'केस उठाओ वरना अंजाम बुरा होगा’, CBI जांच के बीच मृत NEET छात्रा के परिवार को दो बार मिली धमकी, सुरक्षा बढ़ाई गई

जहानाबाद की 17 वर्षीय NEET छात्रा की संदिग्ध मौत मामले में नया मोड़ आ गया. अब मृत छात्रा के परिवार को एक बार नहीं, बल्कि दो बार धमकी भरे पत्र भेजे गए हैं. हैरानी की बात ये है कि ये सब CBI जांच के दौरान हुआ है. बीच पुलिस की शुरुआती लापरवाही भी सामने आई है. पढ़ें पूरी कहानी.

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NEET छात्रा की मौत मामले में नया मोड़ आ गया (फोटो-ITG) NEET छात्रा की मौत मामले में नया मोड़ आ गया (फोटो-ITG)

रोहित कुमार सिंह

  • पटना,
  • 18 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:52 PM IST

Bihar NEET Girl Suspicious Death: जहानाबाद की 17 साल की NEET छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि इस मामले में एक नया मोड़ आ गया. मृत छात्रा के घर के बाहर एक नहीं, बल्कि दो बार धमकी भरा पत्र फेंका गया. पत्र की भाषा छोटी जरूर थी, लेकिन उसका संदेश बेहद डरावना था. लेटर में लिखा है- “बेटी गई. अब बेटे को भी खो दोगे. केस उठाओ वरना अंजाम बुरा होगा.” इस एक लाइन ने पूरे परिवार की रातों की नींद छीन ली है. 

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दरअसल, अब यह मामला सिर्फ एक मौत का नहीं, बल्कि किसी बड़े दबाव या नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है. सवाल यह है कि आखिर कौन है जो इस मामले की जांच से इतना असहज हो रहा है?

धमकी का असर और बढ़ता डर
धमकी मिलने के बाद परिवार के भीतर गुस्सा और भय दोनों साफ दिखाई दे रहे हैं. उनका कहना है कि कोई लगातार उन पर नजर रख रहा है. धमकी का मकसद साफ है, केस को कमजोर करना और परिवार को चुप कराना. स्थानीय प्रशासन ने परिवार की सुरक्षा बढ़ा दी है. कार्तिकेय शर्मा ने कहा है कि परिवार की सुरक्षा पुलिस देख रही है और जरूरत पड़ने पर जहानाबाद पुलिस भी सुरक्षा देगी. लेकिन परिवार का कहना है कि डर अब सिर्फ घर के बाहर नहीं, मन के अंदर बस गया है.

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6 जनवरी 2026
यह पूरी कहानी 6 जनवरी 2026 से शुरू होती है. जहानाबाद की 17 वर्षीय छात्रा, जो NEET की तैयारी कर रही थी, शंभू गर्ल्स हॉस्टल में संदिग्ध हालत में बेहोश मिली. उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां पांच दिनों तक जिंदगी और मौत की जंग चली. लेकिन 11 जनवरी को उसने दम तोड़ दिया. एक होनहार छात्रा का अचानक यूं चले जाना पूरे इलाके के लिए झटका था.

ओवरडोज़ या कुछ और?
इस मामले की प्रारंभिक जांच में पुलिस ने इसे 'ओवरडोज़ के कारण आत्महत्या' बताया था. लेकिन यही निष्कर्ष परिवार को सबसे ज्यादा चुभा. उनका कहना था कि बेटी आत्महत्या कर ही नहीं सकती. परिवार ने आरोप लगाया कि शरीर पर चोटों के निशान थे, जो आत्महत्या की कहानी से मेल नहीं खाते. यहीं से शक की पहली चिंगारी भड़की.

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट: कहानी में नया मोड़
जब इस मामले में छात्रा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामने आई, तो पुलिस की थ्योरी को झटका लगा. रिपोर्ट में गर्दन और हाथों पर फिंगर मार्क्स का जिक्र था. शरीर पर संघर्ष के संकेत पाए गए. पीठ और पैरों पर चोट जैसी आकृतियां दर्ज थीं. सबसे अहम टिप्पणी ये थी कि यौन उत्पीड़न की संभावना को नकारा नहीं जा सकता. ये निष्कर्ष पुलिस की शुरुआती कहानी से बिल्कुल अलग थे. मामला अब गंभीर अपराध की ओर इशारा कर रहा था.

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सड़कों तक न्याय की मांग
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के खुलासे के बाद परिवार ने अपनी आवाज बुलंद की. सोशल मीडिया पर न्याय की मांग तेज हो गई. स्थानीय लोग भी सड़कों पर उतर आए. परिवार का आरोप था कि पहले ही दिन से केस को गलत दिशा में मोड़ा गया. उनका कहना था कि अगर सही तरीके से जांच होती, तो सच सामने आ सकता था.

घटनास्थल सील करने में 10 घंटे की देरी
पुलिस की जांच में सामने आया कि घटनास्थल को सील करने में करीब 10 घंटे की देरी हुई. इस देरी ने कई संभावित साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए. हॉस्टल स्टाफ ने कमरे की सफाई भी कराई, जिससे सबूत प्रभावित हो सकते थे. CCTV फुटेज की जब्ती भी देर से हुई. डिजिटल डेटा की सुरक्षा को लेकर भी लापरवाही के आरोप लगे.

शिकायत दर्ज करने में देरी
परिवार का आरोप है कि उनकी लिखित शिकायत दर्ज करने में भी देरी की गई. उन्हें टालने की कोशिश की गई. इन सभी बिंदुओं ने जांच पर सवाल खड़े कर दिए. बाद में समीक्षा के बाद बिहार पुलिस ने दो पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया. यह परिवार के लिए पहला संकेत था कि शायद जांच अब सही दिशा में जाएगी.

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SIT की जांच और बढ़ता विवाद
दबाव बढ़ने के बाद राज्य सरकार ने SIT गठित की. टीम ने गांव जाकर पूछताछ की, हॉस्टल की दोबारा जांच की और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया. लेकिन परिवार SIT की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हुआ. रिपोर्ट आत्महत्या की ओर झुकती दिखाई दी. हालांकि संघर्ष के निशानों और हॉस्टल की भूमिका पर साफ नतीजा सामने नहीं आए.

31 जनवरी: CBI की एंट्री
लगातार विवाद के बीच 31 जनवरी को मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दिया गया. CBI के आते ही जांच का दायरा व्यापक हो गया. यह संकेत था कि मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से लिया जा रहा है.

CBI के शुरुआती कदम
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने छात्रा के भाई का मोबाइल जब्त किया. हॉस्टल वार्डन और स्टाफ से क्रॉस-इंटरोगेशन शुरू हुआ. फोरेंसिक रिपोर्ट की स्वतंत्र समीक्षा की गई. डिजिटल हिस्ट्री की डीप रिकवरी की जा रही है. शुरुआती जांच टीम से भी पूछताछ हुई, जिसमें सब इंस्पेक्टर रीना कुमारी से तीन घंटे लंबी पूछताछ शामिल है.

जांच के चार संभावित एंगल
CBI इस मामले में चार एंगल से छानबीन कर रही है. हत्या, आत्महत्या, उत्पीड़न और सबूत मिटाने की कोशिश. अभी तक इस दिशा में कोई सार्वजनिक निष्कर्ष जारी नहीं किया गया है. कई गवाहों के बयानों में विरोधाभास सामने आए हैं. टीम हर कंट्राडिक्शन को बारीकी से परख रही है.

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धमकीभरे पत्र की फोरेंसिक जांच
परिवार को मिले पत्र को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है. कागज, स्याही, लिखावट और हैंडलिंग सबकी जांच होगी. यह पता लगाने की कोशिश है कि पत्र स्थानीय स्तर पर लिखा गया या किसी संगठित नेटवर्क का हिस्सा है. धमकी इस बात का संकेत है कि केस में किसी का बहुत कुछ दांव पर लगा है.

संभावित नेटवर्क या गैंग?
कोई स्थानीय व्यक्ति, हॉस्टल प्रबंधन से जुड़े लोग, शुरुआती जांच से लाभ पाने वाले या कोई समूह... इस मामले में संभावनाएं कई हैं. धमकी का मकसद साफ है- परिवार को डराना और केस उठाने के लिए मजबूर करना. लेकिन परिवार ने साफ कहा है कि वे पीछे नहीं हटेंगे.

अनसुलझा रहस्य
इस मामले में अब भी कई सवाल हैं, जिनके जवाब मिलना बाकी है. मसलन- मौत का असली कारण क्या था? शुरुआती जांच में इतनी चूक क्यों हुई? परिवार को धमकी कौन दे रहा है? इस केस की जांच तेजी से की जा रही है. CBI हर एंगल पर समानांतर जांच कर रही है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी हवा में तैर रहा है कि क्या यह आत्महत्या थी, हादसा था या फिर किसी बड़े अपराध की साजिश? हर कोई इन सवालों के जवाब जानना चाहता है.

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