हाईवे पर मर्डर, वकीलों में गुस्सा और मुख्तार से कनेक्शन... उलझी शोएब किदवई उर्फ बॉबी की मर्डर मिस्ट्री

लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर दिनदहाड़े वकील और मुख्तार अंसारी के पूर्व शूटर शोएब महमूद किदवई उर्फ बॉबी की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई. सर्विस लेन पर हुई इस वारदात में पुलिस अब तक शूटरों का सुराग नहीं लगा पाई है. जानिए इस हत्याकांड की सिलसिलेवार पूरी कहानी.

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इस हत्याकांड में पुलिस के हाथ खाली हैं (फोटो-ITG) इस हत्याकांड में पुलिस के हाथ खाली हैं (फोटो-ITG)

aajtak.in

  • लखनऊ,
  • 20 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:11 AM IST

Lucknow Ayodhya Highway Shootout: लखनऊ अयोध्या हाई-वे पर ओवरब्रिज के नीचे सर्विस लेन है. उसी सर्विस लेन पर कुछ पुलिस वाले एक कार के इर्द-गिर्द कारतूस के खोखे गिनते हुए उन्हें बटोरने की कोशिश कर रहे थे. दूसरी तस्वीर खोखे बटोरने से बस कुछ देर पहले की है. कार वही है पर उस तस्वीर में कार की ड्राइविंग सीट पर लहुलुहान एक शख्स पड़ा है, जिसे पुलिसवाले उठाकर अस्पताल ले जाने की कोशिश कर रहे हैं.

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ड्राइविंग सीट पर बैठा शख्स अस्पताल पहुंच चुका है. अब वहां मौके पर खाली कार खड़ी है. जमीन पर पड़े खोखे और कार में बैठे घायल शख्स की तस्वीर देखने के बाद अब इस कार की तस्वीर देखते हैं. कार के विंडस्क्रीन, बोनट और ड्राइविंग सीट के विंडो पर कुछ और नहीं बुलेट के निशान हैं. सूरज चौरसिया लखनऊ अयोध्या हाईवे ओवर ब्रिज के नीचे पान की दुकान चलाते हैं. जब कार पर अंधाधुंध गोलियां चल रही थी तब आवाज सूरज के कानों तक भी पहुंची थी. लेकिन उसे तब कुछ समझ नहीं आया.

अब थोड़ी देर के लिए मौक-ए-वारदात से दूर बाराबंकी के एक सरकारी अस्पताल में खून से लथपथ स्ट्रेचर पर लेटा वही शख्स है, जो कार की ड्राइविंग सीट पर घायल हालत में देखा गया था. अस्पताल लाने से पहले ही इसकी मौत हो चुकी थी.

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बुलेट एंड बलेनो
अब तक तो आप समझ ही चुके होंगे कि ये एक शूटआउट का मामला था. नीले रंग की बलेनो कार में जिस शख्स पर अंधाधुंध गोलियां चलाई गईं उसकी दो पहचान थी. एक वकील की और दूसरा मुख्तार अंसारी के एक्स शूटर की. नाम था शोएब महमूद किदवई उर्फ बॉबी. शोएब महमूद किदवई या बॉबी बाराबंकी में क्या था इसे समझने के लिए एक धरना प्रदर्शन का जिक्र होना ज़रूरी है. बाराबंकी कचहरी के वकील पुलिस प्रशासन के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगा रहे हैं. खुद पुलिस अफसर इन्हें समझाने की कोशिश कर रहे हैं.

ये सब जानकर अब तक आप ये भी समझ चुके होंगे कि दिन दहाड़े लखनऊ के बेहद करीब और लखनऊ अय़ोध्या हाईवे के नीचे हुआ ये शूटआउट उस उत्तर प्रदेश में हुआ है जहां की कानून व्यवस्था के नाम पर कैसे कैसे ढिंढोरे पीटे जाते हैं. यूपी में दावा किया जाता है कि यहां से अब जंगलराज खत्म हो चुका है. माफिया और गुंडे पनाह मांगने लगे हैं. लेकिन ये एक वारदात इन सारे दावों की चुगली खा रही है. खैर.. चलिए अब आपको सिलसिलेवार पूरी कहानी सुनाते हैं.

अंत का आरंभ
13 फरवरी 2026 यानि शुक्रवार की दोपहर के करीब एक बजे का वक्त था. शोएब उर्फ बॉबी लखनऊ से अपनी बलेनो कार में अकेले बाराबंकी लौट रहा था. लखनऊ से ही मोटरसाइकिल और कार में सवार कुछ लोग लगातार उसका पीछा कर रहे थे. चूकि लखनऊ अयोध्या हाईवे पर गाड़ियों की रफ्तार बेहद तेज होती है, लिहाजा ऐसे में शोएब को निशाना बनाना मुश्किल था. लेकिन पीछा करने वाले शायद पहले भी शोएब की रेकी कर चुके थे. उन्हें पता था कि बाराबंकी जाने के लिए शोएब लखनऊ अयोध्या हाईवे से ठीक इसी जगह पर सर्विस लेन पर आएगा. चूंकि ये सड़क बेहद संकरी है. 

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लिहाजा, गाड़ी की रफ्तार स्लो हो जाएगी और ठीक वैसा ही हुआ. जैसे ही शोएब की कार सर्विस लेन पर आई एक मोटरसाइकिल उसकी कार के आगे आकर रुक गई. दूसरी कार पहले ही पीछे पीछे चल रही थी. इससे पहले की शोएब कुछ समझ पाता. आगे पीछे और दाहिनी तरफ से उस पर गोलियों की बौछार कर दी गई. शूटरों को पता था कि सर्विस लेन पर कहीं कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं है. जबकि हाईवे पर वो सीसीटीवी कैमरे की जद में आ सकते थे. यानि ये साफ हो जाता है कि शूटरों ने बाकायदा पूरे रूट की कई बार रेकी की होगी.

एक्शन का रिएक्शन
अब सवाल ये है कि शोएब को मारने वाले वो शूटर कौन थे? कातिलों से शोएब की क्या दुश्मनी थी? अगर शोएब के पेशे यानि वकालत की वजह से कोई उसका दुश्मन बना तो लखनऊ से बाराबंकी तक पीछा करने की बजाय वो बड़े आराम से बाराबंकी कचहरी या कचहरी के बाहर भी शोएब को निशाना बना सकता था. क्योंकि शोएब के कचहरी आने और जाने का रुटीन सभी जानते थे।.

कमाल ये है कि 6 दिन बीत चुके हैं लेकिन शोएब के कत्ल की वजह तो छोड़िए शूटरों तक का कोई अता पता नहीं है. हालांकि यूपी एसटीएफ से लेकर 5-5 टीमें जांच में लगी हैं. दावा कई सीसीटीवी कैमरों को खंगाल लेने का भी है. लेकिन ना शूटर मिल रहा है ना वो बाइक और कार जिसपर शूटर सवार थे. पुलिस के इसी ढीले रवैये के चलते ये सवाल भी उठ रहा है कि शोएब के कत्ल के पीछे की साजिश कुछ और तो नहीं? 

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ये मामला सिर्फ किसी रंजिश या दुश्मनी का है या फिर कहानी कुछ और है? कहीं मुख्तार का एक्स शूटर होने के नाते तो शोएब को निपटना नहीं दिया गया? क्योंकि आमतौर पर ऐसे शूटआउट के बाद यूपी पुलिस जिस तरह एक्शन में आती है और फिर जैसा रिएक्शन दिखाती है. शोएब की मौत के मामले में कहानी बिल्कुल उल्टी है.

शूटर द लॉयर
शोएब महमूद किदवई उर्फ बॉबी पिछले 15 सालों से बाराबंकी कचहरी में वकालत कर रहे थे. लेकिन इससे पहले उनकी पहचान मुख्तार के करीबी और एक शूटर के तौर पर रही. कत्ल समेत शोएब पर कई मुकदमे दर्ज थे. शोएब उर्फ बॉबी पहली बार सुर्खियों में तब आया था, जब 1999 में लखनऊ जेल के जेलर रमाकांत तिवारी की लखनऊ में राजभवन के ठीक सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस हत्याकांड में मुख्तार और कुछ लोगों के साथ साथ शोएब का नाम शूटर के तौर पर आया था. तब शोएब को गिरफ्तार भी किया गया था.

यहीं सवाल ये है कि बेशक शोएब का कत्ल उस सर्विस लेन पर हुआ, जहां कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं था लेकिन लखनऊ अयोध्या हाईवे पर जगह जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. शूटआउट का वक्त और सर्विस लेन पर गाड़ी के उतरने का वक्त सभी पुलिस को मालूम है. हाईवे पर लगे सीसीटीवी कैमरे से बड़ी आसानी से शूटरों की कार और बाइक की जानकारी मिल सकती है. लेकिन 6 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस के पास कातिलों के बारे में कोई सबूत नहीं. अब दबी जुबान में पुलिस इसे सीधे सीधे किसी जमीन विवाद का मामला बता कर पूरे मामले को निपटाने में लगी है.

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शोएब उर्फ बॉबी की हत्या को लेकर लखनऊ से लेकर बाराबंकी में एक और चर्चा दबी जुबान में जारी है. ये चर्चा मुख्तार अंसारी के गैंग को लेकर है. मुख्तार अंसारी की पहले ही जेल में मौत हो चुकी है. वक्त वक्त पर उसके बाकी के गुर्गे भी निशाने पर लिए जा रहे हैं. अब चूंकि बॉबी भी मुख्तार का शूटर रहा है. तो क्या शूटर को रहस्यमयी शूटरों से निपटाने का खेल किया गया है.

(बाराबंकी से संजय के साथ संतोष शर्मा का इनपुट)

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