मायानगरी मुंबई… जहां कभी अंडरवर्ल्ड के सबसे बड़े डॉन दाऊद इब्राहिम का सिक्का चलता था. फिल्म इंडस्ट्री में उसका खौफ था. बॉलीवुड के लोग डी कंपनी नाम से कांपने लगते थे. वो दौर वो दशक गुजर चुका था. लेकिन अब एक नया नाम सुर्खियों में है- गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई. फर्क बस इतना है कि दाऊद दुबई-कराची से ऑपरेट करता था, जबकि लॉरेंस सरकारी अभिरक्षा के बीच जेल में बैठकर भी धमकियों और आतंक का नेटवर्क चला रहा है. ताजा मामला रणवीर सिंह को मिले वॉट्सऐप वॉइस नोट का है. उन्हें करोड़ों की फिरौती, न देने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी दी गई. अब मुंबई पुलिस हाई अलर्ट पर. मगर ये इस तरह का कोई पहला मामला नहीं है.
रणवीर सिंह को धमकी
फिल्म ‘धुरंधर’ से बॉक्स ऑफिस पर छाए रणवीर सिंह को वॉट्सऐप के जरिए एक वॉइस मैसेज मिला. मैसेज में करोड़ों रुपये की मांग की गई. रकम न देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई. आवाज भेजने वाले ने खुद को बड़े आपराधिक नेटवर्क से जुड़ा बताया. शुरुआती जांच में यह धमकी लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ी बताई जा रही है.
बांद्रा में कड़ी सुरक्षा
रणवीर सिंह ने तुरंत मुंबई पुलिस से शिकायत की. इसके बाद उनके बांद्रा स्थित घर की सुरक्षा बढ़ा दी गई. सोसाइटी के बाहर सख्त पहरा है. हर आने-जाने वाले की निगरानी की जा रही है. रणवीर अपनी पत्नी दीपिका पादुकोण के साथ यहीं रहते हैं. पुलिस ने खतरे को हल्के में नहीं लिया है.
साइबर सेल और फॉरेंसिक जांच
मुंबई पुलिस की साइबर सेल और क्राइम ब्रांच मिलकर वॉट्सऐप नंबर और वॉइस सैंपल की जांच कर रही है. वॉइस नोट को फॉरेंसिक लैब भेजा गया है. आईपी एड्रेस, वर्चुअल नंबर और संभावित लोकेशन की पड़ताल जारी है. पुलिस यह भी जांच रही है कि धमकी किसी असली गैंग सदस्य ने दी या किसी ने नाम का इस्तेमाल किया.
11 दिन पहले रोहित शेट्टी को धमकी
रणवीर से पहले फिल्म मेकर रोहित शेट्टी को भी धमकी मिली थी. सूत्रों के मुताबिक दोनों मामलों में लॉरेंस गैंग का नाम सामने आया है. मुंबई पुलिस इन दोनों घटनाओं को जोड़कर देख रही है. क्या यह फिल्म इंडस्ट्री पर दबाव बनाने की सुनियोजित कोशिश है?
रीयल लाइफ खतरा
रणवीर सिंह इन दिनों अपनी फिल्म ‘धुरंधर’ को लेकर चर्चा में हैं. फिल्म में वे एक अंडरकवर एजेंट की भूमिका में पाकिस्तान के लाहौर के ल्यारी इलाके तक घुसते दिखाए गए हैं. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया है. अब दूसरे पार्ट की तैयारी है. लेकिन रील का ‘धुरंधर’ अब रीयल लाइफ में धमकियों से घिरा है.
मुंबई में नया गैंगवार?
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह लॉरेंस गैंग बनाम पुराने डी-कंपनी नेटवर्क के बीच वर्चस्व की लड़ाई है? हालांकि दाऊद इब्राहिम वर्षों से भारत से बाहर है, लेकिन जांच एजेंसियां मानती रही हैं कि उसका नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हुआ. ऐसे में नए गैंग्स के उभार को पुलिस गंभीरता से देख रही है.
1980 - मिथुन चक्रवर्ती को धमकियां
दाऊद इब्राहिम को अभिनेत्री मंदाकिनी से लगाव था. उनकी साथ वाली तस्वीरें भी चर्चित रहीं थीं. मिथुन और मंदाकिनी के अफेयर की अफवाहें भी उन दिनों जोरों पर थीं. दाऊद को ये बात पसंद नहीं आई. दाऊद के आदमियों ने मिथुन को बार-बार फोन पर मारने की धमकियां दीं थी. इस मामले में मिथुन ने अपने दोस्त संजय दत्त से मदद मांगी थी. संजय ने कनेक्शंस के जरिए मामले को सुलझाया और मिथुन को सलाह दी कि मंदाकिनी के साथ प्रोफेशनल काम बंद कर दें. उसके बाद दोनों ने साथ फिल्म नहीं की.
1993 के बाद का दौर
साल 1993 के मुंबई बम धमाकों के बाद दाऊद इब्राहिम का नाम राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ गया. इसी दौर में आरोप लगे कि डी-कंपनी ने बॉलीवुड में फाइनेंसिंग, स्टेज शो और सितारों की डेट्स में दखल देना शुरू किया. कई सितारों को दुबई शो में बुलाने और दबाव बनाने की चर्चाएं सामने आईं.
1997 – गुलशन कुमार हत्याकांड
गुलशन कुमार ऑडियो वीडियो कंपनी टी-सीरीज़ के संस्थापक थे. 12 अगस्त 1997 को गुलशन कुमार की हत्या ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था. इस हाई प्रोफाइल हत्याकांड की जांच में अबू सलेम और डी-कंपनी का नाम आया था. आरोप था कि वसूली की मांग को ठुकराने की कीमत उन्हें जान देकर चुकानी पड़ी थी. यह बॉलीवुड पर अंडरवर्ल्ड के सीधे हमले का सबसे बड़ा उदाहरण था.
1998 – राजीव राय पर हमला
उस साल फिल्म ‘गुप्त’ के निर्देशक राजीव राय पर जानलेवा हमला हुआ था. सफल फिल्म के बाद कथित वसूली की कोशिशों की चर्चा हुई. हमले के बाद वे विदेश चले गए थे. इंडस्ट्री में डर का माहौल और गहरा गया था.
2000 – राकेश रोशन गोलीकांड
फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ की सफलता के बाद राकेश रोशन पर गोली चलाई गई थी. हमलावरों ने उनके ऑफिस के बाहर उन्हें गोली मारी थी. राकेश रोशन बांह में गोली लगने से घायल हो गए थे. लेकिन उनकी जान बच गई थी. इस कांड की जांच में अबू सलेम गैंग का नाम सामने आया था. आरोप था कि हिट फिल्म के बाद “कट” मांगा गया था. यह संदेश साफ था कि सफलता भी खतरे से खाली नहीं है.
‘चोरी चोरी चुपके चुपके’ केस
साल 2000–2001 में इस फिल्म की फाइनेंसिंग पर सवाल उठे थे. निर्माता नज़ीम रिज़वी पर अंडरवर्ल्ड कनेक्शन के आरोप लगे थे. प्रीति जिंटा ने अदालत में वसूली कॉल की गवाही दी थी. यह केस बताता है कि डर सिर्फ बंदूक से नहीं, फोन कॉल से भी पैदा किया जाता था.
2001 - शाहरुख खान को धमकियां
साल 2001–02 के दौरान बॉलीवुड बादशाह शाहरुख खान को भी धमकीभरे कॉल्स की खबरें आईं थीं. इसके बाद उनकी सुरक्षा बढ़ाई गई थी. यहां सीधे हमले का मामला नहीं था, लेकिन यह संकेत था कि सुपरस्टार भी अछूते नहीं थे.
2003 - भारत शाह केस
फिल्म फाइनेंसर भारत शाह को साल 2003 में गिरफ्तार किया गया था. उनकी गिरफ्तारी ने इंडस्ट्री के फाइनेंसिंग मॉडल पर सवाल खड़े किए थे. शाह के छोटा शकील से कथित संबंधों की जांच हुई थी. इस मामले में मकोका के तहत केस दर्ज हुआ था. यह दौर बताता है कि पैसा, पावर और सिनेमा का रिश्ता कितना उलझा हुआ था.
तब का डर, अब डिजिटल धमकी
90 के दशक में धमकी लैंडलाइन पर आती थी. आज वॉट्सऐप वॉइस नोट आते हैं. तब दुबई कनेक्शन की चर्चा होती थी. आज जेल में बैठा गैंगस्टर सोशल मीडिया और वर्चुअल नंबर से डर फैला रहा है. धमकी का तरीका बदल गया है, लेकिन डर की स्क्रिप्ट वैसी ही लगती है.
खौफ के साए में बॉलीवुड
फिलहाल पुलिस जांच जारी है. अभी यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि मुंबई में दाऊद दौर जैसी गैंगवार शुरू हो गई है. लेकिन रणवीर सिंह और रोहित शेट्टी को मिली धमकियों ने फिल्म इंडस्ट्री को 90 के दशक की याद जरूर दिला दी है. सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ फिरौती का मामला है या वर्चस्व की नई लड़ाई. मुंबई की फिल्मी दुनिया एक बार फिर चौकन्नी हो गई है.
परवेज़ सागर