गुरुग्राम पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट ने साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए नागालैंड की एक महिला समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. यह कार्रवाई इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (गृह मंत्रालय) के साथ मिलकर संयुक्त रूप से की गई. गिरफ्तार आरोपी चीन मूल के साइबर ठगों को कॉलिंग सपोर्ट देने में सक्रिय थे.
गुरुग्राम पुलिस के प्रवक्ता अशोक कुमार ने बताया कि सूचना मिली थी कि सेक्टर-28 स्थित एक किराए के मकान में अवैध तरीके से वर्चुअल सिम बॉक्स लगाकर समानांतर टेलीफोन एक्सचेंज चलाया जा रहा है. इस सिस्टम के जरिए अंतरराष्ट्रीय VOIP कॉल को लोकल कॉल में बदला जाता था, जिससे विदेश में बैठे साइबर ठग भारतीय नागरिकों को कॉल कर ठगी करते थे.
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वर्चुअल सिम बॉक्स के जरिए चल रहा था साइबर ठगी का खेल
जांच में सामने आया कि आरोपी अपने किराए के मकान में वर्चुअल सिम बॉक्स सेटअप लगाकर उसे वाईफाई से जोड़ते थे. इसके जरिए विदेश से आने वाली कॉल भारत के लोकल नंबर की तरह दिखाई देती थी. साइबर ठग इसी सिस्टम का इस्तेमाल कर भारतीय लोगों को डिजिटल अरेस्ट, गेमिंग और इनवेस्टमेंट के नाम पर ठगते थे.
पुलिस और इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर की संयुक्त टीम ने बताए गए पते पर छापा मारा. वहां चौथी मंजिल पर एक किराए के फ्लैट में तीन मोबाइल फोन चालू हालत में मिले, जो अपने आप अलग-अलग भारतीय नंबरों पर कॉल कर रहे थे. इन मोबाइल फोन की स्क्रीन पर VDMS Apk App चलती हुई दिखाई दी, जिससे कॉलिंग सिस्टम संचालित हो रहा था.
नागालैंड की महिला समेत तीन आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने मौके से कुंग पनमे (30 वर्ष), निवासी दीमापुर नागालैंड, न्गवांग ग्याल्त्सेन (35 वर्ष), निवासी धर्मशाला हिमाचल प्रदेश, कर्मा (32 वर्ष), निवासी दीमापुर नागालैंड और लोबसांग त्सुल्ट्रिम (33 वर्ष), निवासी मंडी हिमाचल प्रदेश की पहचान की. इनमें से तीन आरोपियों को दिल्ली से काठमांडू जाने वाली बस से गिरफ्तार किया गया. आरोपी भारत से भागने की कोशिश कर रहे थे.
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 7 मोबाइल फोन, जिनमें 3 स्मार्टफोन, एक कीपैड फोन और 3 टूटे हुए फोन, एक वाईफाई मॉडेम, 3 सिम कार्ड और एक लैपटॉप बरामद किया है. यह सभी सामान साइबर ठगी में इस्तेमाल किया जा रहा था.
चीन के साइबर ठगों को देते थे तकनीकी मदद
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे चीन के साइबर ठगों के लिए वर्चुअल सिम बॉक्स सेटअप लगाकर उसे चालू रखते थे. उनका काम मोबाइल फोन को लगातार चार्ज रखना और इंटरनेट से कनेक्ट रखना था, ताकि ठग आसानी से कॉल कर सकें.
इस सिस्टम के जरिए चीन में बैठे साइबर अपराधी भारतीय नागरिकों को कॉल कर डिजिटल अरेस्ट, गेमिंग और इनवेस्टमेंट के नाम पर ठगी करते थे. इसके बदले आरोपियों को कमीशन मिलता था. पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है.
नीरज वशिष्ठ