पाक-प्रायोजित साइबर जासूसी मामले में NIA कोर्ट का बड़ा फैसला, दोषी को मिली 5 साल से ज्यादा की सजा

NIA कोर्ट ने पाकिस्तान-प्रायोजित साइबर जासूसी मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने जासूसी करने और फर्जी सिम, OTP और व्हाट्सएप का दुरुपयोग करने वाले आरोपी को दोषी करार देते हुए 5.5 साल की सजा सुनाई है. यह मामला बेहद गंभीर माना गया था.

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NIA कोर्ट ने दोषी को दो सजा एक साथ सुनाई हैं (फोटो-ITG) NIA कोर्ट ने दोषी को दो सजा एक साथ सुनाई हैं (फोटो-ITG)

कमलजीत संधू

  • नई दिल्ली,
  • 28 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:03 PM IST

विशाखापत्तनम में मौजूद NIA की विशेष अदालत ने पाकिस्तान-प्रायोजित मोबाइल और साइबर जासूसी मामले में एक अहम फैसला सुनाया है. इस मामले में मुख्य आरोपी अल्ताफहुसैन घांचीभाई उर्फ शकील को दोषी ठहराया गया है. अदालत ने आरोपी को साधारण कारावास की सजा सुनाई है. यह मामला फर्जी सिम कार्ड और सोशल मीडिया के दुरुपयोग से जुड़ा है. NIA के अनुसार, यह एक संगठित क्रॉस-बॉर्डर जासूसी साजिश थी. अदालत ने इसे देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया.

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आरोपी ने ट्रायल के दौरान कबूला गुनाह
मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी अल्ताफहुसैन ने अदालत के सामने अपना गुनाह कबूल कर लिया था. ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 37 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके थे. आरोपी की स्वीकारोक्ति के बाद केस और मजबूत हुआ. अदालत ने माना कि आरोपी की भूमिका केवल तकनीकी नहीं बल्कि रणनीतिक थी. उसने जानबूझकर दुश्मन देश की खुफिया एजेंसियों की मदद की. यह कबूलनामा सजा तय करने में अहम आधार बना.

सोशल मीडिया का दुरुपयोग
NIA कोर्ट ने आरोपी को यूनिक पहचान से जुड़े साधनों के दुरुपयोग का दोषी ठहराया. आरोपी ने भारतीय सिम कार्ड, OTP और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल किया. उसने इन डिजिटल संसाधनों को जासूसी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया. अदालत ने कहा कि डिजिटल पहचान का ऐसा दुरुपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है. आरोपी ने तकनीक का इस्तेमाल अपराध को छिपाने के लिए किया. यही वजह है कि IT एक्ट के तहत भी सजा दी गई.

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UAPA और IT एक्ट के तहत सजा
अदालत ने आरोपी को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UA(P) एक्ट की धारा 18 के तहत 5 साल 6 महीने की सजा सुनाई. इसके साथ ही ₹5,000 का जुर्माना भी लगाया गया है. इसके अलावा IT एक्ट 2000 की धारा 66C के तहत 2.5 साल की सजा और ₹5,000 का जुर्माना किया गया. दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी. कुल मिलाकर आरोपी को अधिकतम 5.5 साल की सजा काटनी होगी.

मछुआरों की सिम से जासूसी साजिश
यह मामला RC-03/2021/NIA/HYD के तहत दर्ज किया गया था. जांच में सामने आया कि भारतीय मछुआरे हाई सीज़ में मछली पकड़ते समय पाकिस्तानी नौसेना द्वारा पकड़े गए थे. उनकी मोबाइल फोन और सिम कार्ड पाक नौसेना ने जब्त कर लिए थे. बाद में यही सिम कार्ड भारत में सक्रिय किए गए. आरोपी ने इन सिम कार्ड्स का इस्तेमाल कर जासूसी नेटवर्क को मदद पहुंचाई. यह साजिश सीमा पार से संचालित की जा रही थी.

भारत में OTP, पाकिस्तान में मोबाइल
NIA की जांच में यह साफ हुआ कि आरोपी ने भारतीय सिम कार्ड अपने मोबाइल में डाले. इसके जरिए उसने वन टाइम पासवर्ड यानी OTP जनरेट किए. इन OTP को उसने पाकिस्तानी खुफिया एजेंटों के साथ साझा किया. इसके चलते पाकिस्तान से भारतीय व्हाट्सएप नंबर ऑपरेट किए जाने लगे. यह पूरी प्रक्रिया बेहद सुनियोजित थी. इसका मकसद भारतीय डिजिटल सिस्टम का दुरुपयोग करना था.

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फर्जी नाम से रक्षा कर्मियों से संपर्क
जांच में यह भी सामने आया कि इन भारतीय नंबरों का इस्तेमाल पाकिस्तानी एजेंटों ने किया. वे फर्जी पहचान बनाकर भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़े लोगों से संपर्क कर रहे थे. उनका मकसद संवेदनशील और गोपनीय रक्षा जानकारी हासिल करना था. यह सीधा-सीधा देश की सुरक्षा से खिलवाड़ था. NIA ने इसे गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा उल्लंघन माना है. ऐसी कोशिश भारत की संप्रभुता को नुकसान पहुंचाने वाली थी.

देश के लिए खतरा
अदालत और NIA दोनों ने माना कि यह साजिश भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता के लिए खतरा थी. साइबर माध्यम से जासूसी के नए तरीके अपनाए जा रहे हैं. डिजिटल प्लेटफॉर्म अब राष्ट्रीय सुरक्षा के नए मोर्चे बन चुके हैं. आरोपी की गतिविधियां आतंक और जासूसी के बीच की कड़ी को दिखाती हैं. इसी कारण सख्त कानूनों के तहत कार्रवाई की गई. यह फैसला भविष्य के लिए एक कड़ा संदेश है.

जासूसी के खिलाफ NIA की सख्ती
NIA ने साफ किया है कि वह साइबर और सीमा पार जासूसी गतिविधियों के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखेगी. एजेंसी ऐसे सभी अपराधियों को कानून के कठघरे में लाने के लिए प्रतिबद्ध है. डिजिटल माध्यम से होने वाले अपराधों पर खास नजर रखी जा रही है. यह मामला दिखाता है कि तकनीक का गलत इस्तेमाल कितना खतरनाक हो सकता है. NIA की सतर्कता से बड़ी साजिश नाकाम हो गई. आने वाले समय में ऐसे मामलों में और सख्ती तय मानी जा रही है.

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