मुंबई में 50 लाख जमाकर्ताओं को लगाया 4,500 करोड़ का चूना, ED ने कई ठिकानों पर की छापेमारी

ED ने एक बयान में कहा कि 28 फरवरी को पैनकार्ड क्लब्स लिमिटेड (पीसीएल), इसके पूर्व निदेशकों और अन्य के खिलाफ छापेमारी की गई. यह सेबी अधिनियम का उल्लंघन करते हुए सामूहिक निवेश योजना (CIS) के माध्यम से कथित धोखाधड़ी किए जाने का मामला है.

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ED ने मुंबई में कंपनी के ठिकानों पर छापेमारी की ED ने मुंबई में कंपनी के ठिकानों पर छापेमारी की

aajtak.in

  • मुंबई,
  • 03 मार्च 2025,
  • अपडेटेड 10:45 PM IST

मुंबई में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक कंपनी और उसके प्रमोटरों पर 4,500 करोड़ रुपये के निवेश धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया है. कंपनी और उसके प्रमोटरों ने लगभग 50 लाख जमाकर्ताओं के साथ धोखाधड़ी करने का इल्जाम है.

संघीय एजेंसी ED ने एक बयान में कहा कि 28 फरवरी को पैनकार्ड क्लब्स लिमिटेड (पीसीएल), इसके पूर्व निदेशकों और अन्य के खिलाफ छापेमारी की गई. यह सेबी अधिनियम का उल्लंघन करते हुए सामूहिक निवेश योजना (CIS) के माध्यम से कथित धोखाधड़ी किए जाने का मामला है, जहां 50 लाख से अधिक निवेशकों को कथित तौर पर 4,500 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का शिकार बनाया गया.

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मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने महाराष्ट्र जमाकर्ताओं के हितों का संरक्षण (वित्तीय प्रतिष्ठानों में) अधिनियम, 1999 के तहत पैनकार्ड क्लब्स लिमिटेड और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था और ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज करने के लिए इसका संज्ञान लिया.

ईडी ने कहा कि पैनकार्ड क्लब्स लिमिटेड और इसके निदेशकों ने तीन से नौ साल की अवधि के लिए अलग-अलग निवेश योजनाएं शुरू कीं, जिसमें होटल छूट, दुर्घटना बीमा और जनता द्वारा जमा की गई राशि पर उच्च दर रिटर्न सहित अन्य लाभ का वादा किया गया, जबकि सेबी और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मौजूदा मानदंडों की अनदेखी की गई.

ED ने कहा कि विदेशी संपत्तियों के विवरण वाले अपराधी दस्तावेज जब्त किए गए, जो वर्तमान में मुख्य आरोपी और कंपनी के पूर्व निदेशक दिवंगत सुधीर मोरवेकर के परिवार के सदस्यों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं.

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एजेंसी ने बताया कि छानबीन में पता चला कि इन संपत्तियों से लीज रेंटल आय हो रही है. छापों के दौरान कुछ दस्तावेजी साक्ष्य भी मिले, जिनसे पता चला है कि सह-आरोपियों द्वारा, प्रथम दृष्टया अपराध की आय का हिस्सा प्रतीत होने वाली संपत्तियों को बेचने का प्रयास किया गया था.

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