दोस्त की बीवी से रेप, IRS की बेटी का रेप-मर्डर और वाई-फाई से धरपकड़... अलवर टू दिल्ली राहुल मीणा के 9 घंटे की क्रोनोलॉजी

पूर्व नौकर राहुल मीणा ने IRS अफसर की बेटी की हत्या कर लूट की वारदात को अंजाम दिया और बाद में पुलिस ने महज कुछ घंटों बाद ही उसे वाई-फाई कॉल से ट्रैक कर गिरफ्तार लिया. जानिए, अलवर से दिल्ली तक 9 घंटे में दो रेप और एक मर्डर करने वाले कातिल की सनसनीखेज कहानी.

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कातिल ने 9 घंटों में दो दो संगीन वारदातों को अंजाम दिया (फोटो-ITG) कातिल ने 9 घंटों में दो दो संगीन वारदातों को अंजाम दिया (फोटो-ITG)

हिमांशु शर्मा

  • अलवर/दिल्ली,
  • 24 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 12:12 PM IST

राजस्थान के अलवर में 19 साल का एक लड़का अपने ही दोस्त की बीवी के साथ जोर जबरदस्ती करता है. उसका रेप करता है. इसके बाद वो अलवर से भागकर 22 अप्रैल की सुबह दिल्ली आ जाता है. दिल्ली में वो एक आईआरएस अफसर के घर में घुसता है और उनकी 22 साल की बेटी के साथ पहले रेप करता है और फिर उसका कत्ल कर देता है. और ये सब कुछ उसने महज 9 घंटे में किया. ये है अलवर से दिल्ली तक उस बेरहम कातिल की पूरी कहानी, जो आपके होश उड़ा देगी. 

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दिल्ली का पॉश एरिया है अमर कॉलोनी. उसी अमर कॉलोनी में मौजूद है आईआरएस अफसर दिनेश गुप्ता का घर. उस घर तक पहुंचने के लिए कॉलोनी का एक मेन गेट है. तारीख थी 21 अप्रैल और सीसीटीवी के कैमरे में जो घड़ी है, उसमें सुबह के 6 बज कर 28 मिनट हुए थे. सामने से एक लड़का आता दिखाई देता है. पीली शर्ट, काली पैंट और जूते पहने. लड़के का मोबाइल लगातार उसके कान से लगा था. उस कॉलोनी के मेन गेट से आईआरएस अफसर के घर की दूरी पैदल थोड़ी लंबी है. 

तारीख अब भी 21 अप्रैल है. पर सीसीटीवी कैमरे की घड़ी में वक्त थोड़ा आगे सरक चुका है. उस वक्त घड़ी में सुबह के 6 बजकर 36 मिनट हुए थे. सामने की तरफ एक कार के करीब एक शख्स खड़ा है. जबकि एक दूसरा शख्स कुत्तों को टहलाते हुए उसी कार के पास आकर रुक जाता है. तभी उसके दाहिनी तरफ एक लड़का उसके करीब पहुंचता है. वही पीली शर्ट, काली पैंट और जूते वाला लड़का. लड़का कार के करीब खड़े काले कपड़े पहने उस शख्स को शायद जानता है. क्योंकि दोनों हाथ मिलाते हैं, फिर लड़का उसके कंधे पर हाथ भी रखता है. कुत्ते को टहला रहा शख्स भी लड़के से कुछ बात करता है. शायद वो भी उसे जानता था. कुछ मिनट की बातचीत के बाद सीसीटीवी की तस्वीरें यहीं रुक जाती हैं. अब जो तस्वीर में नहीं है, वो ये कि इसके बाद यही लड़का अपने दाहिनी तरफ के घर में दाखिल हो चुका था.

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लड़के को घर में दाखिल हुए पूरे 46 मिनट हो चुके थे. सीसीटीवी कैमरे में कैद तस्वीरें उन्हीं आईआरएस अफसर के घर के ठीक बाहर की हैं. कैमरे की घड़ी में अब सुबह के 7 बजकर 22 मिनट हो चुके हैं. तभी इन्हीं कारों के बीच से एक लड़का बाहर निकलता है. फोन इस बार भी उसके कान पर है. ये वही लड़का है जिसे अब तक दो अलग-अलग कैमरों में देखा जा चुका है. पहले कॉलोनी के मेन गेट के अंदर आते और फिर आईआरएस अफसर के घर के ठीक सामने दो लोगों से बातें करते. 

अब बात तीसरी तस्वीर की. पहली दो तस्वीर यानी जब तक वो लड़का आईआरएस अफसर के घर में दाखिल नहीं हुआ था और इस तीसरी तस्वीर में तीन चीजें बदली हुई हैं. पीली शर्ट अब भी है. लेकिन पैंट काली से सफेद हो चुकी है. जूते की जगह अब पैरों में चप्पल है. और पीठ पर पिट्ठू बैग है. घर में दाखिल होने से पहले ये बैग उसके पास नहीं था. ये लड़का कोई और नहीं 19 साल का राहुल मीणा था, जो 21 अप्रैल की सुबह कुल 46 मिनट आईआरएस अफसर के घर में रहा और इन्हीं 46 मिनट में उसने आईआरएस अफसर की 22 साल की बेटी के साथ जबरदस्ती की, फिर फोन चार्जर के वायर से लड़की का गला घोंटा, उसके सिर पर किसी वजनी चीज से हमला किया. इसके बाद घर से करीब ढाई लाख रुपये लूट कर निकल गया.

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वारदात के दौरान उसकी पैंट पर खून के छींटे आ गए थे. जूते पर भी खून लग चुका था. इसीलिए राहुल ने घर के अंदर ही पैंट बदली और घर वालों के ही चप्पल पहन कर घर में ही रखे पिट्ठू बैग में लूट का सामान डाल कर निकल गया. असल में राहुल को उस घर की हर छोटी-छोटी जानकारी थी. उसे पता था कि घर में आईआरएस अफसर उनकी पत्नी और उनकी बेटी रहती है. पति-पत्नी हर सुबह 6 बजे जिम के लिए निकल जाते हैं. साढ़े सात बजे से पहले वो वापस नहीं लौटते. घर में जो दो नौकर काम करते हैं, वो भी 8 बजे के बाद ही आते हैं. नौकरों के लिए घर के मेन डोर की चाबी दरवाजे के बाहर एक खास जगह पर रखी जाती है. ये जानकारी राहुल को इसलिए थी क्योंकि वो इस घर में 7 महीने पहले तक काम कर चुका था.

पति-पत्नी जब घर वापस लौटते हैं, तब पहली बार इस कत्ल की जानकारी बाहर आती है. इसी के साथ अब पुलिस मौके पर थी. क्योंकि ये पूरा पॉश इलाका है, लिहाजा जल्द ही सीसीटीवी कैमरों की टाइमिंग से ये खुलासा हो जाता है कि इस कत्ल के पीछे किसका हाथ है. क्योंकि कैमरे में कैद लड़के को देखते ही आईआरएस अफसर और उनकी पत्नी पहचान जाती हैं कि ये उनका पुराना नौकर राहुल है. यानी कत्ल के घंटे भर के अंदर-अंदर कातिल का नाम और चेहरा बेनकाब हो चुका था. यहां तक कि उसके घर का पता तक पुलिस वालों को मालूम था. राहुल दिल्ली के करीब अलवर के राजगढ़ का रहने वाला था.

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तो अब सवाल ये था कि वारदात के 12 घंटे के अंदर अंदर दिल्ली पुलिस राहुल तक कैसे पहुंची? राहुल अलवर से दिल्ली इस घर तक कैसे पहुंचा? अलवर से निकलने से पहले 20 अप्रैल की रात को उसने क्या किया? 21 अप्रैल को आईआरएस अफसर की बेटी का कत्ल करने के बाद वो कहां-कहां गया? कहां छुपा? कैसे छुपा? और फिर कैसे पुलिस उस तक पहुंची? तो पेश है कातिल की करतूत की पूरी कहानी.

अलवर के राजगढ़ में मौजूद है राहुल का घर. 12वीं तक राहुल पढ़ने लिखने में बेहद होशियार था. हालांकि दसवीं में भी उसके अच्छे नंबर आए थे. 12वीं में वो 90 फीसदी नंबर लेकर आया था. लेकिन 12वीं के बाद अचानक राहुल को ऑनलाइन गेमिंग की लत लग गई. खास तौर पर वो ऑनलाइन लूडो खेला करता था. इसी लूडो की लत की वजह से उसने कई बार घर के सामान, 10वीं, 12वीं की मार्कशीट और यहां तक कि अपना मोबाइल भी गिरवी रखा था. कुछ दिन पहले ही उसने इसी ऑनलाइन गेमिंग से 5 लाख रुपये जीते थे. जबकि उसका दोस्त विष्णु 90 हजार ही जीत पाया था.

20 अप्रैल को राहुल के गांव में किसी की शादी थी. राहुल का दोस्त विष्णु भी उस शादी में जा रहा था. विष्णु ने राहुल को अपनी मोटरसाइकिल दी और कहा कि मोटरसाइकिल और चाबी वो उसके घर जाकर वो उसकी पत्नी को दे दे. चाबी देने के बहाने राहुल दोस्त के घर गया. पत्नी अकेली थी. उसने अपने ही दोस्त की पत्नी के साथ जबरदस्ती की. हालांकि राहुल की बहन का कहना है कि लूडो में जीते और हारे पैसे की वजह से विष्णु ने राहुल के खिलाफ झूठा इल्जाम लगाया है. राहुल की बहन का कहना है कि विष्णु ने खुद अपने 90 हजार राहुल को लूडो में खेलने के लिए दिए थे, ताकि वो जीत सके. लेकिन राहुल वो 90 हजार भी हार गया. विष्णु अब उससे पैसे मांगने लगा. राहुल विष्णु को वही पैसे लौटाने के लिए पैसों का इंतजाम करने दिल्ली चला गया.

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असल में राहुल आईआरएस अफसर के घर काम कर चुका था. उसे पता था कि उस घर में काफी पैसे हैं. घर में दाखिल होने के लिए चाबी कहां होती है, घर के लोग कब किस वक्त कहां होते हैं, ये सब उसे पता था. 21 अप्रैल की रात राहुल अपने उसी दोस्त विष्णु की पत्नी के साथ जबरदस्ती करने के बाद अलवर छोड़ देता है. फिर उसी विष्णु की बाइक से वो दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे पर पहुंचता है. उसी वक्त वहां से एक इको वैन गुजर रही थी, जो राहुल के ही गांव की थी. राहुल ने इको वैन के ड्राइवर को 6 हजार रुपये देने का वादा किया और उसे दिल्ली छोड़ने के लिए कहा. उसी वैन से वो 22 अप्रैल की सुबह सीधे अमर कॉलोनी से थोड़ी दूरी पर पहुंचता है. फिर ड्राइवर को रुकने का कह कर वहां से भाग जाता है. बिना पैसे दिए.

फिर ठीक सुबह 6 बजकर 36 मिनट पर वो अमर कॉलोनी में मेन गेट पर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो जाता है. आईआरएस अफसर के घर में घुसने से पहले उसे यही अंदाजा था कि घर में कोई नहीं होगा. लेकिन पढ़ाई की वजह से आईआरएस अफसर की बेटी घर में थी. राहुल ने पहले उसका रेप किया. फिर कत्ल. यानी 9 घंटे अंदर-अंदर राहुल ने दूसरी बार रेप किया. इस बार रेप के साथ मर्डर भी था. 

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राहुल की पहचान होते ही दिल्ली पुलिस की एक टीम फौरन अलवर में राजगढ़ पहुंचती है. वहां उसके चाचा और बाकी रिश्तेदारों से पूछताछ करने पर पता चलता है कि राहुल ने अपना मोबाइल 20 हजार रुपये में बेच दिया है. विष्णु की पत्नी का रेप करने के बाद उसकी पत्नी का मोबाइल भी अपने साथ ले गया. ये बात दिल्ली पुलिस को जैसे ही पता चली पुलिस ने नंबर ट्रैक पर लगाया. तो पता चला कि राहुल नॉर्मल कॉल करने की बजाय इंटरनेट कॉल का इस्तेमाल कर रहा था. लेकिन इसके लिए वाई-फाई का कनेक्शन जरूरी था. 

उस फोन की लोकेशन पुलिस तभी पता कर सकती थी, जब ये किसी वाई-फाई के संपर्क में हो और राहुल कॉल कर रहा हो. इसी बीच पुलिस को ये भी पता चला कि राहुल का एक कजन गुरुग्राम में रहता है. पुलिस ने उसका कजिन के मोबाइल नंबर को भी ट्रैक करना शुरू किया. ट्रैक करते ही पता चला कि 22 अप्रैल की सुबह से दोपहर तक राहुल के कजिन के मोबाइल पर बार-बार एक इंटरनेट कॉल आ रही है. पुलिस ने गुरुग्राम में राहुल के कजिन से पूछताछ की, तो पता चला कि वो कॉल राहुल कर रहा था. 

अब इस वाई-फाई कॉल के जरिए ही शाम होने से पहले पुलिस को जानकारी मिली कि जिस वाई फाई कनेक्शन का इस्तेमाल कर राहुल कर रहा है, वो दिल्ली के द्वारका इलाके के एक होटल का है. ये जानकारी मिलते ही पुलिस की टीम द्वारका में उस होटल पर दबिश डालती है और होटल के ही एक कमरे में मौजूद राहुल को दबोच लेती है. राहुल को बुधवार को दिल्ली की एक अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है. अब पुलिस उसे क्राइम सीन के अलावा अलवर भी लेकर जाएगी. इस वारदात ने सबको हैरान कर दिया है.

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(दिल्ली से अरविंद ओझा और अंशुल सिंह के साथ हिमांशु मिश्र का इनपुट)

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