दिल्ली में मोबाइल टावर चोरी रैकेट का भंडाफोड़, 2 करोड़ के उपकरण बरामद, 2 आरोपी गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने मोबाइल टावर उपकरणों की चोरी से जुड़े एक बड़े अंतर-राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है. क्राइम ब्रांच ने करीब 2 करोड़ रुपए की 130 हाई-वैल्यू रेडियो रिमोट यूनिट बरामद की हैं. ये उपकरण कई राज्यों से चोरी कर दिल्ली लाए जा रहे थे और विदेश भेजने की तैयारी थी.

Advertisement
टावर चोरी से टेलीकॉम कंपनियों को बड़ा नुकसान, पुलिस की सख्त कार्रवाई. (Photo: X/@CrimeBranchDP) टावर चोरी से टेलीकॉम कंपनियों को बड़ा नुकसान, पुलिस की सख्त कार्रवाई. (Photo: X/@CrimeBranchDP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:30 PM IST

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मोबाइल टावर उपकरणों की चोरी और अवैध व्यापार में शामिल एक अंतर-राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने करीब 2 करोड़ रुपए की 130 हाई-वैल्यू रेडियो रिमोट यूनिट बरामद की हैं, जिनका इस्तेमाल मोबाइल टावरों में किया जाता है. इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है.

एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी की पहचान आफताब उर्फ रेहान के रूप में हुई है. उसके साथ रबनवाज़ नामक युवक को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. इस बड़ी बरामदगी से पुलिस को कई राज्यों में दर्ज मोबाइल टावर उपकरण चोरी के कम से कम 60 मामलों को सुलझाने में मदद मिली है.

Advertisement

रेडियो रिमोट यूनिट मोबाइल टावरों का बेहद अहम कंपोनेंट होती हैं. इनकी चोरी से टेलीकॉम ऑपरेटरों को भारी वित्तीय नुकसान होता है और नेटवर्क सेवाओं में भी बड़ी बाधा आती है, क्योंकि कनेक्टिविटी बहाल करने के लिए नए उपकरण लगाने पड़ते हैं. पुलिस को सूचना मिली थी कि चोरी किए गए उपकरण दिल्ली के ट्रांस-यमुना इलाके में लाए जा रहे हैं.

यहां उन्हें स्टोरेज और ट्रांजिट हब के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था. लगातार निगरानी और तकनीकी विश्लेषण के बाद पुलिस ने उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और राजस्थान से चोरी किए गए RRUs लाने वाले गिरोह की पहचान कर ली. 26 दिसंबर को पुख्ता जानकारी मिलने के बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने धौला कुआं के पास एक गाड़ी को रोका.

तलाशी के दौरान उसमें से 130 रेडियो रिमोट यूनिट बरामद की गईं, जिन्हें एक्सपोर्ट के लिए ले जाया जा रहा था. पुलिस जांच में सामने आया कि इन उपकरणों को महिपालपुर में स्थित एक ट्रांसपोर्टर के जरिए स्क्रैप सामान बताकर दुबई भेजने की तैयारी थी. आरोपी ने खुलासा किया कि चोरी की गई RRUs को 90 हजार रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से खरीदा गया था.

Advertisement

इसके साथ ही कस्टम क्लीयरेंस के लिए जाली इनवॉइस का इस्तेमाल किया गया और उपकरणों को उसी हिसाब से पैक किया गया था. पुलिस ने बताया कि अब तक 60 RRUs की पहचान एक टेलीकॉम कंपनी ने कर ली है. बाकी उपकरणों के असली मालिक का पता लगाने और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच के लिए आगे की कार्रवाई जारी है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement