शार्क टैंक इंडिया फेम नमिता थापर ने ऑनलाइन ट्रोलिंग पर तोड़ी चुप्पी, बोलीं- 'परिवार तक पहुंची गाली-गलौज'

नमिता थापर ने नमाज पर बयान के बाद हुई ऑनलाइन ट्रोलिंग और परिवार तक पहुंचे अभद्र कमेंट्स पर चुप्पी तोड़ी. उन्होंने ट्रोलिंग करने वालों को करारा जवाब दिया है. जानिए पूरा विवाद और उनका जवाब.

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यह मामला पिछले तीन हफ्ते से चल रहा है (फोटो-X) यह मामला पिछले तीन हफ्ते से चल रहा है (फोटो-X)

ओमकार

  • पुणे,
  • 20 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 2:33 PM IST

शार्क टैंक इंडिया की जज रह चुकी नमिता थापर ने हाल ही में ऑनलाइन ट्रोलिंग और बदसलूकी को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ी है. नमाज पर दिए गए उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हो गया, जो धीरे-धीरे निजी हमलों तक पहुंच गया. इस पूरे मामले में उन्होंने एक वीडियो जारी कर अपनी बात रखी और बताया कि कैसे ट्रोलिंग उनके परिवार तक पहुंच गई.

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मामले की शुरुआत तब हुई जब नमिता थापर ने ईद के बाद एक सोशल मीडिया पोस्ट शेयर किया. इस पोस्ट में उन्होंने नमाज के कुछ शारीरिक और मानसिक फायदे बताए. उन्होंने नमाज के दौरान किए जाने वाले कुछ आसनों की तुलना योग से की और कहा कि इससे शरीर की मुद्रा (पोश्चर), पाचन और तनाव कम करने में मदद मिल सकती है. उनका उद्देश्य इसे एक हेल्थ और वेलनेस के नजरिए से समझाना था.

हालांकि, उनके इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं. कई यूजर्स ने उनके विचारों की आलोचना की और इसे गलत तरीके से पेश किया. धीरे-धीरे यह बहस ट्रोलिंग में बदल गई, जहां लोगों ने व्यक्तिगत टिप्पणियां करना शुरू कर दिया. कुछ लोगों ने उनकी बात को धार्मिक नजरिए से जोड़कर विवाद खड़ा कर दिया.

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विवाद बढ़ने के बाद नमिता थापर ने एक वीडियो जारी कर अपनी बात रखी. इस वीडियो में उन्होंने कहा कि ट्रोलिंग का स्तर इतना गिर गया कि लोगों ने उनके परिवार को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया. उन्होंने बताया कि उनके खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया, जो किसी भी तरह से सही नहीं है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सिर्फ एक राय रखने पर इस तरह का व्यवहार जायज है?

नमिता थापर ने अपने पेशेवर अनुभव का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि वह एक हेल्थकेयर प्रोफेशनल हैं और पहले भी अलग-अलग धर्मों से जुड़े वेलनेस पहलुओं पर बात करती रही हैं. चाहे योग हो या सूर्य नमस्कार, उन्होंने हमेशा वैज्ञानिक और स्वास्थ्य के नजरिए से चीजों को देखने की कोशिश की है. उनका कहना है कि उनका मकसद हमेशा लोगों को जागरूक करना रहा है, न कि किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना.

उन्होंने सोशल मीडिया पर होने वाले सेलेक्टिव आक्रोश पर भी सवाल उठाया. नमिता ने कहा कि कई गंभीर मुद्दों, खासकर महिलाओं से जुड़े मामलों पर उतनी प्रतिक्रिया नहीं मिलती, जितनी इस तरह के मुद्दों पर देखने को मिलती है. उन्होंने इसे समाज की एक बड़ी समस्या बताया, जहां असली मुद्दों से ध्यान भटक जाता है और गैर-जरूरी विवादों को बढ़ावा मिलता है.

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खुद को एक हिंदू बताते हुए नमिता थापर ने कर्म की बात भी कही. उन्होंने कहा कि जो लोग ऑनलाइन गाली-गलौज कर रहे हैं, उन्हें अपने कर्मों का फल जरूर मिलेगा. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सोशल मीडिया पर सभ्यता और जिम्मेदारी बनाए रखें. इस पूरे विवाद के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि मतभेद हो सकते हैं, लेकिन अभिव्यक्ति का तरीका सम्मानजनक होना चाहिए.

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