कौन हैं दो पीड़ित? क्या हैं आरोप? कौन करेगा जांच? कौन हैं दो बाबा आमने-सामने? जानें अविमुक्तेश्वरानंद केस के अपडेट

अविमुक्तेश्वरानंद केस में 14 और 17 साल के दो नाबालिग पीड़ितों के संगीन आरोपों से मामला बेहद गंभीर हो गया है. इस केस में जांच अधिकारी के तौर पर आईपीएस अजयपाल शर्मा का नाम सामने आया है. आशुतोष ब्रह्मचारी की शिकायत और 21 लाख का इनाम.. जानें पूरे विवाद की कहानी.

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यौन शोषण के आरोप ने मामले को बेहद गंभीर बना दिया है (फोटो-ITG) यौन शोषण के आरोप ने मामले को बेहद गंभीर बना दिया है (फोटो-ITG)

aajtak.in

  • लखनऊ,
  • 25 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:26 PM IST

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं. प्रयागराज में दर्ज एक एफआईआर ने संत समाज और राजनीति दोनों में हलचल मचा दी है. कोर्ट के आदेश के बाद झूंसी थाने में मामला दर्ज हुआ है, जिसमें पॉक्सो एक्ट समेत कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं. इस केस में दो नाबालिग शिष्यों के यौन शोषण के आरोप लगाए गए हैं. शिकायतकर्ता एक अन्य धर्मगुरु हैं, जिससे यह मामला दो धर्मगुरुओं के बीच सीधी टकराव की शक्ल ले चुका है. हालांकि इस मामले में पुलिस जांच जारी है और मामला अदालत में विचाराधीन है.

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कौन हैं दोनों पीड़ित?
इस मामले में दो नाबालिग लड़कों को पीड़ित बताया गया है. पहला पीड़ित 14 साल का है, जबकि दूसरा करीब साढ़े 17 साल का बताया गया है. दोनों कथित रूप से स्वामी के गुरुकुल और शिविरों से जुड़े थे. पॉक्सो कानून के तहत उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है. शिकायत के मुताबिक, ये दोनों धार्मिक आयोजनों के दौरान स्वामी के संपर्क में आए. आरोप है कि शिक्षा और सेवा के नाम पर उन्हें आश्रम और शिविरों में रखा गया. बाद में उन्होंने कथित शोषण की जानकारी शिकायतकर्ता को दी.

क्या हैं आरोप?
एफआईआर के अनुसार, 13 जनवरी 2025 से 15 फरवरी 2026 के बीच कथित घटनाएं हुईं. आरोप है कि प्रयागराज के माघ मेला और कुंभ शिविरों के दौरान दोनों नाबालिगों का यौन शोषण किया गया. यह मामला पॉक्सो एक्ट की धाराओं 3, 4, 6, 16 और 17 समेत भारतीय न्याय संहिता की धारा 351(3) के तहत दर्ज हुआ है. शिकायत में यह भी कहा गया है कि शिविर के भीतर और बाहर खड़ी गाड़ी में भी कथित घटनाएं हुईं. दो-तीन अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है. कोर्ट ने आरोपों को गंभीर मानते हुए एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया.

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कौन कर रहा है जांच?
मामला प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज हुआ है. जांच की निगरानी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा की जा रही है. मीडिया रिपोर्ट्स में आई.पी.एस. अधिकारी अजयपाल शर्मा का नाम सामने आया है, जो जांच प्रक्रिया से जुड़े बताए जा रहे हैं. हालांकि आधिकारिक प्रेस बयान में विस्तृत पुष्टि सीमित है. पुलिस ने पीड़ितों के बयान दर्ज कर लिए हैं और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है.

अविमुक्तेश्वरानंद का पक्ष
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सभी आरोपों को साजिश बताया है. उनका कहना है कि आरोप लगाना आसान है, लेकिन उन्हें साबित करना अलग बात है. उन्होंने कहा कि वे निर्दोष हैं और जांच में पूरा सहयोग करेंगे. साथ ही उन्होंने निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. उन्होंने शिकायतकर्ता पर दो अलग-अलग शपथपत्र देने का आरोप लगाया और उसे ‘हिस्ट्रीशीटर’ तक बताया. उनका कहना है कि उन्हें बदनाम करने और उनकी धार्मिक सक्रियता रोकने के लिए यह केस बनाया गया है.

कौन हैं शिकायतकर्ता?
इस केस में शिकायतकर्ता हैं आशुतोष ब्रह्मचारी उन्होंने अदालत में याचिका दायर कर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी. उनका दावा है कि दो नाबालिग उनके पास पहुंचे और कथित शोषण की जानकारी दी. वे खुद को पीड़ितों की आवाज बता रहे हैं. कुछ रिपोर्ट्स में उनका संबंध अन्य संतों से भी जोड़ा गया है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उन पर झूठे आरोप लगाने का आरोप लगाया है.

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लड़ रहे दो बाबा कौन हैं?
यह विवाद मुख्य रूप से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और आशुतोष ब्रह्मचारी के बीच है. एक ओर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हैं, तो दूसरी ओर शिकायतकर्ता संत. मामला पहले धार्मिक और प्रशासनिक मतभेदों से शुरू हुआ बताया जाता है, जो अब आपराधिक आरोपों तक पहुंच गया है. दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं. संत समाज भी इस मुद्दे पर बंटा नजर आ रहा है. फिलहाल, असली सच्चाई जांच और अदालत के फैसले के बाद ही सामने आएगी.

21 लाख के इनाम का विवाद
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब फलाहारी महाराज ने शिकायतकर्ता की नाक काटने पर 21 लाख रुपये इनाम देने का ऐलान किया. उन्होंने आरोप लगाया कि शंकराचार्य पर घिनौने आरोप लगाकर करोड़ों हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुंचाई गई है. इस बयान की व्यापक आलोचना हुई. कानून विशेषज्ञों ने इसे भड़काऊ और दंडनीय बताया. हालांकि इस ऐलान के बाद प्रशासन की ओर से सख्त रुख अपनाने की बात कही गई है. इससे मामला और संवेदनशील हो गया है.

(लखनऊ से संतोष शर्मा, प्रयागराज से पंकज श्रीवास्तव और वाराणसी से रोशन का इनपुट)

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