानून लागू करने की साजिश रचने और ड्रोन IED हमलों की तैयारी के आरोप लगे हैं. पढ़ें पूरी खबर.

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इस मामलों में 10 लोगों को आरोपी बनाया गया है (फोटो-ITG) इस मामलों में 10 लोगों को आरोपी बनाया गया है (फोटो-ITG)

जितेंद्र बहादुर सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 14 मई 2026,
  • अपडेटेड 7:32 PM IST

दिल्ली में लाल किला के पास पिछले साल नवंबर में हुए बम विस्फोट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ा खुलासा किया है. एजेंसी ने इस केस में 7,500 पेज की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें 10 आरोपियों को नामजद किया गया है. यह चार्जशीट नई दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश की गई. इस विस्फोट ने राजधानी को दहला दिया था और इसमें 11 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे.

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यह धमाका 10 नवंबर 2025 को हुआ था. जांच एजेंसियों के मुताबिक यह एक हाई इंटेंसिटी VBIED यानी Vehicle-Borne Improvised Explosive Device हमला था. विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि आसपास के इलाके में भारी तबाही मच गई और कई संपत्तियों को नुकसान पहुंचा था. शुरुआती जांच के बाद दिल्ली पुलिस से यह मामला NIA को सौंप दिया गया था.

NIA की जांच में सामने आया कि सभी आरोपी आतंकी संगठन अंसार ग़ज़वत-उल-हिंद (AGuH) से जुड़े हुए थे. यह संगठन अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट यानी AQIS का हिस्सा माना जाता है. गृह मंत्रालय ने AQIS और उससे जुड़े सभी संगठनों को जून 2018 में आतंकी संगठन घोषित किया था. एजेंसी का दावा है कि आरोपियों ने कट्टर जिहादी विचारधारा से प्रभावित होकर इस हमले को अंजाम दिया.

चार्जशीट में मुख्य आरोपी डॉ. उमेर उन नबी का नाम शामिल है, जिसकी इस मामले में मौत हो चुकी है. वह हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी में मेडिसिन विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर रह चुका था. NIA ने उसके खिलाफ आरोपों को खत्म करने का प्रस्ताव रखा है, क्योंकि वह मर चुका है. DNA फिंगरप्रिंटिंग के जरिए उसकी पहचान की पुष्टि की गई.

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इस मामले में जिन अन्य आरोपियों को नामजद किया गया है, उनमें आमिर राशिद मीर, जासिर बिलाल वानी, डॉ. मुजम्मिल शकील, डॉ. आदिल अहमद राथर, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद वागे, सोयाब, डॉ. बिलाल नसीर मल्ला और यासिर अहमद डार शामिल हैं. NIA का कहना है कि इन सभी ने संगठित तरीके से आतंकी साजिश को आगे बढ़ाया. इनमें कुछ आरोपी मेडिकल प्रोफेशन से जुड़े थे और कट्टरपंथ की ओर मुड़ गए थे.

जांच में यह भी सामने आया कि साल 2022 में श्रीनगर में एक गुप्त बैठक हुई थी. इसी बैठक में AGuH को दोबारा AGuH Interim नाम से संगठित किया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले ये आरोपी तुर्किये के रास्ते अफगानिस्तान जाने की कोशिश कर चुके थे, लेकिन उनका तथाकथित हिजरत मिशन असफल रहा था. इसके बाद उन्होंने भारत में आतंकी नेटवर्क मजबूत करने की योजना बनाई.

NIA के अनुसार आरोपियों ने ऑपरेशन हेवनली हिंद नाम से एक साजिश शुरू की थी. इस ऑपरेशन का मकसद लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई भारतीय सरकार को गिराना और देश में शरिया कानून लागू करना था. एजेंसी का दावा है कि आरोपियों ने युवाओं को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित करने और नए सदस्यों की भर्ती करने का अभियान भी चलाया.

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चार्जशीट में कहा गया है कि आरोपियों ने बड़े पैमाने पर हथियार और विस्फोटक जमा किए. उन्होंने बाजार में आसानी से मिलने वाले रसायनों की मदद से विस्फोटक तैयार किए. जांच में पता चला कि उन्होंने कई तरह के IED बनाए और उनका परीक्षण भी किया. रेड फोर्ट धमाके में इस्तेमाल किया गया विस्फोटक TATP यानी ट्राईएसीटोन ट्राईपरॉक्साइड था, जिसे आरोपियों ने गुप्त रूप से तैयार किया था.

NIA की जांच के दौरान फॉरेंसिक और वैज्ञानिक तकनीकों का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया गया. घटनास्थल से मिले सबूतों के अलावा फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी और जम्मू-कश्मीर के कई स्थानों से भी सामग्री जुटाई गई. इन सबूतों की फॉरेंसिक जांच, वॉइस एनालिसिस और तकनीकी परीक्षण किए गए. एजेंसी का कहना है कि इन्हीं सबूतों के आधार पर पूरे मॉड्यूल का खुलासा हुआ.

जांच एजेंसी ने बताया कि आरोपियों ने प्रतिबंधित हथियारों का भी इंतजाम किया था. उनके पास AK-47 राइफल, क्रिंकोव राइफल और देसी पिस्तौल के साथ जिंदा कारतूस मिले. NIA के मुताबिक यह मॉड्यूल जम्मू-कश्मीर समेत देश के कई हिस्सों में बड़े आतंकी हमलों की तैयारी कर रहा था. इसके लिए हथियारों और विस्फोटकों का गुप्त भंडारण किया गया था.

चार्जशीट में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी ड्रोन और रॉकेट आधारित IED हमलों पर प्रयोग कर रहे थे. उनका मकसद सुरक्षा प्रतिष्ठानों और संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाना था. जांच में सामने आया कि इसके लिए आरोपियों ने विशेष लैब उपकरण भी खरीदे थे. इनमें MMO एनोड, इलेक्ट्रिक सर्किट और स्विच जैसे तकनीकी उपकरण शामिल थे.

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NIA के अनुसार इन उपकरणों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से खरीदा गया. आरोपियों ने विस्फोटक तैयार करने के लिए अलग-अलग जगहों पर प्रयोग किए और मिश्रण को और अधिक घातक बनाने की कोशिश की. एजेंसी का कहना है कि यह आतंकी मॉड्यूल देश के दूसरे हिस्सों में भी अपने नेटवर्क का विस्तार करना चाहता था, लेकिन समय रहते कार्रवाई कर दी गई.

इस केस की जांच जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली NCR तक फैली हुई थी. चार्जशीट में 588 गवाहों के बयान, 395 से ज्यादा दस्तावेज और 200 से अधिक जब्त सामग्री को सबूत के तौर पर शामिल किया गया है. NIA का कहना है कि यह जांच अब तक की सबसे विस्तृत आतंकी जांचों में से एक है.

फिलहाल इस मामले में कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. हालांकि NIA अब भी उन फरार आरोपियों की तलाश कर रही है, जिनकी भूमिका जांच के दौरान सामने आई है. एजेंसी का कहना है कि देशभर में फैले इस आतंकी नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के लिए आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी.

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