नवी मुंबई में ‘जंगल की जमीन’ का खेल! बीजेपी नेता जे.एम. म्हात्रे पर ED की बड़ी कार्रवाई, 69.47 करोड़ की संपत्ति अटैच

नवी मुंबई में वन भूमि के कथित अवैध अधिग्रहण और 42.4 करोड़ रुपये के मुआवजे मामले में ED ने बीजेपी नेता जे.एम. म्हात्रे की 69.47 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच कर ली है. यह मामला लगातार चर्चाओं में बना हुआ है. जानिए इस केस की पूरी कहानी.

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ED ने पहले भी बीजेपी नेता के ठिकानों पर छापेमारी की थी (फोटो-ITG) ED ने पहले भी बीजेपी नेता के ठिकानों पर छापेमारी की थी (फोटो-ITG)

दिव्येश सिंह

  • मुंबई,
  • 09 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:12 PM IST

महाराष्ट्र के नवी मुंबई में सरकारी जमीन को लेकर एक बड़ा खेल किया गया था, जिसकी भनक किसी को नहीं लगी थी. लेकिन जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में हाथ डाला तो हर कोई हैरान रह गया. यह मामला है रायगढ़ जिले के पनवेल तालुका के मौजे वहाल की उन जमीनों का, जो कभी सरकारी रिकॉर्ड में वन विभाग के नाम दर्ज थीं. लेकिन समय के साथ इन जमीनों की किस्मत बदलती चली गई. 

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आरोप है कि इन जमीनों को अवैध तरीके से अपने नाम करवाकर करोड़ों की हेराफेरी की गई. इसी सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. मामला मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है और जांच लगातार आगे बढ़ रही है.

ED का प्राविजनल अटैचमेंट ऑर्डर
मुंबई जोनल ऑफिस की ED ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA), 2002 के तहत प्राविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया है. इस आदेश के तहत उरण और उलवे, नवी मुंबई में स्थित तीन अचल संपत्तियों को अटैच किया गया है. इन संपत्तियों की अनुमानित कीमत करीब 17.74 करोड़ रुपये बताई गई है. ये संपत्तियां बीजेपी नेता जे.एम. म्हात्रे और उनकी पत्नी से जुड़ी हैं. ED का दावा है कि यह संपत्ति कथित तौर पर अवैध लेन-देन से अर्जित की गई है.

कौन हैं जे.एम. म्हात्रे?
जे.एम. म्हात्रे राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं. वह पहले कई वर्षों तक पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी (PWP) से जुड़े रहे. साल 2025 में उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया था. इसके अलावा वे पनवेल म्युनिसिपल काउंसिल के प्रमुख भी रह चुके हैं. स्थानीय राजनीति में उनका प्रभाव माना जाता रहा है. अब इसी राजनीतिक सफर के बीच उन पर गंभीर आर्थिक अनियमितताओं के आरोप लगे हैं.

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जमीन का असली खेल?
जांच में सामने आया कि सर्वे नंबर 427/1 (41.70 हेक्टेयर) और 436/1 (110.60 हेक्टेयर) की जमीन महाराष्ट्र सरकार ने 1975 में महाराष्ट्र प्राइवेट फॉरेस्ट (अधिग्रहण) अधिनियम के तहत अधिग्रहित की थी. इसके बाद 7/12 रिकॉर्ड में मालिकाना हक वन विभाग, महाराष्ट्र सरकार के नाम दर्ज कर दिया गया था. यानी यह जमीन कानूनी रूप से सरकारी वन भूमि थी, लेकिन यहीं से कथित गड़बड़ी की कहानी शुरू होती है.

म्यूटेशन एंट्री में कथित छेड़छाड़
ED की जांच के मुताबिक, जमीन के म्यूटेशन रिकॉर्ड में कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई. वन विभाग का नाम हटाकर आरोपी जे.एम. म्हात्रे और अन्य लोगों के नाम दर्ज कर दिए गए. यह बदलाव अवैध तरीके से किया गया बताया जा रहा है. इस कथित फर्जीवाड़े के बाद जमीन का कुछ हिस्सा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को बेच दिया गया. यही सौदा आगे चलकर करोड़ों के मुआवजे का कारण बना.

42.4 करोड़ का मुआवजा
आरोप है कि NHAI को जमीन बेचने के एवज में जे.एम. म्हात्रे को करीब 42.4 करोड़ रुपये का मुआवजा मिला. ED का कहना है कि यह मुआवजा गलत तरीके से हासिल किया गया था. जांच में यह भी सामने आया कि इस राशि का इस्तेमाल अन्य अचल संपत्तियां खरीदने, लोन चुकाने और कारोबारी खर्चों में किया गया. यह रकम JMMIPL और JMM Homes जैसी कंपनियों में भी लगाई गई और परिवार के सदस्यों को भी दी गई.

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2025 में हुई थी बड़ी तलाशी
वन विभाग की शिकायत और FIR दर्ज होने के बाद जून 2025 में ED ने केस दर्ज किया था. 17 जून 2025 को मुंबई और नवी मुंबई के कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया था. इस दौरान 16.5 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी जब्त की गई. साथ ही 8 बैंक खातों और एफडीआर को फ्रीज किया गया, जिनकी कुल राशि करीब 43.78 करोड़ रुपये थी. यह कार्रवाई मामले की गंभीरता को दर्शाती है.

पहले भी हो चुका है अटैचमेंट
यह इस मामले में पहली कार्रवाई नहीं है. 12 जनवरी 2026 को भी ED ने एक प्राविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया था. उस समय 5 अचल संपत्तियां, जिनकी कीमत लगभग 7.10 करोड़ रुपये थी, अटैच की गई थीं. यानी जांच लगातार आगे बढ़ती रही और संपत्तियों का दायरा बढ़ता गया.

अब तक 69.47 करोड़
अब तक की कार्रवाई में कुल 69.47 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों की पहचान कर उन्हें अटैच, सीज या फ्रीज किया जा चुका है. इसमें जमीन, बैंक बैलेंस और अन्य निवेश शामिल हैं. ED का कहना है कि जांच अभी जारी है और आगे भी नई जानकारियां सामने आ सकती हैं. इस मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है.

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आगे क्या होगा?
अब निगाहें इस बात पर हैं कि कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में जाती है. PMLA के तहत अटैच की गई संपत्तियों की पुष्टि के लिए आगे एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी में मामला जाएगा. यदि आरोप साबित होते हैं तो कार्रवाई और कड़ी हो सकती है. फिलहाल ED की जांच जारी है और इस कथित वन भूमि घोटाले ने नवी मुंबई की राजनीति में बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है.

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