वो दिल्ली की ठंडी सुबह थी, लेकिन पुलिस मुख्यालय के अंदर माहौल गर्म था. स्पेशल सेल के अफसरों के चेहरे पर तनाव साफ दिखाई दे रहा था. एक बड़ा ऑपरेशन अपने अंतिम चरण में था. स्क्रीन पर चल रहे डेटा, लोकेशन और चैट्स एक खतरनाक साजिश की कहानी बयां कर रहे थे. ये सिर्फ एक अपराध नहीं था, बल्कि देश की सुरक्षा से जुड़ा मामला बन चुका था. कई दिनों की निगरानी के बाद पुलिस को एक अहम सुराग मिला था. यह सुराग सीधे पाकिस्तान से जुड़ रहा था. एक ऐसा नेटवर्क, जो सोशल मीडिया के जरिए भारत में अपनी जड़ें फैला रहा था. और अब वक्त था इस जाल को तोड़ने का.
कुछ ही घंटों में स्पेशल सेल की टीम ने एक युवक को दबोच लिया. यह गिरफ्तारी किसी आम अपराधी की नहीं थी. आरोपी का नाम हरमनदीप सिंह उर्फ हरमन था, जिसकी उम्र महज 18 साल थी. लेकिन उसके मोबाइल में छिपे राज उसकी उम्र से कहीं ज्यादा खतरनाक थे. रामपुर के छोटे से गांव मटकहेड़ा का रहने वाला हरमन, अब एक अंतरराष्ट्रीय साजिश का हिस्सा बन चुका था. पुलिस को उसके फोन से पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के साथ चैट, फोटो और वीडियो मिले. हर मैसेज एक नए खुलासे की ओर इशारा कर रहा था.
जांच में सामने आया कि हरमन सीधे पाकिस्तान में बैठे गैंगस्टर-टेररिस्ट शाहजाद भट्टी के संपर्क में था. भट्टी, जो पहले एक गैंगस्टर था, अब आतंक के रास्ते पर चल पड़ा था. उसके इशारों पर भारत में कई गतिविधियां चलाई जा रही थीं. हरमन उसी नेटवर्क का एक छोटा लेकिन अहम हिस्सा था. वह सिर्फ मैसेज नहीं लेता था, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारने का काम भी करता था.
हरमन के पास से बरामद काले रंग की स्प्रे पेंट की बोतल ने जांच को और गहरा कर दिया. इसी स्प्रे से उसने पंजाब के होशियारपुर के तलवाड़ा इलाके में तीन जगह ‘TTH’ लिखा था. ये कोई साधारण लिखावट नहीं थी, बल्कि एक संदेश था, डर फैलाने का संदेश. खास बात यह थी कि हाल ही में पंजाब में दो पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद भी तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान का नाम सामने आया था.
पुलिस को हरमन के मोबाइल में उन ग्राफिटी के वीडियो भी मिले, जो उसने खुद बनाकर पाकिस्तान भेजे थे. यह सिर्फ प्रचार नहीं था, बल्कि एक रणनीति का हिस्सा था. जांच में यह भी सामने आया कि उसने अपने जानने वालों को भी इसी तरह के काम करने के लिए उकसाया था. यानी नेटवर्क धीरे-धीरे फैलाया जा रहा था, जैसे कोई वायरस चुपचाप फैलता है.
स्पेशल सेल पहले से ही इस नेटवर्क पर नजर बनाए हुए थी. इसी दौरान उन्हें कश्मीरी गेट में हुई फायरिंग की घटना से भी लिंक मिला. यह वही घटना थी, जिसमें लॉरेंस बिश्नोई की लीगल टीम के एक वकील पर हमला हुआ था. हरमन ने दावा किया था कि उसके साथी इस वारदात में शामिल थे. इतना ही नहीं, पाकिस्तान में बैठे एक हैंडलर ने सोशल मीडिया पर इसकी जिम्मेदारी भी ली थी.
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, एक खतरनाक पैटर्न सामने आया. पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स सोशल मीडिया के जरिए भारत के युवाओं को निशाना बनाते थे. वे प्रोफाइल देखते, उनकी कमजोरियां समझते और फिर धीरे-धीरे उन्हें अपने जाल में फंसा लेते. यह एक साइकोलॉजिकल गेम था, जिसमें युवा बिना समझे ही मोहरे बन जाते थे.
शुरुआत में युवाओं को छोटे-छोटे काम दिए जाते थे. जैसे किसी के लिए पैसे ट्रांसफर करना या किसी को ठहराने का इंतजाम करना. फिर धीरे-धीरे उन्हें संवेदनशील जगहों की रेकी करने और वीडियो भेजने के लिए कहा जाता था. इसके बाद दीवारों पर ग्राफिटी लिखवाकर माहौल बनाया जाता था. जब कोई युवक इन शुरुआती कामों में सफल हो जाता था, तब उसे बड़े टास्क दिए जाते थे. जैसे फायरिंग करना या ग्रेनेड अटैक को अंजाम देना.
पूरे नेटवर्क को पाकिस्तान से कंट्रोल किया जाता था. पैसे, हथियार, टारगेट और प्लानिंग, सब कुछ वहीं से तय होता था. हरमन की कहानी भी कुछ ऐसी ही थी. उसका बचपन मुश्किलों में बीता था. पिता नशे के आदी थे, मां अलग हो चुकी थी. पढ़ाई में मन न लगने के कारण उसने स्कूल छोड़ दिया और छोटे-मोटे काम करने लगा. लेकिन किस्मत उसे एक खतरनाक मोड़ की ओर ले जा रही थी.
मोबाइल फोन और सोशल मीडिया ने उसकी जिंदगी बदल दी. वह रील्स बनाता, फॉलोअर्स बढ़ाने की कोशिश करता और धीरे-धीरे गैंगस्टर्स की दुनिया से प्रभावित हो गया. साल 2023 में पिता से झगड़े के बाद वह घर छोड़कर अमृतसर चला गया. वहीं उसकी मुलाकात एक ऐसे शख्स से हुई, जिसने उसे अपराध की दुनिया से परिचित कराया.
इंस्टाग्राम पर उसने शाहजाद भट्टी को फॉलो करना शुरू किया. उसकी लग्जरी लाइफ और स्टाइल ने हरमन को आकर्षित किया. यहीं से उसकी एंट्री इस खतरनाक नेटवर्क में हुई. उसने धीरज उर्फ धीरू से संपर्क किया, जो पहले एक ग्रेनेड हमले में शामिल रह चुका था. हरमन ने उसे पैसे भी दिए ताकि वह उसे भट्टी से मिलवा सके.
भट्टी ने हरमन को बड़े-बड़े सपने दिखाए. ड्रोन से हथियार भेजने की बात, मोटी रकम और काम पूरा होने पर दुबई भेजने का लालच. फरवरी 2026 में उसे निर्देश मिला कि वह पब्लिक जगहों पर ‘TTH’ लिखे. उसने तलवाड़ा में यह काम किया और वीडियो भेजे. आगे उसे दिल्ली और यूपी में भी ऐसी गतिविधियां करने के लिए कहा गया था.
सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ, जब पता चला कि भट्टी ने हरमन और उसके साथी अनस को रामपुर की एक पुलिस चौकी पर ग्रेनेड हमला करने का आदेश दिया था. लेकिन इससे पहले कि यह साजिश पूरी होती, स्पेशल सेल ने हरमन को गिरफ्तार कर लिया. एक बड़ा खतरा टल गया. डीसीपी नर्रा चैतन्य के मुताबिक, यह एक संगठित अंतरराष्ट्रीय आतंकी मॉड्यूल था. अब पुलिस बाकी फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है, ताकि इस नेटवर्क का पूरी तरह सफाया किया जा सके.
अरविंद ओझा