पठानकोट हमला: PAK के सियालकोट में जैश के ठिकानों पर छापेमारी, 25 हिरासत में

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के दफ्तर से जारी बयान में भी कहा गया था कि जैश के खिलाफ कार्रवाई हो रही है. इसी बीच भारत-पाक के बीच प्रस्तावित सचिव वार्ता के टलने के बाद पाकिस्तान पर कार्रवाई का दबाव और बढ़ गया है.

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पठानकोट हमले का मास्टरमाइंड मसूद अजहर पठानकोट हमले का मास्टरमाइंड मसूद अजहर

मुकेश कुमार

  • इस्लामाबाद,
  • 15 जनवरी 2016,
  • अपडेटेड 11:47 AM IST

पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ कार्रवाई को अंजाम देना शुरू कर दिया है. सियालकोट में गुरुवार को जैश के एक दफ्तर पर छापेमारी की गई. यहां से करीब 25 लोगों को हिरासत में लिया गया है. वहीं, पाकिस्तानी पंजाब प्रांत के प्रवक्ता जईम कादरी ने जैश सरगना मौलाना मसूद अजहर को हिरासत में लिए जाने की पुष्टि करते हुए कहा कि उसको एहतियातन हिरासत में लिया गया है.

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पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के दफ्तर से जारी बयान में भी कहा गया था कि जैश के खिलाफ कार्रवाई हो रही है. इसी बीच भारत-पाक के बीच प्रस्तावित सचिव वार्ता के टलने के बाद पाकिस्तान पर कार्रवाई का दबाव और बढ़ गया है. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि बातचीत टल गई है. इसके बाद शाम को भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि आपसी सहमति से बातचीत टाल दी गई है.

पाकिस्तानी मीडिया की तरफ से बुधवार को खबर आई थी कि मसूद हिरासत में है. जैश के खिलाफ बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया जा रहा है. लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय ने यह कहकर मामला उलझा दिया था कि उन्हें मसूद के बाबत कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है. गुरुवार को पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने भी मसूद पर पल्ला झाड़ लिया था. लेकिन कादरी के बयान ने इस खबर की पुष्टि कर दी है कि मसूद सहित 12 लोग हिरासत में ले लिए गए हैं. बुधवार को मसूद, उसके भाई और कई रिश्तेदारों को हिरासत में लेने की खबर आई थी.

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जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के आतंकी करतूतों से हिंदुस्तान तो वाकिफ था, लेकिन दुनिया को पता तब चला जब 1999 में कंधार विमान अपहरण कांड हुआ. उसके बदले में जम्मू के कोट भलवल सेंट्रल जेल में बंद मसूद को तत्कालीन विदेश मंत्री जसवंत सिंह और अजीत डोवाल स्पेशल विमान से बैठाकर कंधार ले गए. इसके बाद मसूद ने भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को अंजाम देना शुरू कर दिया.


पाकिस्तानी पंजाब के बहावलपुर में जन्मे मसूद अजहर को उसके पिता के एक दोस्त कराची के जामिला उलूम उल इस्लामिया में पढ़ने के लिए ले गए. वहां मसूद हरकत उल मुजाहिदीन के संपर्क में आया. यह आतंकी संगठन उस वक्त अफगानिस्तान में सक्रिय था. अजहर पर आतंक का जहर चढ़ चुका था. वह तरबियत यानी आतंकी ट्रेनिंग के लिए अफगानिस्तान चला गया. यहीं से एक खूंखार आतंकी का जन्म हुआ.


खुफिया एजेंसियों को कोट भलवल जेल में कैद रहते मसूद ने बताया था, 'मैं अफगानिस्तान के युवार में एक आतंकी ट्रेनिंग कैंप में गया. मैं पांच फीट तीन इंच का छोटे कद का एक थुलथुल आदमी था, जो आतंकी ट्रेनिंग नहीं कर पाता था. मैं पानी से भरे नालों को पार नहीं कर पाता था. दूसरे आतंकी मोटू कहकर मेरा मजाक उड़ाते थे. मैं चालीस दिन का ट्रेनिंग प्रोग्राम भी पूरा नहीं कर पाया. मुझे खारिज कर दिया गया.'

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इसके बाद मसूद अजहर कराची के जामिया इस्लामिया में आ गया. यहां उसने सदा-ए-मुजाहिदीन नामकी पत्रिका निकाली जिसे जुम्मे की नमाज के बाद लोगों को मुफ्त में बांटा जाता था. उस पत्रिका में छपे लेखों का असर ये हुआ कि कई नौजवान आतंकी बनते गए. इससे हरकत-उल-मुजाहिदीन के सरगना को लगा कि मसूद का इस्तेमाल आतंकवादी बनाने से ज्यादा दूसरे आतंकवादी तैयार करने में हो सकता है.

 

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