AK-47 से हमला, खूनी गैंगवार और सियासी संग्राम... पंजाब में ऐसे हुआ सरपंच हरबिंदर संधू का कत्ल, जानें पूरी कहानी

पंजाब के तरनतारन में सरपंच हरबिंदर संधू की हत्या गैंगवार का नतीजा मानी जा रही है, जिसे AK-47 राइफल से अंजाम दिया गया. इस हत्याकांड ने गैंगवार, पुलिस एनकाउंटर और कानून-व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. जानिए इस मर्डर केस की पूरी कहानी.

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इस हत्याकांड के पीछे गैंगवार की आशंका जताई गई है (फोटो-ITG) इस हत्याकांड के पीछे गैंगवार की आशंका जताई गई है (फोटो-ITG)

अमन भारद्वाज

  • तरन तारन,
  • 19 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:34 PM IST

पंजाब के तरनतारन में मौजूद एक गांव में उस दिन जश्न का माहौल था. शेर सिद्धू फार्म पैलेस में शादी समारोह चल रहा था और मेहमान खुशी में डूबे हुए थे. तभी अचानक गोलियों की आवाज से पूरा माहौल दहशत और खौफ में ढ़क गया. एक पल में सब कुछ बदल गया. दो अज्ञात हमलावरों ने सरपंच हरबिंदर संधू को अपना निशाना बनाया. देखते ही देखते खुशियों का माहौल चीखों में बदल गया. लोग इधर-उधर भागने लगे. किसी को समझ नहीं आया कि आखिर ये हमला क्यों हुआ. इस वारदात ने एक बार फिर पंजाब की सियासत और कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए.

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AK राइफल और 9mm पिस्टल का इस्तेमाल
सूत्रों के मुताबिक हमलावरों ने AK-सीरीज असॉल्ट राइफल और 9mm पिस्टल का इस्तेमाल किया. इतने हाई-पावर हथियारों के इस्तेमाल ने जांच एजेंसियों को चौंका दिया है. इस हमले की तुलना 2022 में पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला (Sidhu Moosewala) की हत्या से की जा रही है. उसमें भी असॉल्ट राइफल का इस्तेमाल हुआ था. सवाल ये है कि आखिर ऐसे हथियार गैंगस्टरों तक कैसे पहुंच रहे हैं. क्या पंजाब में संगठित अपराध का नेटवर्क और मजबूत हो चुका है? पुलिस अब हथियारों के स्रोत की भी जांच कर रही है.

तीसरा बड़ा हत्याकांड
यह घटना पिछले कुछ महीनों में तीसरी बड़ी हत्या है. इससे पहले जनवरी में वल्टोहा के सरपंच की हत्या हुई थी. फिर लकी ओबेरॉय की जान गई. और अब तिथि‍या मेहता के सरपंच हरबिंदर संधू की हत्या ने माहौल गरमा दिया है. चूंकि वह आम आदमी पार्टी से जुड़ी थीं, इसलिए विपक्ष ने सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं. अगर सत्तारूढ़ पार्टी के नेता ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिक कैसे सुरक्षित रहेंगे?

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लांडा हरिके गैंग ने ली जिम्मेदारी
हत्या के कुछ घंटों बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हुआ. जिसमें लांडा हरिके गैंग ने इस हत्याकांड जिम्मेदारी ली. पोस्ट में लिखा गया कि सरपंच ने उनके ‘छोटे भाई’ नोनी के केस में गवाही दी थी. गैंग ने खुली धमकी देते हुए कहा कि “ये सिर्फ ट्रेलर था.” साथ ही पुलिस को एनकाउंटर की चेतावनी भी दी गई. इस पोस्ट ने साफ कर दिया कि मामला सिर्फ निजी रंजिश नहीं बल्कि संगठित गैंगवार से जुड़ा है.

माझा बेल्ट में गैंगवार की आग
पंजाब का मझा इलाका इन दिनों गैंग गतिविधियों का गढ़ बन चुका है. सट्टा नौशेरा गैंग, लांडा हरिके गैंग और गुरदेव गेहशाल गैंग के बीच वर्चस्व की लड़ाई चल रही है. रंगदारी, वसूली और बदले की वारदातों ने हालात बिगाड़ दिए हैं. पुलिस लगातार निगरानी कर रही है, लेकिन गैंग के बदलते गठजोड़ हालात को और जटिल बना रहे हैं. हर हत्या के बाद तनाव और बढ़ जाता है.

रंगदारी और बदले की कहानी
सुखविंदर सिंह उर्फ नोनी नाम का शख्स सट्टा नौशेरा का भाई था. उस पर साल 2024 में एक कारोबारी से रंगदारी मांगने का आरोप था. बाद में खुद नोनी की हत्या कर दी गई. करीब एक साल बाद हैप्पी चौधरी की भी मर्डर हो गया. पुलिस सूत्रों का कहना है कि सट्टा नौशेरा को शक था कि हैप्पी ने गोपी नंबरदार से संपर्क करवाया था. इन शंकाओं ने गैंग दुश्मनी को और गहरा कर दिया. बदले की इस आग में कई जिंदगियां झुलस चुकी हैं.

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अब डॉली बल गैंग की एंट्री!
इसी बीच डॉली बल गैंग के सक्रिय होने की खबरें भी सामने आई हैं. इससे माझा में गैंगवार का दायरा और बढ़ गया है. नए गठजोड़ और नए दुश्मन बन रहे हैं. पुलिस के लिए हालात संभालना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है. हर वारदात के पीछे कई परतें खुल रही हैं. ऐसा लगता है जैसे पूरा इलाका गैंग संघर्ष का अखाड़ा बन गया हो.

पुरानी शिकायत से जुड़ा कनेक्शन
जांच में साल 2024 की एक शिकायत अहम कड़ी बनकर उभरी है. एक कारोबारी ने नोनी के खिलाफ रंगदारी का केस दर्ज कराया था. उस मामले में हरबिंदर संधू सह-शिकायतकर्ता थीं. अब जांच एजेंसियां देख रही हैं कि क्या उसी कानूनी विवाद ने हत्या का रूप ले लिया. क्या गवाही देने की कीमत उन्हें जान देकर चुकानी पड़ी? पुलिस इस एंगल को गंभीरता से खंगाल रही है.

गोलीबारी में एक और घायल
हमले में सिर्फ सरपंच ही निशाना नहीं बनीं. जब कुछ लोगों ने हमलावरों का पीछा करने की कोशिश की, तो फायरिंग में गरमन सिंह के पैर में गोली लग गई.. सरपंच को अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई. शादी का जश्न मातम में बदल चुका था. गांव में डर और गुस्से का माहौल है. लोग सुरक्षा की मांग कर रहे हैं.

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पुलिस अफसर सस्पेंड
घटना के बाद डीएसपी पट्टी जगबीर सिंह और एसएचओ सरहाली गुरविंदर सिंह को निलंबित कर दिया गया. उन पर निवारक कार्रवाई में कमी का आरोप है. पुलिस ने कहा कि शुरुआती जांच में निजी रंजिश का एंगल ज्यादा मजबूत दिख रहा है. सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं. फॉरेंसिक टीम भी जांच में जुटी है. कई टीमें आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही हैं.

एनकाउंटर और आंकड़ों की बहस
पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने नवंबर 2025 में बताया था कि अप्रैल 2022 से अब तक 324 एनकाउंटर हुए हैं. जिनमें 24 गैंगस्टर मारे गए और 515 गिरफ्तार हुए. 319 अपराधियों को गोली लगी. नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच 34 एनकाउंटर दर्ज हुए. इन आंकड़ों ने बहस छेड़ दी है कि क्या एनकाउंटर ही समाधान है या कानून-व्यवस्था की हालत बिगड़ रही है?

मानवाधिकार आयोग का दखल
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कथित फर्जी मुठभेड़ों पर एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है. आरोप है कि कुछ एनकाउंटर राज्य प्रायोजित हो सकते हैं. हालांकि सरकार ने अभी विस्तृत जवाब नहीं दिया है. पुलिस का दावा है कि ज्यादातर मामलों में आरोपी पहले गोली चलाते हैं. फिर जवाबी कार्रवाई होती है. लेकिन सवाल अब भी कायम हैं.

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली पर तीखी टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि ‘ऑपरेशन प्रहार’ कहीं ‘प्रचार’ तो नहीं बन गया? यह टिप्पणी गैंगस्टर राणा बलाचौरिया की हत्या से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान आई. अदालत ने पूछा कि हत्या से पहले खुफिया तंत्र ने क्या इनपुट दिए थे. कोर्ट ने देरी से एफआईआर दर्ज करने पर भी नाराजगी जताई.

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चुनाव से पहले बड़ा मुद्दा
पंजाब में अगले 10 महीनों में चुनाव होने हैं. ऐसे में कानून-व्यवस्था और गैंगवार बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकते हैं. विपक्ष सरकार को घेर रहा है. आम आदमी पार्टी के सामने चुनौती है कि वह हालात को कैसे संभाले. क्या सख्त कार्रवाई से गैंग नेटवर्क टूटेगा? या फिर राजनीतिक बयानबाजी ही जारी रहेगी?

सवाल जो अब भी बाकी हैं
सरपंच हरबिंदर संधू की हत्या ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या यह सिर्फ निजी दुश्मनी थी या गैंगवार का हिस्सा? क्या हाई-पावर हथियारों की सप्लाई पर रोक लग पाएगी? क्या पुलिस की रणनीति कारगर है? और सबसे बड़ा सवाल- क्या पंजाब में आम नागरिक सुरक्षित है? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में जांच के साथ सामने आएंगे, लेकिन फिलहाल माझा की हवा में डर साफ महसूस किया जा सकता है.

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